---विज्ञापन---

Religion

Baglamukhi Jayanti 2026: बगलामुखी जयंती आज, जानें मां पीताम्बरा की पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और व्रत कथा

Baglamukhi Jayanti 2026 Shubh Muhurat, Puja Vidhi & Vrat Katha: आज 24 अप्रैल 2026, वार शुक्रवार को देशभर में बगलामुखी जयंती मनाई जा रही है, जो कि दस महाविद्याओं में से आठवीं देवी माता बगलामुखी को समर्पित है. आइए जानें बगलामुखी जयंती का महत्व, पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और व्रत की कथा आदि के बारे में.

Author
Written By: Nidhi Jain Updated: Apr 24, 2026 06:49
Baglamukhi Jayanti 2026
Credit- Pinterest

Baglamukhi Jayanti 2026 Shubh Muhurat, Puja Vidhi & Vrat Katha: हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को 10 महाविद्याओं में से एक देवी बगलामुखी को समर्पित बगलामुखी जयंती मनाई जाती है. इस बार आज 24 अप्रैल 2026, वार शुक्रवार को बगलामुखी जयंती का पर्व मनाया जा रहा है. मान्यता है कि बगलामुखी जयंती के दिन पूजा-पाठ और व्रत रखने से बुरी शक्तियों से मुक्ति मिलती है. साथ ही शत्रुओं और बाधाओं का नाश होता है. हालांकि, कुछ लोग कई विशेष कार्य में सफलता पाने के लिए भी देवी बगलामुखी यानी माता पीताम्बरा एवं मां ब्रह्मास्त्र की उपासना करते हैं.

चलिए अब जानें बगलामुखी जयंती के दिन माता पीताम्बरा की पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त क्या है. साथ ही आप बगलामुखी जयंती के दिन पढ़ी जाने वाली व्रत कथा और पूजन विधि के बारे में जानेंगे.

---विज्ञापन---

बगलामुखी जयंती की पूजा का शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त- सुबह में 04:19 से 05:03
  • अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:53 से दोपहर 12:46
  • सायाह्न सन्ध्या- शाम में 06:52 से 07:57
  • निशिता मुहूर्त- रात 11:57 से सुबह 12:41
  • अमृत काल- दोपहर में 02:01 से 03:35

ये भी पढ़ें- Kedarnath Baba Ki Aarti: घर बैठे भी प्राप्त कर सकते हैं केदार बाबा की विशेष कृपा, पूजा के दौरान पढ़ें ये आरती

बगलामुखी जयंती की पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और शुद्ध पीले रंग के वस्त्र धारण करें.
  • हाथ में जल, फल या फूल लेकर पूजा-व्रत का संकल्प लें.
  • घर के मंदिर में एक चौकी पर पीले रंग के कपड़े के ऊपर माता बगलामुखी की मूर्ति, तस्वीर या यंत्र की स्थापना करें.
  • देवी का हल्दी से तिलक करें. साथ ही उन्हें पीले रंग की पूजा सामग्री जैसे कि फूल, अक्षत, फल, वस्त्र, माला और मिठाई अर्पित करें.
  • देसी घी या सरसों के तेल का दीपक जलाने के बाद मंत्र जाप करें.
  • व्रत की कथा सुनें या पढ़ें.
  • आरती करते पूजा का समापन करें.
  • अष्टमी तिथि समाप्त होने के बाद व्रत का पारण करें.

ये भी पढ़ें- Baba Vanga Predictions: साल 2026 खत्म होने से पहले ये 5 राशियां होंगी मालामाल! मरने से पहले बाबा वेंगा ने की थी भविष्यवाणी

---विज्ञापन---

बगलामुखी जयंती की व्रत कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सत्ययुग में एक दिन अत्यन्त भीषण चक्रवात सम्पूर्ण पृथ्वी को नष्ट करने में लगा था, जिससे बचने के लिए जगत के पालनहार भगवान विष्णु कठोर तपस्या में लीन हो गए. विष्णु जी की कड़ी तपस्या से देवी महात्रिपुरा प्रसन्न हुईं और भीषण चक्रवात को शांत कर दिया. इसके बाद देवी महात्रिपुरा ने सृष्टि पर भ्रमण करने की योजना बनाई.

भ्रमण करते-करते देवी हरिद्रा सरोवर पर पहुंच गई, जिसमें उन्होंने जलक्रीड़ा भी की. सरोवर के पास सौराष्ट्र नामक स्थान था, जहां पीले सरोवर में उनके हृदय से देवी बगलामुखी का स्वरूप प्रकट हुआ.

ये भी पढ़ें- Navpancham Drishti: होने वाला है इन 4 राशियों का अच्छा समय शुरू, मंगल-यम बनाएंगे नवपंचम दृष्टि

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Apr 24, 2026 06:48 AM

End of Article
संबंधित खबरें

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.