पहलगाम आतंकी हमले में हाफिज सईद को NIA कोर्ट भेजेगी समन, पेश न हुआ तो भी चलेगा ट्रायल

पहलगाम में 22 अप्रैल, 2025 को हुए आतंकी हमले में आरोपी बनाए गए पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैबा के संस्थापक हाफिज सईद को एनआईए समन भेजेगी. अदालत सईद के खिलाफ पहले ही गैर-जमानती वारंट जारी कर चुकी है.

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पहलगाम आतंकी हमले के मामले में NIA कोर्ट लश्कर सरगना हाफिज सईद को विदेश मंत्रालय के जरिए समन भेजेगी. Pic Credit: ANI

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए बड़े आतंकी हमले के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैबा के संस्थापक हाफिज सईद पर कानूनी शिकंजा कसने की पूरी तैयारी कर ली है. जम्मू स्थित विशेष NIA अदालत अब विदेश मंत्रालय (MEA) के माध्यम से हाफिज सईद को समन भेजेगी और मुकदमे के लिए अदालत में पेश होने का आदेश देगी. यदि सईद पेश नहीं होता है तो न्यायालय भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 356 के तहत उसकी अनुपस्थिति में उस पर मुकदमा चला सकता है. एनआईए ने उस पर अप्रैल 2025 के हमले के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक होने का आरोप लगाया है, जिसमें 26 लोग मारे गए थे.

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अदालत इस मामले में हाफिज सईद के खिलाफ पहले ही गैर-जमानती वारंट जारी कर चुकी है.

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22 अप्रैल 2025 को हुआ था हमला

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय नागरिक समेत कुल 26 लोगों की जान चली गई थी. शुरुआत में इस मामले की जांच पहलगाम पुलिस कर रही थी, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसकी जांच एनआईए को सौंप दी थी. एनआईए ने जुलाई में दाखिल अपनी पूरक चार्जशीट में हाफिज सईद को मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल किया है. चार्जशीट में सईद को लश्कर-ए-तैबा और उसके सहयोगी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) के प्रमुख के रूप में नामजद किया गया है.

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हाजिर नहीं हुआ तो गैर-मौजूदगी में चलेगा मुकदमा

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी हाफिज सईद कोर्ट में हाजिर नहीं होता है, तो उसके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 356 के तहत मुकदमा चलाया जाएगा. इस नए कानूनी प्रावधान के तहत किसी घोषित अपराधी की गैर-मौजूदगी में भी कोर्ट जांच, ट्रायल और फैसला सुना सकती है.

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क्या है यह नया कानूनी प्रावधान?

यह विशेष कानूनी प्रावधान अदालत को यह अधिकार देता है कि वह ऐसे किसी भी घोषित अपराधी के खिलाफ जांच, ट्रायल और सजा सुनाने की प्रक्रिया पूरी कर सके, जो कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए फरार हो चुका है और जिसकी तुरंत गिरफ्तारी होने की कोई उम्मीद नहीं है. इसका सीधा मतलब यह है कि पाकिस्तान में छिपा बैठा आतंकी अब भारत में चल रहे कानूनी ट्रायल को टाल नहीं सकता.

गैर-मौजूदगी में ट्रायल शुरू करने की कानूनी शर्तें

किसी भी आरोपी की अनुपस्थिति में मुकदमा शुरू करने के लिए अदालत को कुछ बेहद जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है. अदालत को सबसे पहले आरोपी के खिलाफ लगातार दो गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी करने होते हैं. वारंट के बाद आरोपी को अदालत में पेश होने का आदेश देने वाला सार्वजनिक नोटिस अखबारों और अन्य माध्यमों से प्रकाशित कराया जाता है. आरोप तय होने की तारीख से लेकर कम से कम 90 दिन का समय पूरा होना जरूरी है. इस अवधि के बीत जाने के बाद ही गैर-मौजूदगी में ट्रायल शुरू हो सकता है. यदि आरोपी की तरफ से कोई निजी वकील मौजूद नहीं होता है तो राज्य की तरफ से उसके बचाव के लिए एक वकील मुहैया कराया जाता है.

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1597 पन्नों की चार्जशीट में साजिश का पूरा कच्चा-चिट्ठा

एनआईए की पूरक चार्जशीट एजेंसी द्वारा पहले दाखिल की गई 1,597 पन्नों की मूल चार्जशीट की कड़ी है. लश्कर-ए-तैबा के सरगना हाफिज सईद पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA), 1967 के तहत गंभीर आरोप तय किए गए हैं. जांच एजेंसी ने साफ किया है कि सईद ने पाकिस्तान में बैठकर भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने और इस खूनी हमले को अंजाम देने की पूरी साजिश रची थी. एजेंसी के अनुसार, यह हमला पाकिस्तानी हैंडलर्स, विदेशी आतंकियों और स्थानीय स्तर पर मिली रसद मदद का एक सुनियोजित नेटवर्क था.

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मूल चार्जशीट में शामिल थे 7 आरोपी

15 दिसंबर 2025 को दाखिल की गई मूल चार्जशीट में लश्कर/टीआरएफ और पाकिस्तानी हैंडलर साजिद जट्ट सहित सात आरोपियों के नाम दर्ज थे. इनमें 3 पाकिस्तानी आतंकी फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शाह, हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान और हमजा अफगानी तीनों जुलाई 2025 में दाचीगाम में सुरक्षा बलों के ‘ऑपरेशन महादेव’ में ढेर कर दिए गए थे. इसके अलावा आतंकियों को पनाह और मदद देने के आरोप में 2 स्थानीय मददगारों परवेज अहमद और बशीर अहमद जोथद को गिरफ्तार किया गया.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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