गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) एक्ट 2017 के नियमों में फिर सुधार करने की तैयारी है, जिसके लिए 7 अक्टूबर 2026 को GST काउंसिल की मीटिंग बुलाई गई है. इस मीटिंग में GST कानून की धारा 69 में बदलाव करने का प्रस्ताव पेश किया जाएगा, जिसके तहत टैक्स अधिकारियों के सीधे गिरफ्तार करने के अधिकार को खत्म करने की सिफारिश है. अगर प्रस्ताव पारित हुआ तो टैक्स अधिकारी कर चोरी करने वालों को कोर्ट के ऑर्डर के बिना गिरफ्तार नहीं कर पाएंगे. धारा 69 के तहत ही टैक्स अधिकारियों को गिरफ्तार करने का अधिकार मिला हुआ है, लेकिन सरकार धारा 69 में बदलाव करके नेक्सट जनरेशन GST रिफॉर्म्स करना चाहती है, ताकि GST भरने वाले कारोबारियों और व्यापारियों को राहत मिले.
कानून के तहत टैक्स अफसरों को क्या अधिकार मिले हैं?
GST की धारा 69 के तहत टैक्स कमिश्नर के आदेश पर टैक्स अधिकारी टैक्स चोरी या फक इनवॉइस के मामलों में सीधे गिरफ्तारी कर सकते हैं. सेक्शन 70 के तहत टैक्स अधिकारी किसी भी शख्स को कर चोरी की जांच के लिए बुला सकते हैं. कर चोरी से जुड़े दस्तावेज पेश करने या बयान दर्ज कराने के लिए भी बुला सकते हैं. कर चोरी का शक होने पर तलाश ले सकते हैं या किसी डॉक्यूमेंट को जब्त कर सकते हैं. धारा 83 के तहत कर चोरी का शक होने पर किसी के बैंक खातों के सीज कर सकते हैं या प्रॉपर्टी को अटैच कर सकते हैं या अस्थायी रूप से कुर्क कर सकते हैं. लेकिन अब एक नया प्रस्ताव पास कराकर धारा 69 के तहत मिले गिरफ्तारी के अधिकार को खत्म करके GST में बड़ा सुधार करने की कोशिश है.
GST काउंसिल मीटिंग में किन-किन मुद्दों पर चर्चा होगी?
7 अक्टूबर को होने वाली GST काउंसिल मीटिंग में प्रस्ताव पेश किया जाएगा कि अधिकारियों की सीधे गिरफ्तार करने की पावर को वापस लिया जाए और टैक्स के मामले में किसी भी गिरफ्तारी के लिए कोर्ट का आदेश अनिवार्य किया जाए. कर चोरी के मामलों में कानूनी कार्रवाई की सीमा में बदलाव करने की तैयारी है, जिसके तहत 1 करोड़ की लिमिट को 5 करोड़ करने की सिफारिश है. अगर प्रस्ताव मंजूर हुआ तो 5 करोड़ से कम की टैक्स चोरी के मामलों में आपराधिक केस दर्ज नहीं किया जाएगा. क्लासिफिकेशन, वैल्यूएशन या इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के विवादों को कानूनी कार्रवाई के दायरे से बाहर रखने की भी सिफारिश की जाएगी. मीटिंग में उपरोक्त प्रस्ताव मंजूर होते ही इन्हें लागू कर दिया जाएगा.
अरेस्ट पावर वापस क्यों लेना चाहती है केंद्र सरकार?
जुलाई 2017 से लागू GST कानून लागू हुआ था, लेकिन तब फेक इनवॉइस और टैक्स की चोरी पकड़ने वाला सिस्टम मजबूत नहीं था, लेकिन अब सिस्टम बहुत ज्यादा मजबूत हो चुका है. पहले सिस्टम फर्जी चोरी को भी पकड़ लेता था, जिसके बाद जब टैक्स अधिकारी चोरी करने वालों को गिरफ्तार करते थे तो ज्यादातर मामलों में लोगों को जमानत आसानी से मिल जाती थी. इसलिए कारोबारी और व्यापारी टैक्स अधिकारियों पर परेशान करने के आरोप लगाते थे. वहीं अगर टैक्स अधिकारियों का गिरफ्तारी वाला अधिकार खत्म हो जाए तो भी केंद्र सरकार के टैक्स वसूलने, ब्याज और पेनल्टी लगाने के अधिकार बरकरार रहेंगे. लेकिन टैक्सपेयर्स बकाया टैक्स भरकर, ब्याज और पेनल्टी चुकाकर मामले खुद निपटा सकेंगे.
कारोबारियों व्यापारियों को क्या-कैसे फायदा होगा?
बता दें कि टैक्स अधिकारियों का गिरफ्तार करने का अधिकार खत्म होने से उनकी मनमानी पर रोक लग जाएगी और टैक्स चोरी के मामलों में फैसला आने से पहले गिरफ्तारी का डर कारोबारियों और व्यापारियों में खत्म हो जाएगा. छोटे कारोबारियों को राहत मिलेगी और कानूनी केस लड़ने का बोझ भी कम हो जाएगा. केंद्र सरकार और कर विभाग के काम करने के तरीके में कारोबारियों-व्यापारियों के बीच भरोसा कायम होगा, जिस वजह से उनके लिए व्यापार करना आसान हो जाएगा. इसके अलावा छोटे करदाताओं को भी कई अहम फायदे हो सकते हैं.