वंदे मातरम के वो 6 छंद, जिन्हें किया गया अनिवार्य, क्या कहती है गृह मंत्रालय की नई गाइडलाइन?
गृह मंत्रालय की नई गाइडलाइन के मुताबिक, वंदे मातरम के पहले 6 छंदों को ही सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में अनिवार्य रूप से गाया या बजाया जाएगा. इन छंदों में भारत की प्रकृति, संस्कृति, शक्ति और मातृभूमि के प्रति सम्मान की भावना दिखाई देती है. इन्हें लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है. सरकार का कहना है कि इससे पूरे देश में एक समान परंपरा बनेगी और राष्ट्रीय गीत का सम्मान भी बना रहेगा. स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी दफ्तरों और राष्ट्रीय आयोजनों में इन छंदों का सम्मानपूर्वक गायन या वादन किया जाएगा.

2 / 7पहले छंद में भारत माता को सुजलां-सुफलां कहा गया है, यानी पानी और अन्न से भरपूर भूमि. इसमें हरी-भरी खेती, ठंडी हवाएं, चांदनी रातें और फूलों से लदे पेड़ों का सुंदर चित्रण है. ये छंद भारत की प्राकृतिक सुंदरता और समृद्धि को दिखाता है.
3 / 7दूसरे छंद में भारत माता की शक्ति दिखाई गई है. इसमें करोड़ों लोगों की आवाज, मजबूत भुजाएं और साहस का वर्णन है. इस छंद का भाव ये बताता है कि भारत कमजोर नहीं है, बल्कि वो अपने बल से हर संकट का सामना कर सकता है.
4 / 7तीसरे छंद में भारत माता को विद्या, धर्म, शक्ति और भक्ति का रूप माना गया है. इसमें कहा गया है कि मातृभूमि हर भारतवासी के दिल में बसती है और हर मंदिर में उसकी मौजूदगी महसूस की जाती है. ये छंद भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को दिखाता है.
5 / 7चौथे छंद में भारत माता का दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती के रूप में नमन किया गया है. यहां शक्ति, समृद्धि और ज्ञान का प्रतीकात्मक वर्णन है. ये छंद बताता है कि मातृभूमि ही हमें साहस, संपन्नता और शिक्षा देती है.
6 / 7पांचवें छंद में भारत माता को सुंदर, सरल और मुस्कान से भरी हुई बताया गया है. साथ ही, उन्हें शत्रुओं से रक्षा करने वाली शक्ति के रूप में भी दर्शाया गया है. ये छंद मातृभूमि के पालन-पोषण और सुरक्षा के भाव को जाहिर करता है.
7 / 7छठे और आखिरी अनिवार्य छंद में भारत माता को बार-बार शक्ति का स्वरूप कहा गया है. इस छंद के साथ गीत का समापन होता है और मातृभूमि के प्रति श्रद्धा, सम्मान और समर्पण की भावना व्यक्त की जाती है.



















