NEET-UG पेपर लीक मामला हो या झारखंड में सरकारी नियुक्तियों में धांधली का आरोप, देशभर में इन दिनों युवाओं के प्रदर्शन की खबरें सामने आ रही है. शिक्षा और नौकरी व्यवस्था को लेकर खड़े हो रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. शिक्षा मंत्रालय ने मध्य प्रदेश कैडर की सीनियर आईएएस अधिकारी दीप्ति गौर मुखर्जी को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव नियुक्त किया है. दीप्ति मुखर्जी की ये नियुक्ति इस लिए भी खास मानी जा रही है, क्योंकि उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के कई महत्वपूर्ण विभागों में काम किया है और 30 साल से अधिक का अनुभव है.

दीप्ति मुखर्जी के कंधों पर काफी बड़ी जिम्मेदारी होगी क्योंकि उनकी नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है जब देश की परीक्षा व्यवस्था और खासतौर पर मेडिकल इंट्रेंस एग्जाम NEET को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं. दीप्ति की नियुक्ति संबंधी आदेश कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) की मंजूरी के बाद जारी किया गया है.

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कौन हैं दीप्ति गौर मुखर्जी?


आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दीप्ति गौर मुखर्जी 1993 बैच की मध्य प्रदेश कैडर की आईएएस अधिकारी हैं. सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, उनका जन्म 3 फरवरी 1969 को उत्तर प्रदेश में हुआ था. दीप्ति मुखर्जी ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री हासिल की है. इसके अलावा उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) से पब्लिक मैनेजमेंट एंड गवर्नेंस में MSc की पढ़ाई की है.

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कई महकमों में निभा चुकी है बड़ी जिम्मेदारी


UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बाद दीप्ति ने भारतीय प्रशासनिक सेवा में कदम रखा और करीब तीन दशक लंबे अनुभव के दौरान कई महकमों में अहम पदों पर जिम्मेदारी निभाई. उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी मिलने से पहले दीप्ति गौर मुखर्जी कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) में सचिव के पद पर कार्यरत थीं. उन्होंने अगस्त 2024 में इस पद की जिम्मेदारी संभाली थी. इससे पहले वह नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) की CEO के रूप में भी काम कर चुकी हैं.

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