देश के कई शहरों में नियमों को ताक पर रखकर किए गए निर्माण और रिहायशी संपत्तियों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. शीर्ष अदालत ने दिल्ली, पटना, लखनऊ समेत अन्य शहरों में ऐसे मामलों की पहचान कर कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं. अदालत के आदेश के बाद अवैध निर्माण को हटाने के साथ-साथ कई संपत्तियों को सील किए जाने की संभावना बढ़ गई है.
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि भवन निर्माण के नियमों की अनदेखी और रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं. अदालत ने दिल्ली के एक होटल और लखनऊ के कोचिंग सेंटर में आग की घटनाओं का भी उल्लेख किया, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी.
दिल्ली में सर्वे में देरी पर नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के लाजपत नगर और सरोजनी नगर जैसे इलाकों में नियमों के उल्लंघन और इमारतों की स्थिति की जांच के लिए सर्वे शुरू नहीं होने पर दिल्ली नगर निगम और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद को फटकार लगाई. अदालत ने नौ जुलाई को आईआईटी दिल्ली के दो प्रोफेसरों समेत विशेषज्ञों की समिति बनाकर ऐसे निर्माणों और उनकी मजबूती की जांच करने का निर्देश दिया था. हालांकि, इसे लेकर अब तक कोई कार्रवाई नहीं होने पर पीठ ने नाराजगी जताई.
पटना में सामने आए 26 हजार से ज्यादा मामले
पटना में स्थिति और भी गंभीर है. नगर निगम के सर्वे में 26,746 ऐसी संपत्तियां चिन्हित की गई हैं, जहां रिहायशी भवनों का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने इस आंकड़े को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. अदालत का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन होने के बावजूद नगर निगम को इसकी जानकारी नहीं होना प्रशासनिक लापरवाही है.
अदालत ने पटना के पूर्व नगर आयुक्त पराशर को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है. उनसे पूछा गया है कि उनके कार्यकाल के दौरान भवन निर्माण नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई.
यह भी पढ़ें- सुप्रिया सुले की बेटी के रिसेप्शन में पीएम मोदी को फोन पर क्या दिखा रहा था यह शख्स? जानें कौन हैं मिथिलेश देसाई
लखनऊ में भी शुरू होगा सर्वे
सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ में भी भवन निर्माण से जुड़े नियमों के उल्लंघन और रिहायशी संपत्तियों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों की जांच के लिए व्यापक सर्वे कराने का निर्देश दिया है. अदालत ने एलडीए को दिल्ली की तर्ज पर अभियान चलाकर ऐसे मामलों की पहचान करने और नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है.
सुनवाई के दौरान लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने पीठ को बताया कि अब तक 51 संपत्तियों की पहचान की जा चुकी है. इन मामलों में कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है. एलडीए ने अदालत को भरोसा दिलाया कि चिन्हित संपत्तियों पर कार्रवाई को किसी भी स्तर पर अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाएगा.
एलडीए की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि प्राधिकरण के पूरे क्षेत्र में नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों की पहचान और उनके फॉलोअप का काम तेजी से जारी रहेगा. इसके लिए संबंधित अधिकारियों को सक्रिय किया गया है और पूरी प्रक्रिया को तीन सप्ताह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.