'होममेकर नहीं नेशन बिल्डर कहें क्योंकि...', देशभर की गृहणियों पर SC की बड़ी टिप्पणी, जानें बेंच ने क्यों कहा ऐसा?

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने एक केस में फैसला सुनाते हुए देशभर की गृहणियों और पत्नियों पर ऐतिहासिक टिप्पणी की है। वहीं कुछ निर्देश भी दिए हैं, जिनका सख्ती से पालन करने को कहा गया है।

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एक केस में फैसला सुनाते हुए बेंच ने ऐतिहासिक टिप्पणी की है।

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की पत्नियों और गृहणियों पर बड़ी टिप्पणी की है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा है कि महिलाओं को होममेकर नहीं, बल्कि नेशनल बिल्डर कहा जाना चाहिए। बेंच ने पत्नी की मौत के बाद पति को अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश देते हुए यह टिप्पणी की। वहीं बेंच ने मुआवजा तय करने के लिए कुछ दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं, जिनका सख्ती से पालन करने को कहा गया है और पालन नहीं होने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के साल 2024 में दिए गए एक फैसले को चुनौती दी गई थी। साल 2001 में 2 जीप की टक्कर में एक महिला की मौत हुई थी। हाई कोर्ट ने पीड़िता के पति और 3 बच्चों को 8 लाख रुपये से ज्यादा का मुआवजा देने का आदेश दिया था। इस फैसले को चुनौती दी गई थी। जिस पर 2 साल चली सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पति के पक्ष के में फैसला सुनाया और देशभर की गृहणियों के समाज एवं देश निर्माण में योगदान पर प्रकाश डाला।

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गृहणियों को देश-समाज के विकास का आधार बताया

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि गृहिणी के लिए होममेकर नहीं नेशन बिल्डर शब्द इस्तेमाल होना चाहिए। क्योंकि केवल खाना बनाना, कपड़े धोना, साफ-सफाई करना, पति-बच्चों को संभालना ही उसका काम नहीं। बल्कि वह एक परिवार की नींव को मजबूत करती है। उस परिवार की अगली पीढ़ी को तैयार करती है। समाज और देश के विकास में उसका योगदान अहम होता है, लेकिन दुर्भाग्य से उसके योगदान को गिना नहीं जाता। अगर एक गृहिणी के घर के काम की वैल्यू निकाली जाए तो उसकी अनुमानित आय 30 हजार रुपये प्रतिमाह बनती है, इसलिए उसके योगदान को सांकेतिक या कम नहीं आंक सकते।

बेंच ने गृहिणी की आय तय करने के मानक भी बताए

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर सड़क हादसे में महिला की मौत हो जाती है तो परिवार को सिर्फ इस आधार पर मुआवजा देने से इनकार किया जा सकता कि मृतका कमाती नहीं थी या उसकी आय नहीं थी। बल्कि महिला की मौत होने से उसके पति-बच्चों की देखभाल का नुकसान हुआ है। समाज, परिवार, देश की नींव हल्की पड़ी है, इसलिए मुआवजा देने से इनकार करना उनके साथ नाइंसाफी होगी। गृहिणियों की आय का अनुमान उनकी उम्र, एजुकेशन, स्किल, पारवारिक जिम्मेदारियां, आर्थिक हालातों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। इसलिए पीड़िता परिवार को मिला मुआवजा सही है।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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