गुजरात की सियासत में एक बार फिर बड़ा सियासी फेरबदल देखने को मिल सकता है. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज राजनेता शंकरसिंह वाघेला के फिर से कांग्रेस में शामिल होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं. 86 वर्षीय वाघेला ने खुद पार्टी में लौटने की इच्छा जताई है. सूत्रों के अनुसार, गुजरात कांग्रेस की राज्य इकाई ने उनकी वापसी को अपनी मंजूरी दे दी है, हालांकि इस पर पार्टी हाईकमान की अंतिम मुहर लगना अभी बाकी है.
प्रदेश कांग्रेस चाहती है कि वाघेला जल्द से जल्द पार्टी में शामिल हों. स्थानीय नेताओं की योजना है कि आगामी गांधीनगर नगर निगम चुनाव में उन्हें स्टार प्रचारक के रूप में मैदान में उतारा जाए. जब इस बारे में वरिष्ठ कांग्रेस नेता शक्तिसिंह गोहिल से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि ‘थोड़ा इंतजार कीजिए, सही समय पर सबको सही जवाब मिल जाएगा’
शंकरसिंह वाघेला का सियासी सफर और लंबा अनुभव
शंकरसिंह वाघेला का गुजरात की राजनीति में बेहद लंबा और प्रभावकारी इतिहास रहा है. उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत जनसंघ से की थी. इसके बाद उन्होंने केशुभाई पटेल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मिलकर राज्य में BJP की नींव मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई. हालांकि, आपसी मतभेदों के चलते 1996 में उन्होंने भाजपा से अपनी राहें अलग कर लीं और ‘राष्ट्रीय जनता पार्टी’ बनाई. इसके बाद वह 1996 से 1997 तक कांग्रेस के बाहरी समर्थन से गुजरात के मुख्यमंत्री रहे. साल 1998 में उन्होंने अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया.
कांग्रेस के साथ अपने दो दशक के लंबे सफर में वाघेला यूपीए सरकार में केंद्रीय कपड़ा मंत्री रहे और गुजरात विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली. बाद में 2017 के दौरान उन्होंने कांग्रेस का साथ छोड़ दिया था.
कांग्रेस को अनुभवी चेहरे की दरकार
अगर कांग्रेस आलाकमान से मंजूरी मिलती है, तो यह वाघेला के सियासी सफर का एक और बड़ा मोड़ साबित होगा. गुजरात कांग्रेस उनके लंबे राजनीतिक अनुभव और जमीनी नेटवर्क का फायदा नगर निगम चुनावों के साथ-साथ आने वाले विधानसभा चुनावों में भी उठाना चाहती है. फिलहाल, पार्टी कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व के अंतिम फैसले पर टिकी हैं.