Arif Khan
आरिफ खान मंसूरी को डिजिटल मीडिया में करीब 15 वर्षों का अनुभव है . वर्तमान में न्यूज24 की डिजिटल विंग में कार्यरत हैं. इससे पहले देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं.
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दिल्ली के भारत मंडपम में संपन्न हुए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन के साथ ही घरेलू राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है. सम्मेलन के अवसर पर आयोजित विशेष गाला डिनर के लिए सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इसमें हिस्सा नहीं लिया. दूसरी ओर, भाजपा शासित छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इसमें अपनी मौजूदगी दर्ज कराई.
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, गाला डिनर में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता शामिल हुईं.
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वहीं, विपक्ष शासित राज्यों से केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू इस डिनर में नहीं पहुंचे. हालांकि, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश से जुड़े सूत्रों ने दावा किया कि उनके मुख्यमंत्रियों के पहले से तय आधिकारिक कार्यक्रम थे.
राष्ट्रीय स्तर के बड़े आयोजनों से विपक्षी मुख्यमंत्रियों का किनारा करना नया नहीं है. इससे पहले जुलाई 2024 में गैर-एनडीए शासित राज्यों के साथ भेदभावपूर्ण बजट का आरोप लगाते हुए कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन के मुख्यमंत्रियों ने नीति आयोग की 9वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक का बहिष्कार किया था. इससे पहले साल 2023 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा आयोजित जी20 डिनर से भी कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री दूर रहे थे. हालांकि, तब तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री एमके स्टालिन समेत कुछ विपक्षी नेताओं ने इसमें भाग लिया था.
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इस बीच, कांग्रेस पार्टी ने ब्रिक्स समिट के नतीजे और ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ पर निशाना साधते हुए इसे उम्मीदों से काफी कमतर आंका है. पार्टी ने आरोप लगाया कि घोषणापत्र में अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में सीमा तनाव को लेकर कोई कड़ा संदेश नहीं दिया गया.
कांग्रेस नेता नाना पटोले ने कहा, ‘चीन ने जिस तरह से अरुणाचल और लद्दाख जैसे इलाकों पर कब्जा कर रखा है, उसे देखते हुए प्रधानमंत्री को खुलकर बोलना चाहिए था और चीनी सैनिकों की वापसी की मांग करनी चाहिए थी. अगर ऐसा होता तो यह भारत के लिए इस शिखर सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धि होती.’
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वहीं, कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने आतंकवाद के मुद्दे पर घेरते हुए कहा, ‘जारी किए गए दिल्ली घोषणापत्र में आतंकवाद और पहलगाम की घटना की निंदा तो की गई है, लेकिन क्या इसमें कहीं यह दर्ज है कि इस हमले को किसने अंजाम दिया? क्या यह बताया गया है कि दुनिया भर में आतंकवाद कौन फैला रहा है? घोषणापत्र में इसका कोई जिक्र नहीं है.’
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