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STOP! अगर आप करते हैं ये 5 काम, तो आपका बच्चा हो सकता है डिप्रेशन का शिकार, Mental Health Specialist प्रितिका सिंह ने बताया

Children's Mental Health: मेंटल हेल्थ स्पेशलिस्ट और प्रयाग हॉस्पिटल ग्रुप्स की CEO प्रितिका सिंह ने बताया कि माता-पिता के कौन से 5 ऐसे व्यवहार हैं या व्यवहार की गलतियां हैं जो बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं.

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Parenting: बच्चे की परवरिश बच्चे के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को निर्धारित करती है. खासतौर से अगर बच्चे की परवरिश सही नहीं होगी या माता-पिता का व्यवहार (Parents’ Behavior) गलत होगा तो बच्चा हर समय मानसिक रूप से परेशान महसूस करेगा. माता-पिता की प्रतिक्रिया भी बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है. इसी बारे में बता रही हैं प्रितिका सिंह. मेंटल हेल्थ स्पेशलिस्ट और प्रयाग हॉस्पिटल ग्रुप्स की CEO प्रितिका सिंह ने बताया कि माता-पिता के वो कौन से 5 व्यवहार हैं जो बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य (Child’s Mental Health) पर नकारात्मक असर डालते हैं. कहीं आप भी तो नहीं करते यही गलतियां?

बच्चे की मेंटल हेल्थ खराब करता है पैरेंट्स का यह व्यवहार

बच्चे की फीलिंग्स को नजरअंदाज करना

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बच्चे भावुक पलों में सुकून और सुरक्षा के लिए अपने माता-पिता की ओर देखते हैं. लेकिन अक्सर ऐसे मौकों पर माता-पिता बच्चों पर चिल्लाते हैं, उन्हें डांटते हैं या फिर उनकी भावनाओं को नजरअंदाज करते हैं. इससे बच्चों में भावनात्मक असुरक्षा पैदा होती है. बच्चों के उनके माता-पिता से परस्पर संबंध के एक अध्ययन में देखा गया कि अमूमन 13 साल के आसपास के जिन बच्चों पर उनके माता-पिता अक्सर चिल्लाते थे कुछ वर्षों बाद उनके व्यवहार में अधिक समस्याएं पैदा हुईं. बच्चों की दिन-रात बुराई करने या भावनात्मक लगाव नहीं दिखाने से उनके अंदर एक डर समा जाएगा. वे सबसे अलग-थलग रहने लगेंगे या मन ही मन खुद को कोसते रहेंगे. इससे उनका आत्मविश्वास (Self Confidence) कम होगा और आत्मसम्मान की भावना हीनता में बदल जाएगी.

खुद माता-पिता का डिप्रेशन में और एक दूसरे से अलग रहना

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खुद माता-पिता, खासकर मां के डिप्रेशन का उनका बच्चों के भावनात्मक विकास पर बहुत असर पड़ सकता है. डिप्रेशन में माता-पिता अपने बच्चों की जरूरतों पर ध्यान नहीं दे पाते या उनके बीच दूरी आ सकती है. यह एक तरह से बच्चों की भावनात्मक उपेक्षा है जिसका लंबे समय तक असर रह सकता है. स्टीन एवं अन्य (2008) और मेनसाह और कीरन (2010) ने यह दर्शाया कि मां के मानसिक स्वास्थ्य का उसके बच्चों के भावनात्मक और सामाजिक विकास पर सीधा असर पड़ता है. यदि बच्चों को समय पर माता-पिता का भावनात्मक सपोर्ट नहीं मिलता है तो उनमें डिप्रेशन, एंग्जायटी और हीन भावना जैसी समस्याओं का अधिक खतरा है.

