बिना बहुमत के 5 साल चली है ये सरकार, क्या TVK भी दोहराएगी इतिहास?
तमिलनाडु में TVK प्रमुख विजय थलापति सरकार बनाने की कोशिश में लगे हैं. अल्पमत सरकार की चर्चा के बीच एक बार फिर पीवी नरसिम्हा राव का नाम सुर्खियों में है. जानिए कैसे उन्होंने बिना पूर्ण बहुमत के 5 साल तक देश की सरकार चलाई और भारकी अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी.

देश की सबसे सफल अल्पमत सरकार
2 / 6भारत की राजनीति में कई अल्पमत सरकारें बनीं, लेकिन सबसे सफल और लंबा कार्यकाल पूरा करने वाली सरकार P. V. Narasimha Rao की मानी जाती है. उन्होंने 1991 से 1996 तक बिना स्पष्ट बहुमत के केंद्र सरकार चलाई. 1991 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन उसे पूर्ण बहुमत नहीं मिला. पार्टी को लगभग 232 सीटें मिली थीं, जो बहुमत के आंकड़े से काफी कम थीं. इसके बावजूद नरसिम्हा राव ने सरकार बना ली.
बाहरी समर्थन से बनी सरकार
3 / 6नरसिम्हा राव ने वामपंथी दलों, छोटे क्षेत्रीय दलों और निर्दलीय सांसदों के समर्थन से सरकार बनाई. उस समय राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना था कि ये सरकार ज्यादा समय नहीं टिक पाएगी. नरसिम्हा राव ने 21 जून 1991 को प्रधानमंत्री पद संभाला और मई 1996 तक सत्ता में बने रहे.
आर्थिक संकट में संभाली देश की कमान
4 / 6जब नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने तब भारत गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था. विदेशी मुद्रा भंडार बेहद कम हो चुका था और देश के पास आयात के लिए सीमित संसाधन बचे थे.
मनमोहन सिंह को बनाया वित्त मंत्री
5 / 6नरसिम्हा राव ने प्रसिद्ध अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह को वित्त मंत्री बनाया. इसके बाद 1991 में शुरू हुए आर्थिक सुधारों ने भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी. विदेशी निवेश बढ़ा, व्यापार के नियम आसान हुए और निजी कंपनियों को नए अवसर मिले. (All Photos Credit: Social Media)
राजनीतिक चाणक्य कहलाए नरसिम्हा राव
6 / 6अल्पमत सरकार चलाना आसान नहीं था, लेकिन नरसिम्हा राव ने राजनीतिक समझदारी और गठबंधन प्रबंधन के दम पर कई अविश्वास प्रस्तावों का सामना किया. इसी वजह से उन्हें कई लोग ‘राजनीतिक चाणक्य’ भी कहते थे.



















