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बिना पूजा सामग्री के खुश होंगे भोलेबाबा, पढ़ें Shiv Manas Puja Stotram, देखें Lyrics

Shiv Manas Puja Stotram: सनातन धर्म में मानसिक पूजा को सर्वश्रेष्ठ माना गया है, जिसके लिए किसी भी प्रकार की सामग्री की जरूरत नहीं होती है. आज हम आपको भोलेबाबा को समर्पित शिव मानस पूजा स्तोत्रम् के लिरिक्स, महत्व व लाभ आदि के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका पाठ बिना पूजा सामग्री के भी किया जा सकता है.

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Shiv Manas Puja Stotram: अधिकतर लोग सोचते हैं कि देवी-देवता तभी खुश होते हैं, जब उन्हें पूजा सामग्री अर्पित की जाती है. लेकिन ऐसा नहीं है. शास्त्रों में कई ऐसे स्तोत्रम् के बारे में बताया गया है, जिनका बिना किसी पूजा सामग्री के भी पाठ किया जा सकता है. यदि इन स्तोत्रम् का पाठ कोई व्यक्ति सच्चे मन से करता है तो उसे बड़ी से बड़ी पूजा के समान ही फल मिलता है. खासकर, भोलेबाबा को समर्पित शिव मानस पूजा स्तोत्रम् का पाठ बिना किसी पूजा सामग्री के किया जा सकता है.

शिव मानस पूजा स्तोत्रम् एक प्रभावशाली व शक्तिशाली स्तोत्र है, जिसका पाठ बिना किसी भौतिक सामग्री के केवल शुद्ध भाव से किया जा सकता है. इस स्तोत्रम् को पढ़ने के लिए भोलेबाबा की मूर्ति या किसी भी तरह की सामग्री की जरूरत नहीं होती है. चलिए अब जानें शिव मानस पूजा स्तोत्रम् के लिरिक्स और इससे अन्य जरूरी बातों के बारे में.

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शिव मानस पूजा स्तोत्रम् के लिरिक्स

रत्नैः कल्पितमासनं हिमजलैः स्नानं च दिव्याम्बरं।
नानारत्नविभूषितं मृगमदा मोदाङ्कितं चन्दनम्।।
जातीचम्पकविल्वपत्ररचितं पुष्पं च धूपं तथा।
दीपं देव! दयानिधे! पशुपते! हृत्कल्पितं गृह्यताम्॥1॥
सौवर्णे नवरलखण्डरचिते पात्रे घृतं पायसं।
भक्ष्यं पञ्चविधं पयोदधियुतं रम्भाफलं पानकम्।।
शाकानामयुतं जलं रुचिकरं कर्पूरखण्डोज्ज्वलं।
ताम्बूलं मनसा मया विरचितं भक्त्त्या प्रभो स्वीकुरु॥2॥
छत्रं चामरयोर्युगं व्यजनकं चादर्शकं निर्मलं।
वीणाभेरिमृद‌ङ्गकाहलकला गीतं च नृत्यं तथा।।
साष्टाङ्गं प्रणतिः स्तुतिर्बहुविधा ह्येतत्समस्तं मया।
संकल्पेन समर्पितं तव विभो पूजां गृहाण प्रभो!॥3॥
आत्मा त्वं गिरिजा मतिः सहचराः प्राणाः शरीरं गृहं।
पूजा ते विषयोपभोगरचना निद्रासमाधिस्थितिः।।
सञ्चारः पदयोः प्रदक्षिणविधिः स्तोत्राणि सर्वा गिरो।
यद्यत्कर्म करोमि तत्तदखिलं शम्भो तवाराधनम्।।4।।
करचरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं वा, श्रवणनयनजं वा मानसं वाऽपराधम्।
विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व, जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो॥5॥
॥इति श्रीशिवमानसपूजा सम्पूर्णम्॥

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

Frequently Asked Questions

आदि शंकराचार्य ने इस दिव्य स्तोत्रम् की रचना की थी.
किसी भी शांत जगह पर बैठकर आंखें बंद करके आप शिव मानस पूजा स्तोत्रम् का पाठ कर सकते हैं.
शिव मानस पूजा स्तोत्रम् एक बहुत बड़ी सीख देता है कि भगवान को खुश करने व उनकी कृपा पाने के लिए भौतिक वस्तुओं की जरूरत नहीं होती है, वो तो केवल सच्चे प्रेम व भाव के भूखे होते हैं.
First published on: Jun 05, 2026 02:31 PM

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About the Author

Nidhi Jain

निधि की पढ़ने और लिखने में हमेशा से रुचि रही है. इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में न्यूज राइटिंग से की थी, जिसके बाद देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों पर व्यापक अध्ययन किया. अब पिछले 4 साल से वह डिजिटल मीडिया से जुड़ी हुई हैं. वर्तमान में News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन में काम कर रही हैं.

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