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BRICS समिट के डिनर मेन्यू पर सियासत, राहुल गांधी के तंज पर किरेन रिजिजू का पलटवार, सपा भी नहीं रही पीछे

कांग्रेस ने ब्रिक्स समिट के डिनर मेन्यू पर सवाल उठाए तो समाजवादी पार्टी ने समिट के नतीजों पर तंज कसे. राहुल गांधी और पवन खेड़ा ने मेन्यू को लेकर X पोस्ट की थीं, जिसका जवाब भाजपा सांसद किरेन रिजिजू ने दिया.

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भारत ने ब्रिक्स समिट 2026 की अध्यक्षता की और 12-13 सितंबर को समिट नई दिल्ली के भारत मंडपम में हुआ. समिट के पहले दिन भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स के सभी 11 सदस्य देशों और पार्टनर देशों के लिए गाला डिनर आयोजित किया, जिसके वेजिटेरियन मेन्यू पर देश की सियासत गरमाई हुई है. भाजपा और कांग्रेस में सियासी संग्राम छिड़ा हुआ है, क्योंकि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मेन्यू पर सवाल उठाते हुए तंज कसा, जिस पर भाजपा सांसद किरेन रिजिजू ने पलटवार किया. वहीं समाजवादी पार्टी ने ब्रिक्स समिट के नतीजों पर सवाल उठाए.

गाला डिनर मेन्यू पर राहुल गांधी ने कसा तंज

कांग्रेस ने ब्रिक्स समिट के मेहमानों को वेज फूड परोसने के लिए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. कांग्रेस ने इसे भाजपा के द्वारा दुनिया पर शाकाहार थोपने का प्रयास बताया. कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अपने X हैंडल पर छोले-भटूरे की फोटो पोस्ट करके कैप्शन दिया कि 80 प्रतिशत भारतीय नॉन-वेजिटेरियन हैं और भारतीय नॉन-वेज फूड बहुत स्वादिष्ट होता है. मेरी बहन के हाथों से बने छोले भटूरे भी बहुत टेस्टी होते हैं. बता दें कि ब्रिक्स समिट के मेहमानों के लिए आयोजित गाला डिनर के मेन्यू में सिर्फ वेज फूड था, जबकि डिनर करने वाले लोग इंटरनेशनल डेलीगेशन थे और वे नॉन-वेज खाते होगे.

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कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी साधा निशाना

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने X पर पोस्ट में लिखा कि भाजपा अपनी खान-पान संबंधी पसंद को पहले से भारतीयों पर थोप रही है, जिससे गंभीर समस्या पैदा हो रही है. अब भाजपा ने दुनियाभर के देशों में अपने मित्रों पर अपनी पसंद थोपनी शुरू कर दी है. भारत दुनिया का सबसे समृद्ध और विविधताओं वाला देश है, जहां कई तरह के बेहतरीन नॉन-वेज व्यंजन बनते हैं, जो दुनियाभर के लोगों को पसंद आते हैं और वे उनका खूब आनंद भी लेते हैं. फिर मोदी सरकार भारत की इस संस्कृति को क्यों छिपा रही है? क्या मोदी सरकार को भारत की विविधता से शर्म आती है, जबकि वो भारत की असली पहचान है?

राहुल-पवन के तंज पर रिजिजू का पलटवार

कांग्रेस सांसदों राहुल गांधी और पवन खेड़ा के आरोपों पर भाजपा मंत्री किरेन रिजिजू ने पलटवार किया. उन्होंने नाम लिए बिना अपने X हैंडल पर पोस्ट में लिखा कि मुझे यकीन नहीं हो रहा कि कांग्रेस ब्रिक्स के सदस्य देशों के नेताओं को परोसे गए खाने पर राजनीति कर रही है. विदेशी मेहमानों ने इंडियन वेज फूड का लुत्फ उठाया, जिसमें देश की अलग-अलग संस्कृतियों के व्यंजन शामिल थे. कांग्रेस से समिट की उपलब्धियों पर फोकस करने की बजाय डिनर मेन्यू पर सवाल उठाकर अंतरराष्ट्रीय राजनयिक कार्यक्रम का महत्व कम करने का प्रयास किया है. कांग्रेस अपने देश को आगे बढ़ता नहीं देख सकती.

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समाजवादी पार्टी ने नतीजों पर सवाल उठाए

समाजवादी पार्टी ने ब्रिक्स सम्मेलन के नतीजों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि दुनिया को परेशान कर रहे युद्धों को रोकने के लिए और भी बहुत कुछ किया जा सकता था. सांसद राम गोपाल यादव ने दावा किया कि समिट का कोई रिजल्ट नहीं निकला. अगर ब्रिक्स देश रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने या ईरान संघर्ष से जुड़े पक्षों को समझाने के लिए एकजुट होते तो स्थिति कुछ और होती. युद्ध पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहे हैं और अर्थव्यवस्थाएं अस्थिरता का दंश झेल रही हैं. 45 पेज का जॉइंट स्टेटमेंट जारी करके मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई और संयम, संवाद और कूटनीति से विवाद सुलझाने का आह्वान किया गया, लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला.

First published on: Sep 14, 2026 11:14 AM

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About the Author

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.

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