ब्रिक्स समिट 2026 में PM मोदी की 10 कूटनीतिक कामयाबियां, दुनिया के सामने दिखी भारत की बढ़ती ताकत
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान भारत मंडपम में इंडिया की ग्लोबल पावर देखने को मिली. खासकर पीएम मोदी की कई ऐसे कूटनीतिक कामयाबियां सामने आईं जो इन ग्रुप देशों के बीच के रिश्तों को बेहतर बनाने की दिशा में एक बेहतरीन कदम साबित हो सकता है.
Written By: Shariqul Hoda|Updated: Sep 13, 2026 19:49
Edited By : Shariqul Hoda|Updated: Sep 13, 2026 19:49
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ब्रिक्स समिट 2026 (Photo-PTI)
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BRICS Summit 2026: भारत की मेजबानी में 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वां ब्रिक्स समिट आयोजित हुआ. सम्मेलन के दौरान सदस्य और सहयोगी देश कई मुद्दों पर एकमत हुए और ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ जारी किया गया. पीएम नरेंद्र मोदी इस दौरान काफी एक्टिव रहे, और तकरीबन 15 बाइलेट्रल मीटिंग्स कीं. दुनिया के सामने भारत कई कूटनीतिक मसलों पर कामयाब रहा.
1. ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ पर बनी सहमति
ब्रिक्स सम्मेलन 2026 की सबसे बड़ी सक्सेस ‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन’ रहा. सदस्य देशों ने ग्लोबल टेंशन, आर्थिक मामलों, ट्रेड और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से जुड़े अलग-अलग मुद्दों पर एक जैसा नजरिया पेश किया. आम सहमति बनना भारत की अध्यक्षता के लिए बड़ी अचीवमेंट रही.
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(Photo-PTI)
2. मिडिल ईस्ट को लेकर चिंता
ब्रिक्स देशों ने पश्चिम एशिया में बढ़ती हिंसा और अस्थिरता पर चिंता जाहिर की. इस ग्रुप ने तनाव कम करने, संयम बरतने और विवादों का समाधान बातचीत एवं कूटनीतिक जरिए से तलाशने की जरूरत पर जोर दिया क्योंकि इसके कारण कई देशों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
ब्रिक्स की मेजबानी भारत के लिए आसान जिम्मेदारी नहीं थी. पश्चिम एशिया में तनाव के बीच ईरान, यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों के बीच गंभीर मतभेद मौजूद हैं. इसके बावजूद भारत ने इन तीनों देशों को एक ही मंच पर साथ लाने में कामयाबी हासिल की.
4. एकतरफा यूएस टैरिफ पर ऐतराज
ब्रिक्स देशों ने एकतरफा आर्थिक एवं व्यापारिक प्रतिबंधों के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई. घोषणापत्र में आर्थिक दबाव और ऐसे व्यापारिक कदमों का विरोध किया गया, जो बाइलेट्रल ट्रेड सिस्टम को अफेक्ट कर सकते हैं. अमेरिकी टैरिफ पॉलिसी भी चर्चा के केंद्र में रही.
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(Photo-PTI)
5. पहलगाम आतंकी हमले की निंदा
भारत ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले को भी ग्लोबल स्टेज पर प्रमुखता से उठाया और इसकी निंदा की. आतंकवाद के खिलाफ साझा वैश्विक कार्रवाई की जरूरत बताते हुए भारत ने इस मसले को ब्रिक्स के सुरक्षा एजेंडे से जोड़ा.
भारत के पीएम नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बाइलेट्रल मीटिंग इस समिट की सबसे अहम घटनाओं में रही. दोनों नेताओं ने सीमा पर शांति, आपसी रिश्ते, व्यापार और सहयोग से जुड़े मसलों पर चर्चा की. दोनों देशों ने संबंधों को आगे बढ़ाने और मतभेदों के बावजूद संवाद बनाए रखने की दिशा में संकेत दिए.
7. मोदी-पुतिन की बातचीत
पीएम नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात में यूक्रेन संघर्ष सहित कई अंतरराष्ट्रीय और द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई. दोनों नेताओं ने भारत-रूस के रणनीतिक संबंधों, व्यापार और सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी विचार किया.
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(Photo-PTI)
8. ग्लोबल साउथ की आवाज को बुलंदी
भारत ने विकासशील देशों की चिंताओं को ग्लोबल स्टेज पर ज्यादा असरदार रिप्रजेंटेशन देने की वकालत की. ग्लोबल साउथ के देशों के हितों को इंटरनेशनल डिसीजन मेकिंग प्रॉसेस में जगह दिलाना भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की बड़ी प्रायोरिटीज में शामिल रहा.
9. डॉलर पर निर्भरता घटाने की कोशिश
ब्रिक्स देशों के बीच अल्टरनेट पेमेंट सिस्टम और वित्तीय सहयोग को मजबूत करने की चर्चा हुई. लोकल करेंसीज के इस्तेमाल और नए फाइनेंशियल सिस्टम पर जोर को डॉलर पर हद से ज्यादा डिपेंडेंसी कम करने की कोशिश के तौर पर देखा गया.
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(Photo-PTI)
10. UN में सुधार और UNSC में भारत की दावेदारी
भारत ने संयुक्त राष्ट्र और उसकी अहम संस्थाओं में सुधार की जरूरत दोहराई. सुरक्षा परिषद को ज्यादा रिप्रेजेंटेटिव बनाने की मांग के साथ भारत ने स्थायी सदस्यता की अपनी दावेदारी को भी आगे बढ़ाया.