जुलाई में भी नहीं बरस रहे बादल! भारत में मॉनसून पर अचानक क्यों लगा ब्रेक, जानिए अब कब होगी बारिश?

भारत मौसम विभाग (IMD) ने एक प्रेस रिलीज़ जारी करते हुए कहा कि अगले 6-7 दिनों तक भारत के कुछ हिस्सो में बारिश कम होगी. उनका कहना है कि 17 जुलाई तक मॉनसून कमज़ोर पड़ता नज़र आ रहा है. इसकी क्या वजह है, पढ़िए इस रिपोर्ट में.

IMD Weather Alert

Credit: AI

जुलाई महीने में अक्सर झमाझम बारिश होती है, ये मॉनसून का सबसे शानदार वक्त होता है. इन दिनों अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और पश्चिमी घाट जैसी जगहें बारिश की आगोश में होने चाहिए. लेकिन भारत की सैटेलाइट तस्वीरें तो कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं. ज्यादातर जगहों पर आसमान साफ है. ऐसा लग रहा है मानो जुलाई नहीं, अप्रैल का महीना चल रहा है. मौसम एक्सपर्ट इसे मॉनसून का ब्रेक कहते हैं.

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धीमी पड़ी मॉनसून की रफ्तार

भारत मौसम विभाग (IMD) ने एक प्रेस रिलीज़ जारी करते हुए कहा कि अगले 6-7 दिनों तक भारत के कुछ हिस्सो में बारिश कम होगी. उनका कहना है कि 17 जुलाई तक मॉनसून कमज़ोर पड़ता नज़र आ रहा है. मौसम विभाग के मुताबिक, पिछली एक सदी में इतनी कम बारिश वाला जून-जुलाई महीना शायद ही कभी गया है. ISRO की कुछ मौसम सैटेलाइट्स हर वक्त अलर्ट मोड पर रहती हैं. उन्हें इन्फ्रारेड तकनीक से मौसम के बदलाव के बारे में तुरंत पता चल जाता है. जुलाई के पहले हफ्ते में जो सैटेलाइट इमेज मिलीं थीं, उसके मुताबिक मॉनसून की रफ्तार ठीक चल रही थी. लेकिन दूसरे हफ्ते तक, धीरे-धीरे वो कमज़ोर पड़ गई.

क्या है वजह?

बरसात पर लगे ब्रेक की बड़ी वजह मॉनसून ट्रफ का नेचर है. मॉनसून ट्रफ़ कम हवा के दबाव वाली एक लंबी पट्टी होती है जो आम तौर पर उत्तर-पश्चिम भारत से बंगाल की खाड़ी के ऊपरी हिस्से तक मैदानी इलाकों में फैली होती है. ये कम दबाव हवा को अपनी ओर खींचता है. जब ट्रप नॉर्मल कंडिशन में होता है तो मॉनसून वाले मेन इलाकों में मूसलाधार बारिश होती है, लेकिन हर बार ये ट्रफ एक जगह पर नहीं टिकता. इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ. इसलिए मॉनसून की रफ्तार पर ब्रेक लग गया. ट्रफ के अपने पॉजिशन बदलते ही देश में बारिश का अनुमान हिल जाता है. मौसम वैज्ञानिक इसे सब्सिडेंस यानि हवा का नीचे बैठना कहते हैं. इसकी वजह बारिश के बादल छंट जाते हैं.

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कब लौटेगी बारिश?

IMD के अनुमान के मुताबिक, 16 से 22 जुलाई के बीच मॉनसून ट्रफ का पश्चिमी हिस्सा अपनी नॉर्मल अवस्था में लौट सकता है. जिससे बंगाल की खाड़ी में चक्रवात बन सकता है और मॉनसून फिर से अपनी रफ्तार पकड़ सकता है. लेकिन जब तक ऐसा नहीं होता तब तक देश के ज्यादातर हिस्सों में हल्की बारिश, तेज़ धूप, बढ़ती तपिश और उमस भरी गर्मी लोगों को बेहाल कर सकती है.

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लेखक के बारे में

Varsha Sikri

Varsha Sikri

वर्षा सिकरी News24 हिंदी डिजिटल में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. जर्नलिज्म में 9 साल का अनुभव रखने वाली वर्षा सिकरी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. वर्षा सिकरी ने सितंबर 2017 में इंडिया टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद से उन्होंने रिपब्लिक टीवी, जी न्यूज, आज तक जैसे चैनलों में काम किया. फिलहाल वो News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 9 साल के करियर में वर्षा सिकरी ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. वर्षा सिकरी का पत्रकारिता में अनुभव: 9 साल योग्यता: NRAI स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन करने के बाद वर्षा सिकरी ने मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने बतौर एंकर और रिपोर्टर भी काम किया है.
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