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लिव-इन रिलेशनशिप पर मद्रास हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी, ‘ऐसे रिश्ते समाज के लिए सांस्कृतिक झटका’

मद्रास हाई कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर शादी का वादा कर धोखा देने की याचिका खारिज करते हुए अहम टिप्पणी की. जस्टिस एस. श्रीमाथी ने ऐसे रिश्तों को भारतीय समाज के लिए 'सांस्कृतिक झटका' करार देते हुए कहा कि इनमें रहने वाली महिलाओं को पत्नी का दर्जा देकर सुरक्षा मिलनी चाहिए.

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Edited By : Vijay Jain Updated: Jan 20, 2026 09:22
madras high court

मद्रास हाई कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को भारतीय समाज के लिए ‘सांस्कृतिक झटका’ करार देते हुए इस पर गहरी चिंता जताई है. जस्टिस एस. श्रीमाथी ने मदुरै बेंच में दिए एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप में महिलाओं को पत्नी का दर्जा देकर कानूनी और आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए, ताकि वे शोषण और मानसिक आघात से बच सकें. यह हर जगह बड़े पैमाने पर हो रहा है. लड़कियां खुद को मॉडर्न समझकर ऐसे रिश्ते में रहने का फैसला करती हैं, लेकिन कुछ समय बाद उन्हें एहसास होता है कि यह रिश्ता शादी जैसी कोई सुरक्षा नहीं देता. ऐसी स्थिति में महिलाएं मानसिक ट्रॉमा और वित्तीय संकट का शिकार हो जाती हैं.

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किस केस में कोर्ट ने दी यह टिप्पणी?

मद्रास हाई कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप पर अहम टिप्पणी एक व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए दी. आरोपी पर एक महिला से शादी का वादा करके शारीरिक संबंध बनाने और बाद में शादी से मुकरने का आरोप था. व्यक्ति ने दावा किया कि उसने महिला को इसलिए छोड़ दिया क्योंकि उसका ‘चरित्र अच्छा नहीं था’. जस्टिस श्रीमाथी ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा, “लड़के खुद को मॉडर्न मानकर लिव-इन रिलेशनशिप में रहते हैं, लेकिन बाद में लड़कियों के चरित्र पर सवाल उठाते हैं. कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर शादी संभव नहीं है तो पुरुषों को कानूनी प्रावधानों का सामना करना पड़ेगा.

कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?

कोर्ट ने कहा कि वर्तमान में महिलाओं को मुख्य रूप से भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 69 के तहत सुरक्षा मिलती है, जो शादी का वादा करके यौन संबंध बनाने और उसे पूरा न करने से संबंधित है. हालांकि, यह पर्याप्त नहीं है, और महिलाओं को लिव-इन रिलेशनशिप में पत्नी जैसा दर्जा देकर बेहतर संरक्षण दिया जाना चाहिए. यह फैसला महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि लिव-इन रिलेशनशिप में अक्सर महिलाएं कानूनी कमजोरी का शिकार हो जाती हैं. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में गंभीरता और प्रथम दृष्टया सबूतों को देखते हुए अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती.

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First published on: Jan 20, 2026 09:01 AM

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