मारने से बच्चे पर क्या असर पड़ता है? डॉक्टर ने बताया बच्चों की पिटाई से बेहतर है यह एक सजा

Parenting: माता-पिता अक्सर ही बच्चे पर हाथ उठा देते हैं. लेकिन, बच्चे की पिटाई करने के बजाय कम हार्मफुल तरीका अपनाया जा सकता है. जानिए पीडियाट्रिशियन डॉ. रवि मलिक की इस बारे में क्या सलाह है.

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बच्चों पर गुस्सा आए तो क्या करें? Image Credit - Freepik

Parenting Tips: बच्चे कोई गलती करते हैं तो माता-पिता को जायजतौर पर उनपर गुस्सा आता है. ऐसे में पैरेंट्स बच्चे को डांट देते हैं या डांटने से बात नहीं बनती तो उसकी पिटाई कर देते हैं. लेकिन, एक्सपर्ट्स का कहना है कि बच्चे पर हाथ उठाना पैरैंट्स की सबसे बड़ी गलती (Parenting Mistakes) साबित होती है. पैरेंट्स को बच्चे पर हाथ नहीं उठाना चाहिए क्योंकि इससे बच्चे पर शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक तौर पर भी प्रभाव पड़ता है. पीडियाट्रिशियन डॉ. रवि मलिक ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से वीडियो शेयर करके बताया है कि माता-पिता के बच्चों को मारने (Beating Children) पर उनपर क्या असर पड़ता है.

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बच्चों को मारने पर क्या होता है

डॉ. रवि मलिक का कहना है कि बच्चे को कभी नहीं मारना चाहिए. यह अपराध है. बच्चे की पिटाई करने पर उसपर कई तरह के प्रभाव पड़ सकते हैं. बच्चे को मारने पर उसकी सेल्फ एस्टीम कम होने लगती है. बच्चा घबरा जाता है. जब बच्चा बड़ा होता है तो उसके अंदर बोल्डनेस नहीं रहती है. डॉक्टर बताते हैं कि बच्चे के अंदर रिजिलियंस कम होने लगती है यानी वह अपना स्टैंड लेना कम कर देता है और कोई कुछ कहता है तो आवाज नहीं उठाता.

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बच्चे को इसीलिए भी नहीं मारना चाहिए क्योंकि इससे होता यह है कि आप बच्चे को एक थप्पड़ मारेंगे तो उसे एक थप्पड़ खाने की आदत हो जाएगी, 2 थप्पड़ मारेंगे तो उसे 2 थप्पड़ खाने की आदत हो जाएगी और इस तरह आप मार बढ़ाते जाएंगे और वह मार खाता रहेगा. इसीलिए बच्चे को मारने की आदत सही नहीं है.

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बच्चे को क्या सजा दें

बच्चे की पिटाई ना करके उसे क्या सजा देनी चाहिए इसपर डॉ. रवि मलिक का कहना है कि बच्चा जो चीज बहुत पसंद करता है उसे वो चीज ना दें. मान लीजिए अगर बच्चा शाम के समय कोई शो देखना पसंद करता है तो आप उसे वो शो मत देखने दीजिए, यह छोटे बच्चे के लिए ज्यादा बड़ी सजा होगी.

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डॉक्टर बताते हैं कि स्टडीज भी इस बात का दावा करती हैं कि मारना-पीटना किसी तरह से प्रोडक्टिव नहीं होता है. यह काउंटरप्रोडक्टिव है बच्चे की इमोशनल और इंटलेक्चुअल डेवलपमेंट में. डॉक्टर का कहना है कि बच्चे को मारने की आदत सबसे गलत है. इसके बजाय उनकी फेवरेट चीजें उन्हें ना देना, बाहर खेलने से रोकना, शो ना देखने देना या बाहर लेकर जाने से मना करना ज्यादा बेहतर सजा है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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