कंगाल को भी राजा बना सकता है 'दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र', रोजाना करें पाठ, यहां देखें संपूर्ण Lyrics

Daridrya Dahana Shiva Stotram Lyrics: ‘दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र’ को महा शक्तिशाली माना जाता है, जो कि देवों के देव महादेव को समर्पित है. इसके नियमित विधि पूर्वक पाठ से कोई भी कंगाल व्यक्ति राजा बन सकता है. यहां पर आप ‘दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र’ के सही लिरिक्स, महत्व और लाभ के बारे में जान सकते हैं.

Daridra Dahan Shiv Stotra Lyrics

Credit- AI Gemini

Daridra Dahan Shiv Stotra Lyrics: यदि आप लंबे समय से कर्ज या आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं तो भगवान शिव की कृपा से आपकी ये समस्या दूर हो सकती है. पौराणिक शास्त्रों में ‘दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र’ का उल्लेख किया गया है, जो कि देवों के देव महादेव को समर्पित है. इस स्तोत्र में कुल 9 श्लोक हैं, जिसमें से पहले 8 श्लोक के जरिए भगवान शिव की स्तुति की जाती है, जबकि अंतिम 9वां श्लोक ‘फलश्रुति’ है यानी पाठ करने के लाभ के बारे में बताता है.

विज्ञापन

मान्यता है कि जो लोग नियमित रूप से ‘दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र’ का पाठ करते हैं, उन्हें पैसों की कमी तंग नहीं करती है. यहां तक कि एक कंगाल व्यक्ति भी राजा बन सकता है. चलिए अब जानें ‘दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र’ के लिरिक्स और इससे जुड़े अन्य जरूरी नियमों के बारे में.

विज्ञापन

दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र के लिरिक्स

विश्वेश्वराय नरकार्णव तारणाय, कणामृताय शशिशेखरधारणाय।
कर्पूरकान्तिधवलाय जटाधराय, दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय॥१॥
गौरीप्रियाय रजनीशकलाधराय, कालान्तकाय भुजगाधिपकङ्कणाय।
गंगाधराय गजराजविमर्दनाय, दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय॥२॥
भक्तिप्रियाय भवरोगभयापहाय, उग्राय दुर्गभवसागरतारणाय।
ज्योतिर्मयाय गुणनामसुनृत्यकाय, दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय॥३॥
चर्मम्बराय शवभस्मविलेपनाय, भालेक्षणाय मणिकुण्डलमण्डिताय।
मंझीरपादयुगलाय जटाधराय, दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय॥४॥
पञ्चाननाय फणिराजविभूषणाय, हेमांशुकाय भुवनत्रयमण्डिताय।
आनन्दभूमिवरदाय तमोमयाय, दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय॥५॥
भानुप्रियाय भवसागरतारणाय, कालान्तकाय कमलासनपूजिताय।
नेत्रत्रयाय शुभलक्षण लक्षिताय, दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय॥६॥
रामप्रियाय रघुनाथवरप्रदाय, नागप्रियाय नरकार्णवतारणाय।
पुण्येषु पुण्यभरिताय सुरार्चिताय, दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय॥७॥
मुक्तेश्वराय फलदाय गणेश्वराय, गीतप्रियाय वृषभेश्वरवाहनाय।
मातङ्गचर्मवसनाय महेश्वराय, दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय॥८॥
वसिष्ठेन कृतं स्तोत्रं सर्वरोगनिवारणं। सर्वसंपत्करं शीघ्रं पुत्रपौत्रादिवर्धनम्।
त्रिसंध्यं यः पठेन्नित्यं स हि स्वर्गमवाप्नुयात्॥
॥ इति वसिष्ठ विरचितं दारिद्र्यदहनशिवस्तोत्रं सम्पूर्णम्॥

विज्ञापन

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