Baglamukhi Jayanti 2026 Shubh Muhurat, Puja Vidhi & Vrat Katha: हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को 10 महाविद्याओं में से एक देवी बगलामुखी को समर्पित बगलामुखी जयंती मनाई जाती है. इस बार आज 24 अप्रैल 2026, वार शुक्रवार को बगलामुखी जयंती का पर्व मनाया जा रहा है. मान्यता है कि बगलामुखी जयंती के दिन पूजा-पाठ और व्रत रखने से बुरी शक्तियों से मुक्ति मिलती है. साथ ही शत्रुओं और बाधाओं का नाश होता है. हालांकि, कुछ लोग कई विशेष कार्य में सफलता पाने के लिए भी देवी बगलामुखी यानी माता पीताम्बरा एवं मां ब्रह्मास्त्र की उपासना करते हैं.
चलिए अब जानें बगलामुखी जयंती के दिन माता पीताम्बरा की पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त क्या है. साथ ही आप बगलामुखी जयंती के दिन पढ़ी जाने वाली व्रत कथा और पूजन विधि के बारे में जानेंगे.
बगलामुखी जयंती की पूजा का शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त- सुबह में 04:19 से 05:03
- अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:53 से दोपहर 12:46
- सायाह्न सन्ध्या- शाम में 06:52 से 07:57
- निशिता मुहूर्त- रात 11:57 से सुबह 12:41
- अमृत काल- दोपहर में 02:01 से 03:35
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बगलामुखी जयंती की पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और शुद्ध पीले रंग के वस्त्र धारण करें.
- हाथ में जल, फल या फूल लेकर पूजा-व्रत का संकल्प लें.
- घर के मंदिर में एक चौकी पर पीले रंग के कपड़े के ऊपर माता बगलामुखी की मूर्ति, तस्वीर या यंत्र की स्थापना करें.
- देवी का हल्दी से तिलक करें. साथ ही उन्हें पीले रंग की पूजा सामग्री जैसे कि फूल, अक्षत, फल, वस्त्र, माला और मिठाई अर्पित करें.
- देसी घी या सरसों के तेल का दीपक जलाने के बाद मंत्र जाप करें.
- व्रत की कथा सुनें या पढ़ें.
- आरती करते पूजा का समापन करें.
- अष्टमी तिथि समाप्त होने के बाद व्रत का पारण करें.
बगलामुखी जयंती की व्रत कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सत्ययुग में एक दिन अत्यन्त भीषण चक्रवात सम्पूर्ण पृथ्वी को नष्ट करने में लगा था, जिससे बचने के लिए जगत के पालनहार भगवान विष्णु कठोर तपस्या में लीन हो गए. विष्णु जी की कड़ी तपस्या से देवी महात्रिपुरा प्रसन्न हुईं और भीषण चक्रवात को शांत कर दिया. इसके बाद देवी महात्रिपुरा ने सृष्टि पर भ्रमण करने की योजना बनाई.
भ्रमण करते-करते देवी हरिद्रा सरोवर पर पहुंच गई, जिसमें उन्होंने जलक्रीड़ा भी की. सरोवर के पास सौराष्ट्र नामक स्थान था, जहां पीले सरोवर में उनके हृदय से देवी बगलामुखी का स्वरूप प्रकट हुआ.
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