ड्यूटी के वक्त पायलट ने नशा किया है या नहीं? जानिए भारत में हर फ्लाइट से पहले कैसे करते हैं चेक

फुकेट-दिल्ली फ्लाइट की घटना दिल दहला देने वाली है, इससे फ्लाइट से ट्रैवल करने वाले पैसेंजर्स के मन में एक अजीब सा डर पैदा हो गया है, हालांकि आपको ये जानना चाहिए कि किसी भी उड़ान से पहले पायलट नशे में है या नहीं इसे चेक करने का रूल क्या है.

Pilot Drugs Testing

Pilot Drugs Testing (AI Image)

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How India Tests Pilots for Drugs Or Alcohol: हाल ही में एयर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट की घटना ने एविएशन सेफ्टी के एक जरूरी उपाय पायलटों के ड्रग और अल्कोहल टेस्ट पर फिर से ध्यान खींचा है. ये मुद्दा तब चर्चा में आया जब फ्लाइट के दौरान ऊंचाई में तरीबन 300 फीट का बदलाव होने के बाद, पायलट-इन-कमांड का ड्रग टेस्ट पॉजिटिव (मारिजुआना के लिए) पाया गया.

शुरुआती जांच से पता चला कि 137 पैसेंजर्स को ले जा रही फ्लाइट पर कुछ वक्त के लिए कंट्रोल खो गया था. हालांकि, जांचकर्ताओं ने पायलट के टेस्ट रिजल्ट और विमान की तकनीकी समस्याओं के बीच कोई संबंध नहीं पाया है. इसके बाद एयर इंडिया ने अपने पायलटों के लिए ड्रग स्क्रीनिंग शुरू कर दी है.

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पायलटों का टेस्ट क्यों किया जाता है?

भारत का डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) एयरलाइंस के लिए फ्लाइट क्रू के बीच साइकोएक्टिव सबस्टांस (नशीले पदार्थों) की जांच करना जरूरी बनाता है. एयरलाइंस को हर साल पायलटों के एक तय हिस्से पर रैंडम टेस्ट करने होते हैं. किसी घटना, हादसे या नशीले पदार्थों के इस्तेमाल का शक होने पर एडिशनल टेस्टिंग का आदेश दिया जा सकता है. पायलटों को हर फ्लाइट से पहले अल्कोहल टेस्ट से भी गुजरना पड़ता है. इन उपायों का मकसद ये एनश्योर करना है कि क्रू मेंबर ऐसे पदार्थों के असर में न हों जो कंसंट्रेशन, कोऑर्डिनेशन, रिएक्शन टाइम या फैसला लेने की क्षमता पर असर डाल सकें.

ड्रग टेस्टिंग कैसे होती है?

ड्रग स्क्रीनिंग आम तौर पर कंट्रोल कंडीशंस और सख्त ‘चेन-ऑफ-कस्टडी’ प्रोसीजर के तहत लिए गए यूरिन सैंपल से शुरू होती है. पायलटों को फ्लाइट पूरी करने के बाद टेस्टिंग के लिए बुलाया जा सकता है और उन्हें सैंपल देना होता है. एक शुरुआती स्क्रीनिंग किट प्रतिबंधित पदार्थों के संभावित अंशों की पहचान कर सकती है. ये प्रॉसेसे आम तौर पर पायलट की मौजूदगी में की जाती है और इसे एक इंडिपेंडेंट टेस्टिंग एजेंसी की तरफ से किया जा सकता है.

अगर शुरुआती स्क्रीनिंग का रिजल्ट पॉजिटिव आता है, तो सैंपल को कंफर्म करने के लिए एक मान्यता प्राप्त लैब में भेजा जाता है. गैस क्रोमैटोग्राफी-मास स्पेक्ट्रोमेट्री (GC-MS) और लिक्विड क्रोमैटोग्राफी-मास स्पेक्ट्रोमेट्री (LC-MS) जैसी एडवांस्ड तकनीकें ज्यादा सटीकता के साथ स्पेसिफिक सब्सटांस की पहचान कर सकती हैं.

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किन पदार्थों का पता लगाया जाता है?

टेस्टिंग से कैनबिस (गांजा), कोकीन, एम्फेटामाइन, ओपिओइड और कुछ सिडेटिव जैसे सब्सटांस की पहचान की जा सकती है. कुछ प्रिस्क्रिप्शन वाली दवाएं भी बैन हो सकती हैं अगर वो सतर्कता या सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं. अहम बात ये है कि पॉजिटिव टेस्ट का मतलब ये नहीं है कि पायलट फ्लाइट के दौरान नशे में था. ये किसी पदार्थ या उसके मेटाबोलाइट्स की मौजूदगी का संकेत देता है, जो कभी-कभी असर खत्म होने के काफी समय बाद भी पता चल सकते हैं.

ये टेस्ट क्यों जरूरी हैं?

फुकेट-दिल्ली घटना की जांच अभी चल रही है. शुरुआती इंवेस्टिगेशन से पता चलता है कि विमान के हाइड्रोलिक सिस्टम में कोई तकनीकी खराबी हो सकती है. फिर भी प्रतिबंधित पदार्थों (जैसे नशीली दवाओं या शराब) की सख्त जांच एविएशन सुरक्षा का एक अहम हिस्सा है. ऐसे क्षेत्र में जहां अक्सर कुछ ही सेकंड में फैसले लेने पड़ते हैं, पैसेंजर्स और फ्लाइट की सेफ्टी मेंटेन रखने के लिए ये एनश्योर करना जरूरी है कि पायलट फिजिकली और मेंटली फिट हों.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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