बीयर के शौकीनों को झटका! गर्मियों में हो सकती हैं महंगी; जानिए कितना पड़ेगा जेब पर भार
साल 2026 की गर्मियां बीयर के शौकीनों के लिए काफी भारी पड़ने वाली हैं. ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध ने ग्लोबल सप्लाई चेन को अस्त-व्यस्त कर दिया है. भारत, जो अपनी नेचुरल गैस का 40% हिस्सा कतर से आयात करता है, अब ईंधन की कमी और बढ़ती कीमतों का सामना कर रहा है. इसका सीधा असर कांच की बोतलों और पैकेजिंग मटेरियल पर पड़ा है, जिससे दिग्गज बीयर कंपनियों ने कीमतों में 12-15% बढ़ोतरी की मांग की है.

साल 2026 की गर्मियां बीयर के शौकीनों के लिए काफी भारी पड़ने वाली हैं. ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध ने ग्लोबल सप्लाई चेन को अस्त-व्यस्त कर दिया है. भारत, जो अपनी नेचुरल गैस का 40% हिस्सा कतर से आयात करता है, अब ईंधन की कमी और बढ़ती कीमतों का सामना कर रहा है. इसका सीधा असर कांच की बोतलों और पैकेजिंग मटेरियल पर पड़ा है, जिससे दिग्गज बीयर कंपनियों ने कीमतों में 12-15% बढ़ोतरी की मांग की है.
महंगाई की दस्तक
2 / 6ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण गैस की किल्लत बढ़ गई है, जिससे भारत में बीयर की कीमतों में 15% तक उछाल आने की संभावना है. ब्रुअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने बढ़ती लागत को देखते हुए राज्यों से कीमतें बढ़ाने की अनुमति मांगी है.
कांच और पैकेजिंग संकट
3 / 6कांच की बोतलों की कीमतों में 20% की बढ़ोतरी हुई है, जबकि पेपर कार्टन के रेट दोगुने हो गए हैं. गैस की कमी के कारण फिरोजाबाद जैसे ग्लास-मेकिंग हब में कई फैक्ट्रियों ने अपना उत्पादन 40% तक कम कर दिया है.
कतर और गैस सप्लाई
4 / 6भारत अपनी जरूरत की 40% गैस कतर से मंगवाता है, लेकिन ईरानी हमलों ने कतर की निर्यात क्षमता को प्रभावित किया है. ईंधन की इस कमी ने भट्टियों और प्रोडक्शन लाइनों को ठप होने की कगार पर खड़ा कर दिया है.
एल्युमीनियम और केन की कमी
5 / 6केवल बोतल ही नहीं, बल्कि एल्युमीनियम केन की सप्लाई पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं. शिपिंग में देरी और कच्चे माल की कमी के कारण पीक समर सीजन में केन बीयर की किल्लत हो सकती है.
सिर्फ बीयर नहीं, पानी भी महंगा
6 / 6संकट का असर बीयर से आगे बढ़कर जूस, केचप और बोतल बंद पानी तक पहुंच गया है. प्लास्टिक की बोतलों और ढक्कनों के दाम बढ़ने से पानी की बोतलों की कीमतों में भी 11% तक की तेजी देखी जा रही है.



















