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गणतंत्र दिवस परेड के लिए झांकियों का कैसे होता है सेलेक्शन? क्या किसी खास थीम पर बनती है झांकी

Republic Day 2026 Parade: गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने वाली झांकियों का चयन अपने आप में एक प्रक्रिया होती है, जो 6 महीने पहले ही शुरू हो जाती है. रक्षा मंत्रालय की इस प्रक्रिया में अहम भूमिका होती है, लेकिन झांकियों को लेकर अंतिम फैसला रक्षा मंत्रालय की ओर से गठित कमेटी का ही माना जाता है, लेकिन सेलेक्शन प्रोसेस की शुरुआत रक्षा मंत्रालय से ही होती है.

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Republic Day ParadeTableaux Selection Process: भारत 26 जनवरी 2026 को 77वां गणतंत्र दिवस मनाएगा. क्योंकि 1950 में इसी तारीख् को भारत देश का संविधान लागू हुआ था और भारत लोकतांत्रिक और गणतांत्रिक देश बना था, इसलिए तब से 26 जनवरी का दिन गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस दिन देश की राजधानी दिल्ली में कर्तव्य पथ पर परेड निकाली जाती है, जिसमें देश के इतिहास, संस्कृति, विरासत और उपलब्धियों का प्रदर्शन किया जाता है.

थीम पर आधारित होती हैं झांकियां

गणतंत्र दिवस पर निकलने वाली परेड में शामिल होने वाली झांकियां भी एक खास थीम पर आधारित होती हैं. इस साल 2026 में झांकियों के लिए थीम स्वावलम्बन का मंत्र- वंदे मातरम्’ और ‘समृद्धि का मंत्र – आत्मनिर्भर भारत’ है. साल 2025 की थीम ‘स्वर्णिम भारत: विरासत और विकास’ थी, वहीं साल 2024 की थीम ‘विकसित भारत’ और ‘भारत – लोकतंत्र की मातृका’ थी. झांकियों की थीम राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर आधारित होती है. राष्ट्रीय उत्सवों या बड़ी घटनाओं से प्रेरित होती है.

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सभी राज्यों की झांकियां नहीं होती

बता दें कि भारत में 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं, लेकिन गणतंत्र दिवस की परेड में सभी राज्यों की झांकियां शामिल नहीं की जाती हैं. हालांकि थीम आधारित झांकियों के प्रस्ताव सभी राज्यों से मंगवाए जाते हैं, लेकिन सबसे अच्छे मॉडल और डिजाइन के आधार पर झांकियों को शॉर्टलिस्ट किया जाता है, क्योंकि समयावधि को देखते हुए सभी राज्यों की झांकियों को परेड में शामिल करना संभव नहीं होता, इसलिए साल 2025 में रोटेशन सिस्टम लागू किया गया, जिसके तहत हर 3 साल में हर राज्य को मौका मिलेगा.

ऐसे होता है झांकियों का सेलेक्शन

गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने वाली झांकियां 6 महीने पहले ही फाइनल हो जाती हैं. थीम फाइनल करने के बाद रक्षा मंत्रालय सभी राज्यों से झांकियों के प्रस्ताव मंगवाता है. इस बीच रक्षा मंत्रालय एक समिति गठित करता है, जिसमें कला, संस्कृति, संगीत, मूर्तिकला, वास्तुकला आदि क्षेत्रों के विशेषज्ञ होते हैं. यह समिति प्रस्तावों को थीम के साथ वापस भेजती है और संबंधित राज्य को थीम आधारित झांकी का स्केच और ब्लूप्रिंट भेजने को कहती है. निर्धारित समय के अंदर राज्यों को स्केच और ब्लूप्रिंट भेजने होते हैं.

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स्केच के बाद 3D मॉडल चेकिंग

झांकियों के स्केच और ब्लूप्रिंट चेक करके समिति उन्हें संशोधन के लिए वापस भेजती है. संशोधन के बाद फाइनल हुए प्रस्तावों के 3D मॉडल मंगवाए जाते हैं. समिति यह देखती है कि मॉडल में जो झांकी दिखाई गई है, वह देखने में कितनी आकर्षक और प्रभावशाली लग रही है? मॉडल थीम पर आधारित बना है या नहीं? मॉडल थीम का पूरी तरह से हर एंगल से विवरण कर रहा है या नहीं? झांकी जनता को प्रभावित करेगी या नहीं? झांकी में संगीत, कला और कलाकारों का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार हुआ है या नहीं?

3D मॉडल फाइनल होने के बाद संबंधित राज्य झांकी बनाने का काम शुरू करते हैं. वहीं किसकी झांकी परेड में शामिल होगी और किसकी नहीं? इसका अंतिम फैसला समिति ही करती है.

First published on: Jan 03, 2026 01:59 PM

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About the Author

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के IMC&MT इंस्टीट्यूट से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन एवं Mphil कोर्स किया है। पिछले 12 साल से डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना रही हैं। वर्तमान में BAG Convergence Limited के News 24 Hindi डिजिटल विंग से बतौर चीफ सब एडिटर जुड़ी हैं। यहां खुशबू नेशनल, इंटरनेशनल, लाइव ब्रेकिंग, पॉलिटिक्स, क्राइम, एक्सप्लेनर आदि कवर करती हैं। इससे पहले खुशबू Amar Ujala और Dainik Bhaskar मीडिया हाउस के डिजिटल विंग में काम कर चुकी हैं।

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