---विज्ञापन---

क्या सच में खतरे में है अरावली हिल्स? केंद्र सरकार ने दिया स्पष्ट जवाब, इन आरोपों का किया खंडन

सरकार ने कहा कि गुड़गांव (गुरुग्राम) में 10,000 एकड़ जमीन को कंपन्सेटरी अफॉरेस्टेशन (क्षतिपूर्ति वनीकरण) के लिए आरक्षित किया गया है. इसके अतिरिक्त, 750 एकड़ से अधिक क्षतिग्रस्त जंगल क्षेत्र को ग्रीन क्रेडिट नीति के तहत पुनर्स्थापित करने का कार्य भी जारी है.

अरावली हिल्स पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से देशभर में इस प्राकृतिक धरोहर को बचाने की मुहिम सी छिड़ गई है. बीते दिनों देश की सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक आदेश में कहा कि 100 मीटर से ऊंची पहाड़ियों को ही अब अरावली का हिस्सा माना जाएगा. कोर्ट के फैसले के बाद से कई एक्सपर्ट्स ने आदेश पर आपत्ति जताते हुए दावा किया कि अरावली रेंज में 90% से अधिक पहाड़ियां 100 मीटर से कम हैं, ऐसे में ज्यादातर पहाड़ियों का अस्तित्व खतरे में है. अब अरावली हिल्स को लेकर मचे बवाल पर केंद्र सरकार का भी बयान सामने आया है.

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने अरावली पहाड़ियों के संरक्षण को लेकर चल रही बहस पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में इस दिशा में ठोस कदम उठाए हैं. उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ग्रीन अरावली मूवमेंट और ग्रीन इंडिया मिशन जैसी पहल ने देश में हरित विकास को नई दिशा दी है. केंद्रीय मंत्री ने ये भी बताया कि वर्ष 2014 में देश में जहां केवल 24 रामसर साइट्स (अंतरराष्ट्रीय महत्व की वेटलैंड साइट्स) थीं, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 96 हो गई है.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: हिमाचल में मरीज और डॉक्टर के बीच चले लात-घूंसे, वीडियो सामने आने पर मचा बवाल

आरोपों का किया खंडन


हाल में अरावली क्षेत्र में खनन गतिविधियों को लेकर उठे विवाद पर यादव ने विपक्षी नेताओं और अन्य आलोचकों के आरोपों का खंडन किया. उन्होंने कहा, ‘कुछ वरिष्ठ नेता भ्रामक ट्वीट्स कर रहे हैं. मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि एनसीआर क्षेत्र में खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है. ऐसे में किसी नए खनन की बात ही नहीं उठती.’ मंत्री ने सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि न्यायालय ने भी अरावली श्रृंखला के संरक्षण के लिए दिल्ली, हरियाणा, गुजरात और राजस्थान सरकारों को ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैं. यादव ने कहा कि केंद्र और राज्यों का साझा उद्देश्य अरावली को फिर से हरा-भरा और जलवायु रेजिलिएंट बनाना है.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: बिहार में अपराध पर सख्त प्रहार, कानून-व्यवस्था को लेकर गृह विभाग का सालाना रिपोर्ट कार्ड जारी

First published on: Dec 22, 2025 05:41 PM

End of Article

About the Author

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला (Akarsh Shukla) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में वो News 24 Digital टीम को शिफ्ट हेड के तौर पर लीड कर रहे हैं। आकर्ष शुक्ला ने India.com (ZEE Media), 'नवोदय टाइम्स' (पंजाब केसरी ग्रुप), 'ओपेरा न्यूज' और 'वनइंडिया' (डेली हंट) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करके अपनी व्यापक पत्रकारिता क्षमता का परिचय दिया। उनकी विशेषज्ञता प्रिंट, डिजिटल मीडिया (वेबसाइट) और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से खबरों को सजीव और प्रभावी रूप में पेश करने में है। देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों के साथ-साथ आकर्ष को मनोरंजन, लाइफस्टाइल, ट्रेंडिंग और खेल जगत की खबरों का भी बखूबी अनुभव है। आकर्ष शुक्ला, पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज की आवाज और जनसंवाद का एक सशक्त माध्यम मानते हैं।

Read More

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला (Akarsh Shukla) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में वो News 24 Digital टीम को शिफ्ट हेड के तौर पर लीड कर रहे हैं। आकर्ष शुक्ला ने India.com (ZEE Media), 'नवोदय टाइम्स' (पंजाब केसरी ग्रुप), 'ओपेरा न्यूज' और 'वनइंडिया' (डेली हंट) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करके अपनी व्यापक पत्रकारिता क्षमता का परिचय दिया। उनकी विशेषज्ञता प्रिंट, डिजिटल मीडिया (वेबसाइट) और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से खबरों को सजीव और प्रभावी रूप में पेश करने में है। देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों के साथ-साथ आकर्ष को मनोरंजन, लाइफस्टाइल, ट्रेंडिंग और खेल जगत की खबरों का भी बखूबी अनुभव है। आकर्ष शुक्ला, पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज की आवाज और जनसंवाद का एक सशक्त माध्यम मानते हैं।

Read More
संबंधित खबरें

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.
Sponsored Links by Taboola