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लंबी आयु और पापों से मुक्ति पाने के लिए करें यम स्तोत्रम् का पाठ, देखें Lyrics

Yam Stotram Lyrics: यम स्तोत्रम् एक अत्यंत शक्तिशाली स्तुति है, जिसके नियमित पाठ से हर तरह के भय से मुक्ति पाई जा सकती है. यहां पर यम स्तोत्रम् के लिरिक्स के साथ-साथ महत्व और लाभ के बारे में भी बताया गया है.

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Yam Stotram Lyrics: हिंदू धर्म में यम देव की पूजा का खास महत्व है, जिन्हें यमराज, धर्मराज, मृत्यु देव और न्याय देवता के नामों से भी जाना जाता है. यम देव मृत व्यक्ति की आत्माओं के कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं. साथ ही उन्हें उनके कर्मों के आधार पर स्वर्ग व नर्क में स्थान देते हैं. हालांकि, यम देव की पूजा करने से भी कई बड़े लाभ होते हैं. खासकर, लंबी उम्र और पापों से मुक्ति मिलती है. इसके अलावा व्यक्ति नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त होकर शांति से अपना जीवन व्यतीत करता है. यदि आप भी यम देव की कृपा पाना चाहते हैं तो नियमित रूप से यम स्तोत्रम् का पाठ कर सकते हैं.

यम स्तोत्रम्, यम देव को समर्पित एक शक्तिशाली स्तुति है, जिसके जरिए जीवन के तमाम कष्टों, पितृ दोष और अकाल मृत्यु से रक्षा के लिए प्रार्थना की जाती है. आइए अब जानें यम स्तोत्रम् के लिरिक्स और इस स्तुति से जुड़ी अन्य जरूरी बातों के बारे में.

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यम स्तोत्रम् के लिरिक्स

ऋषिपुत्र उवाच

त्वं धाता च विधाता च श्राद्धे चैव हि दृश्यसे
पितृणां परमो देवः चतुष्पाद नमोऽस्तु ते
कालज्ञश्च कृतज्ञश्च सत्यवादी दृढव्रतः
प्रेतनाथ महाभाग धर्मराज नमोऽस्तु ते
कर्ता कारयिता चैव भूतभव्यभवत् प्रभो
पावको मोहनश्चैव संक्षेपो विस्तरस्तथा
दंडपाणे विरुपाक्ष पाशहस्त नमोऽस्तु ते
आदित्यसदृशाकार सर्वजीवहूर प्रभो
कृष्णवर्ण दुराधर्ष तैलरुप नमोऽस्तु ते
मार्तण्ड सदृश श्रीमान् मार्तण्डसम तेजसा
हव्यकव्यवहः त्वं हि प्रभविष्णो नमोऽस्तु ते
पापहन्ता व्रती श्राद्धी नित्ययुक्तो महातपाः
एकदृग् बहुदृग् भूत्वा काल मृत्यो नमोऽस्तु ते
क्वचित् दण्डी क्वचित् मुंडी क्वचित् कालो दुरासदः
क्वचित् बालः क्वचित् वृद्धः क्वचित् रौद्र नमोऽस्तु ते
त्वया विराजितो लोकः शासता धर्महेतुना
प्रत्यक्षं दृश्यते देव त्वद्विना न च सिद्धयति
देवानां परमं दैवं तपसां परमं तपः
जपानां परमं जप्यं त्वत्तः चान्यो न दृश्यते
ऋषयो वा तथा क्रुद्धा हतबन्धु सुहृज्जनाः
पतिव्रतास्तु या नार्यो दुःखिताः तपसि स्थिताः
नत्वा शक्ता इह स्थानात् पातनाय कदाचन
तस्मात् त्वं सर्वदेवेषु एको धर्मभृतां वरः
कृतज्ञः सत्यवादी च सर्वभूतहिते रतः

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|| यम स्तोत्रम् ||

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

Frequently Asked Questions

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी सावित्री ने यम स्तोत्रम् की रचना की थी.
अपने पति सत्यवान के प्राणों की रक्षा करने के लिए देवी सावित्री ने प्राचीन काल में यम स्तोत्रम् की रचना की थी.
प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त, मध्याह्न या सूर्यास्त के समय यम स्तोत्रम् का पाठ करना शुभ होता है.
First published on: Jun 04, 2026 03:16 PM

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About the Author

Nidhi Jain

निधि की पढ़ने और लिखने में हमेशा से रुचि रही है. पिछले 3 साल से वह डिजिटल मीडिया से जुड़ी हुई हैं. वर्तमान में News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रही हैं. न्यूज 24 से जुड़ने से पहले निधि जैन दिल्ली प्रेस संस्थान में कार्यरत थीं. निधि ने Guru Jambheshwar University, Hisar Haryana से BJMC (ग्रेजुएशन) की पढ़ाई की है.

📧 Email: nidhi.jain@bagconvergence.in

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