Benefits Of Community Living: हर माता-पिता की इच्छा होती है कि उनका बच्चा बाकी बच्चों से बेहतर और अलग दिखे, लेकिन आज कि मॉडर्न दुनिया में कहीं न कहीं माता-पिता ने बच्चों को सामुदायिक जीवन से दूर कर दिया है, जिसका असर उन पर बुरी तरह पड़ रहा है. सामुदायिक जीवन से बच्चों की ग्रोथ में बहुत मदद मिलती है, लेकिन इसकी कमी न सिर्फ उनका शारीरिक रूप से प्रभावित करती है, बल्कि उनके मानसिक विकास पर भी बुरा असर डालती है. ऐसे में बच्चों का जीवन बेहतर रहे और वह इस तेज रफ्तार दुनिया में अपना बड़ा योगदान दे, माता-पिता के इस सपने को पूरा करने के लिए पतंजलि गुरुकुल कई सालों से काम कर रहा है. योग गुरु बाबा रामदेव के पतंजलि गुरुकुलम को शुरू करने का मुख्य लक्ष्य प्राचीन वैदिक शिक्षा और आधुनिक विज्ञान का समन्वय करना है. इसका उद्देश्य शिक्षा को ‘गुलामी’ से मुक्त कर, भारतीय संस्कृति, योग, सामुदायिक जीवन और संस्कारों के साथ-साथ ज्ञान-विज्ञान में कुशल ऐसी युवा पीढ़ी तैयार करना है जो आत्मनिर्भर हो और देश के लिए नैतिक रूप से मजबूत लीडर बन सके.
यह भी पढ़ें:मिनट में बनाएं टेस्टी चीज सैंडविच, स्वाद और सेहत दोनों के लिए बेस्ट
सामुदायिक जीवन की कमी कैसे प्रभावित कर रही है बच्चे का जीवन?
सामुदायिक जीवन हर किसी के लिए जरूरी है, लेकिन आज के लोगों के विचार और उनकी मॉडर्न सोच ने कहीं ने कहीं इसपर असर डाला है, जिसका असर बच्चों के बीच साफ देखने को मिलता है. जब माता-पिता बच्चे को घर की चार दीवारों में रखते हैं और अपने उम्र के बच्चों के साथ बाहर खेलने से रोकते हैं, तो यह उनके लिए बुरा साबित हो सकता है. भले ही आपका उद्देश्य उनकी बीमारियों और बुरी आदतों से दूर रखना हो, लेकिन इस तरह सामुदायिक जीवन से दूर करना उनके शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित करता है. इतना ही नहीं, न सिर्फ बाहर खेलने भेजना बल्कि छोटा परिवार जिसमें सिर्फ माता-पिता और बच्चा हो और दादा-दादी, चाचा-चाची आदि परिवार अलग रहे हैं हो वह भी उनके लिए सही नहीं है. जब बच्चा सभी के बीच रहता है, तो संस्कार, बात करना, दिमाग का इस्तेमाल, बोलना आदि कई तरह के विकास ठीक तरीके से हो पाते हैं. लेकिन इन तमाम चीजों की कमी से उनके अंदर डर की भावना, कम उम्र में स्ट्रेस यानी तनाव, कम फिजिकल एक्टिविटी के कारण बीमारियों का खतरा, कमजोर शरीर, लोगों से बात करने में मुश्किल, तेज दुनिया में अपनी जगह बनाने में परेशानी, जिम्मेदारी की भावना कम होना, अकेलापन आदि कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है.
पतंजलि गुरुकुलम कैसे बच्चों की करता है सही तरीके से ग्रोथ
पतंजलि गुरुकुलम की गुरुकुल शिक्षा प्रणाली को पुनर्जीवित कर रहा है, क्योंकि यहां सामुदायिक जीवन (Community Living) के माध्यम से छात्रों में अनुशासन, सेवा भाव, चरित्र निर्माण और नेतृत्व के गुणों को विकसित कैसा होता है इसके बारे में सभी कुछ सिखाया जाता है. यहां वेदों, संस्कृत और आधुनिक विषयों का अध्ययन कराए जाते हैं, जिससे बच्चा धर्म और दुनिया दोनों में आगे बढ़ सके.
- यहां का वातावरण बच्चों को सामुदायिक जीवन देता है और उनके सही विकास में मदद करता है, जैसे कि
अनुशासित डेली-रूटीन: छात्र सुबह 4 बजे उठते हैं, योग और ध्यान के साथ दिन की शुरुआत करते हैं.
शिक्षा का संतुलन: पारंपरिक वैदिक शिक्षा, संस्कृत, वेदों और आयुर्वेद के साथ-साथ आधुनिक विषयों की शिक्षा देना, ताकि उनकी शिक्षा में किसी तरह की कमी न आए.
गुरु-शिष्य परंपरा: गुरु सिर्फ एक शिक्षक नहीं, बल्कि मार्गदर्शक (Mentor) होते हैं, जिनके आचरण से छात्र मूल्य (Values) सीखते हैं.
सादा जीवन, उच्च विचार: यहां छात्रों को न्यूनतम साधनों में जीना सिखाया जाता है, जिससे उनमें भौतिकवादी मोह कम होता है और वे चरित्र निर्माण पर ध्यान केंद्रित करते हैं.