ईरान में हुआ परमाणु धमाका तो क्या भारत तक आएगा रेडिएशन? जानिए- किन देशों पर छा सकता है मौत का साया

मिडिल ईस्ट के सुलगते हालातों ने आज पूरी दुनिया को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां 'परमाणु युद्ध' शब्द अब सिर्फ कल्पना नहीं बल्कि एक डरावनी चर्चा बन चुका है. ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग अगर खतरनाक स्तर पर पहुंचती है और ईरानी जमीन पर कोई परमाणु विस्फोट होता है, तो इसका असर केवल सरहदों तक सीमित नहीं रहेगा. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 2500 किलोमीटर दूर बैठा भारत इस तबाही की जद में आएगा? क्या ईरान से उठने वाली रेडियोधर्मी धूल राजस्थान, गुजरात या दिल्ली की हवाओं को जहरीला बना देगी? (AI Image)

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मिडिल ईस्ट के सुलगते हालातों ने आज पूरी दुनिया को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां 'परमाणु युद्ध' शब्द अब सिर्फ कल्पना नहीं बल्कि एक डरावनी चर्चा बन चुका है. ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग अगर खतरनाक स्तर पर पहुंचती है और ईरानी जमीन पर कोई परमाणु विस्फोट होता है, तो इसका असर केवल सरहदों तक सीमित नहीं रहेगा. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 2500 किलोमीटर दूर बैठा भारत इस तबाही की जद में आएगा? क्या ईरान से उठने वाली रेडियोधर्मी धूल राजस्थान, गुजरात या दिल्ली की हवाओं को जहरीला बना देगी? (AI Image)

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दूरी का गणित

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ईरान के मुख्य परमाणु ठिकानों से भारत की दूरी लगभग 2500 किमी है. वैज्ञानिक रूप से इतनी लंबी दूरी तय करते समय भारी और घातक रेडियोधर्मी कण काफी हद तक कम हो जाते हैं, जिससे भारत में तत्काल 'एक्यूट रेडिएशन सिकनेस' का खतरा कम रहता है. (AI Image)

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हवाओं का असर

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अगर हवा का रुख पश्चिम से पूर्व की ओर रहा, तो 48 से 72 घंटों के भीतर परमाणु बादल भारतीय सीमा में प्रवेश कर सकते हैं. ऐसी स्थिति में राजस्थान, पंजाब और दिल्ली जैसे राज्यों में रेडियोएक्टिव कणों की मौजूदगी दर्ज की जा सकती है. (AI Image)

पड़ोसी देशों पर 'मौत' का साया

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परमाणु धमाके की स्थिति में सबसे ज्यादा तबाही इराक, अफगानिस्तान और पाकिस्तान जैसे देशों में होगी. 1000 किमी के दायरे में आने वाले इन मुल्कों को सीधे तौर पर घातक रेडिएशन और जानलेवा धूल का सामना करना पड़ेगा. (AI Image)

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समुद्री और जल संकट

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फारस की खाड़ी और अरब सागर के तटीय परमाणु संयंत्रों पर हमले से समुद्री पानी जहरीला हो सकता है. यह न केवल पेयजल व्यवस्था को ठप कर देगा, बल्कि समुद्री लहरें इस प्रदूषण को भारतीय तटों तक भी पहुंचा सकती हैं. (AI Image)

भारत के लिए दोहरी चुनौती

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रेडिएशन के अलावा, भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता ऊर्जा सुरक्षा और खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों प्रवासी भारतीय हैं. युद्ध की स्थिति में उनकी सुरक्षा और रेस्क्यू ऑपरेशन भारत के लिए सबसे बड़ी मानवीय चुनौती होगी. (AI Image)

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लेखक के बारे में

Arif Khan

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आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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