मोबाइल-लैपटॉप पर बने इस 'X डस्टबिन' का क्या मतलब हैं? 99% लोग नहीं जानते

क्या आपने कभी मोबाइल, लैपटॉप या टीवी पर बने क्रॉस्ड डस्टबिन के निशान पर गौर किया है? ज्यादातर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं. तो आज इसका मतलब समझते हैं.

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स्मार्टफोन, लैपटॉप या दूसरे इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट खरीदते समय कोई लगो उन पर बने छोटे-छोटे साइन पर ध्यान नहीं देते. इन्हीं में से एक है डस्टबिन पर बना क्रॉस (X) का निशान. ये सिर्फ एक सिंबल नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक कचरे के सही निपटान से जुड़ा एक संकेत हैं.

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क्या बताता है यह निशान?

क्या बताता है यह निशान?2 / 7

ये निशान WEEE (Waste Electrical and Electronic Equipment) नियम का हिस्सा है, जिसे यूरोपीय संघ ने लागू किया है. इसका मतलब है कि इस तरह के इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट को सामान्य घरेलू कूड़े में नहीं फेंकना चाहिए. इन्हें अलग से इकट्ठा करके रीसाइक्लिंग के लिए भेजना जरूरी माना जाता है.

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भारत में भी क्यों दिखाई देता है यह सिंबल?

भारत में भी क्यों दिखाई देता है यह सिंबल?3 / 7

हालांकि WEEE नियम यूरोप में लागू है, लेकिन दुनिया की कई बड़ी कंपनियां एक ही डिजाइन के प्रोडक्ट अलग-अलग देशों में बेचती हैं. यही वजह है कि भारत समेत कई देशों में बिकने वाले स्मार्टफोन, लैपटॉप और दूसरे गैजेट्स पर भी यह निशान देखने को मिलता है.

क्या अमेरिका में भी है ऐसा नियम?

क्या अमेरिका में भी है ऐसा नियम?4 / 7

अमेरिका में पूरे देश के लिए ऐसा कोई एक केंद्रीय कानून नहीं है, जो इस निशान को अनिवार्य बनाता हो इसके बावजूद कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अपने सभी प्रोडक्ट्स पर यही सिंबल प्रिंट करती है. वहीं अमेरिका के कई राज्यों में ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग को लेकर अलग-अलग नियम लागू है.

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किन-किन प्रोडक्ट्स पर मिलता है यह निशान?

किन-किन प्रोडक्ट्स पर मिलता है यह निशान?5 / 7

यह सिंबल केवल स्मार्टफोन तक सीमित नहीं है. आपको ये फ्रिज, वॉशिंग मशीन, लैपटॉप, टैबलेट स्मार्टवॉच, टीवी मॉनिटर, हेयर ड्रायर, टोस्टर और कई दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर भी देखने को मिल जाएगा.

इलेक्ट्रॉनिक कचरे की रीसाइक्लिंग क्यों जरूरी है?

इलेक्ट्रॉनिक कचरे की रीसाइक्लिंग क्यों जरूरी है?6 / 7

इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में कई तरह के कैमिकल और मेटल्स होती हैं. अगर इन्हें सामान्य कूड़े में फेंक दिया जाए, तो ये मिट्टी और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसलिए जिन प्रोडक्ट्स पर ये निशान बना हो, उन्हें कभी भी सामान्य डस्टबिन में नहीं डालना चाहिए.

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खराब डिवाइस का क्या करें?

खराब डिवाइस का क्या करें?7 / 7

विशेषज्ञों का कहना है कि खराब हो चुके इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स को अधिकृत रीसाइक्लिंग सेंटर या ई-वेस्ट कलेक्शन पॉइंट पर जमा करना चाहिए. अब कई स्मार्टफोन कंपनियां भी अपने रीसाइक्लिंग प्रोग्राम चला रही हैं, जहा पुराने डिवाइस सुरक्षित तरीके से जमा किए जा सकते हैं.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

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मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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