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लाइफस्टाइल

150 सालों से बंद है इस गांव में होली का जश्न, आखिर क्या है इसके पीछे की कहानी?

Where Holi Is Not Celebrated: क्या आपको पता है कि भारत में एक ऐसा गांव भी है यहां पर पिछले 150 सालों से न तो होली खेली जाती है और न ही होलिका दहन होता है. लोग ना कहीं रंग उड़ाते हैं और ना ही ढोल की आवाज सुनाई देती है, लेकिन ऐसा क्यों है?

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Edited By : Shadma Muskan Updated: Mar 1, 2026 11:22
Bharat Mein Holi Kaha Nahi Manate
क्या है 150 साल पुरानी कहानी? Image Credit- Shutterstock

Bharat Mein Holi Kaha Nahi Manate: भारत में होली का नाम सुनते ही चेहरे पर अलग ही मुस्कान आ जाती है. रंग, गुलाल, ढोल-नगाड़े और मस्ती की तस्वीर जैसी चीजें भी सामने आती रहती हैं. वैसे फाल्गुन का पूरा महीना ही रंगों में डूबा हुआ गुजरता है, लेकिन क्या आपको पता है कि भारत में एक ऐसा गांव भी है जहां पर होली नहीं मनाई जाती है? इसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं कि उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के खरहरी गांव में पिछले करीब 150 सालों से न तो होली खेली जाती है और न ही होलिका दहन होता है. लोग ना कहीं रंग उड़ाते हैं और ना ही ढोल की आवाज सुनाई देती है, लेकिन ऐसा क्यों है? आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं. 

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क्या है 150 साल पुरानी कहानी?

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग डेढ़ सौ साल पहले होली के दिन गांव में एक बड़ी अनहोनी हुई थी. कहा जाता है कि होलिका दहन के दौरान आग बेकाबू हो गई थी और कई घर इसकी चपेट में आ गए थे. गांव को भारी नुकसान उठाना पड़ा. 

गांव की पंचायत का फैसला 

इस हादसे के बाद गांव के एक प्रतिष्ठित परिवार में अचानक मृत्यु हो गई थी. इन घटनाओं को गांव वालों ने अपशकुन माना था. इसके बाद गांव की पंचायत ने सामूहिक निर्णय लिया कि भविष्य में गांव की सीमा के अंदर कभी भी होली नहीं मनाई जाएगी. 

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नहीं किया जाता होलिका दहन

पूरे देश में होलिका दहन बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. होली से एक दिन पहले होलिका दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है, लेकिन खरहरी गांव में यह परंपरा पूरी तरह बंद है. गांव के लोग उस दिन ना तो लकड़ियां इकट्ठा करते हैं और ना ही किसी तरह का आयोजन करते हैं. 

फिर कैसे मनाते हैं त्योहार? 

गांव के लोग होली ना मनाने को लेकर विरोध नहीं करते हैं. अगर कोई रंग खेलना चाहता है तो वह गांव की सीमा से बाहर जाकर होली मना सकता है. हालांकि, लोगों को गांव की चौहद्दी के भीतर रंग, गुलाल या जश्न की इजाजत नहीं है. इस नियम का पालन सभी लोग बिना किसी विवाद के करते हैं. 

परंपरा तोड़ने पर क्या हुआ था? 

एक रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ साल पहले गांव की इस परंपरा को तोड़ने की कोशिश की थी, लेकिन उसी समय गांव में बीमारी फैलने की चर्चा हुई. इसके बाद, लोगों का विश्वास और गहरा हो गया कि यह परंपरा गांव की भलाई से जुड़ी है. 

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First published on: Mar 01, 2026 11:21 AM

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