बचपन का बुरा अनुभव

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बच्चे कभी-कभी घर पर एडवर्स चाइल्डहुड एक्सपीरियंस (ACE) करते हैं. यह उनके लिए कोई भी बुरा अनुभव हो सकता है, जैसे लड़ाई-झगड़ा, दुर्व्यवहार या फिर उपेक्षा. दरअसल यह शारीरिक या मानसिक पीड़ा, माता-पिता का अलग होना या घर में ड्रग्स लेना कुछ भी हो सकता है. यदि किसी बच्चे को एक से अधिक एसीई हैं तो आगे चलकर उसके डिप्रेशन, ड्रग एडिक्शन और बिहेवियरल प्रॉब्लम होने का अधिक खतरा है. इस तरह के कठिन परिवेश में हर समय रहने से बच्चों को क्रॉनिक स्ट्रेस हो सकता है जिससे ब्रेन डेवलपमेंट और इमोशनल कंट्रोल खोने का खतरा है.

पैरेंटिंग में बहुत ढिलाई या अनियमितता बरतना

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कुछ माता-पिता घर के नियम-कायदे बनाने में बहुत अधिक अनियमित होते हैं, वे अनजाने में ही अपने बच्चों की इमोशनल ग्रोथ को नुकसान पहुंचा सकते हैं. माता-पिता के बहुत ढीले होने से बच्चे भी अपनी भावनाओं पर कंट्रोल करना या अनुशासन नहीं सीख पाते हैं. इसके विपरीत जब माता-पिता बहुत अधिक सख्त होते हैं तो उनके बच्चे चीजें समझने के बजाय डर जाते हैं. बच्चों को प्यार और नियम-कायदे दोनों की जरूरत है. इन दोनों के अभाव में वे किसी की अथॉरिटी, अपनी जवाबदेही नहीं समझेंगे या फिर अपने वाजिब अधिकारों को भी नहीं जान पाएंगे.

बुरे रोल मॉडल और सही से बात नहीं करना

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माता-पिता बच्चों के पहले रोल मॉडल होते हैं. वे बहुत कुछ उनका व्यवहार देखकर ही सीखते हैं. ऐसे में यदि बड़े-बुजुर्ग आक्रामक व्यवहार करते हैं, कठिनाइयों से मुंह चुराते हैं या नशा जैसी बुरी आदत रखते हैं तो बच्चे जो भी देखेंगे कॉपी कर सकते हैं. बच्चों की भावनाओं को नजरअंदाज किए जाने या गंभीरता से नहीं लिए जाने पर बच्चा अकेलापन (Loneliness) और यह महसूस कर सकता है कि सभी उसे गलत समझते हैं. इसके विपरीत जो माता-पिता अपनी भावनाएं शांति से व्यक्त करते और खुलकर बात करते हैं, उनके बच्चे भावनाओं को सही से संभालना सीख जाते हैं. लेकिन जो बच्चे बड़े होते हुए सही भावनात्मक व्यवहार नहीं देखते हैं, अक्सर जीवन में तनाव या चुनौतियों से निपटने में खुद को असहाय पाते हैं.

एक्सपर्ट्स कहते हैं कि माता-पिता के मेंटल हेल्थ का सीधा असर पूरे परिवार के हेल्थ पर पड़ता है. इसलिए यदि माता-पिता दिन-रात तनाव, चिंता या डिप्रेशन (Depression) से जूझ रहे हैं तो उन्हें प्रोफेशनल की मदद लेनी चाहिए. यह न सिर्फ उनकी भलाई में है बल्कि उनके बच्चों की मेंटल हेल्थ के लिए भी जरूरी है.

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First published on: Nov 16, 2025 03:47 PM

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About the Author

Seema Thakur

सीमा ठाकुर ने दिल्ली विद्यालय से ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है. प्रिंट और मेनस्ट्रीम मीडिया के लिए डिजिटल में काम करने के बाद न्यूज 24 में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. सेहत और लाइफस्टाइल बीट पर लिखने के साथ ही सीमा बॉलीवुड वीडियो प्रोड्यूस करती रही हैं.

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Seema Thakur

सीमा ठाकुर ने दिल्ली विद्यालय से ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है. प्रिंट और मेनस्ट्रीम मीडिया के लिए डिजिटल में काम करने के बाद न्यूज 24 में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. सेहत और लाइफस्टाइल बीट पर लिखने के साथ ही सीमा बॉलीवुड वीडियो प्रोड्यूस करती रही हैं.

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