संसद के मानसून सत्र के अंतिम चरण में एफ़सीआरए यानी विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों पर सरकार को घेरने और सदन में पूर्ण उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सपा ने कांग्रेस की तर्ज पर अपने सांसदों के लिए तीन दिवसीय ‘थ्री-लाइन व्हिप’ जारी किया है. विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ की रणनीति के तहत यह कदम सदन में अपनी संख्याबल की ताकत दिखाने और महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों पर सरकार के खिलाफ एकजुट वोटिंग सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है. शुक्रवार को राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के कक्ष में विपक्षी दलों की अहम बैठक हुई थी, जिसमें सहयोगी दलों से भी सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा गया था.
गौरतलब है कि संसद के वर्तमान सत्र के अंतिम दिनों में FCRA संशोधन विधेयक 2026 और परिसीमन से जुड़े विषयों पर बहस प्रस्तावित है. वहीं, मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने गुरुवार को गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद संकेत दिया कि अमित शाह 12 अगस्त को लोकसभा में यह बिल पेश कर सकते हैं.
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सपा के व्हिप की असली वजह
कांग्रेस के बाद समाजवादी पार्टी द्वारा जारी इस व्हिप के पीछे तीन मुख्य रणनीतिक कारण हैं
- सदन में उपस्थिति की अनिवार्यता: 10 से 12 अगस्त के दौरान किसी भी स्थिति में पार्टी के सभी सांसदों की उपस्थिति अनिवार्य की गई है.
- विपक्षी एकजुटता : केवल सपा ही नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) और अन्य घटक दलों को भी अपने सांसदों को दिल्ली में मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है.
- वोटिंग के दौरान क्रॉस-वोटिंग रोकना: संसद में किसी भी डिवीजन वोटिंग की स्थिति बनने पर पार्टी लाइन के पक्ष में मतदान सुनिश्चित करना.
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क्या होता है ‘थ्री-लाइन व्हिप’और इसके मायने
राजनीतिक और संसदीय शब्दावली में व्हिप एक आधिकारिक निर्देश होता है. वन-लाइन व्हिप के तहत सदस्यों को वोटिंग की जानकारी दी जाती है, जिसमें उपस्थिति अनिवार्य नहीं. टू-लाइन व्हिप में सदस्यों को सदन में उपस्थित रहने का निर्देश दिया जाता है. थ्री-लाइन व्हिप एक अति गंभीर निर्देश होता है, जिसके तहत सदन में उपस्थिति और पार्टी लाइन के अनुसार वोट करना अनिवार्य होता है. उल्लंघन पर दल-बदल कानून के तहत सदस्यता रद्द हो सकती है.
सपा की रणनीति को समझें
लोकसभा चुनाव 2024 में उत्तर प्रदेश में शानदार प्रदर्शन के बाद सपा 37 लोकसभा सांसदों के साथ संसद में INDIA ब्लॉक का दूसरा सबसे बड़ा दल बनकर उभरी थी. सपा प्रमुख अखिलेश यादव संसद में पार्टी की इस ताकत को किसी भी विधेयक के दौरान बिखरने नहीं देना चाहते. FCRA बिल और गैर-सरकारी संगठनों पर कसते शिकंजे को लेकर अल्पसंख्यक और नागरिक समाज समूह सरकार से असहमत हैं. सपा ऐसे मुद्दों पर वोटिंग कराकर सरकार पर नैतिक दबाव बनाना चाहती है.
सोमवार से बुधवार तक सदन में उपस्थिति अनिवार्य
कांग्रेस को आशंका है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मानसून सत्र के बचे हुए दिनों में संसद में आकर FCRA Amendment Bill को पेश कर सकते हैं. इसी रणनीति के तहत कांग्रेस ने अपने सभी लोकसभा सांसदों को सोमवार से बुधवार तक सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का तीन लाइन का व्हिप जारी किया है. कांग्रेस ही नहीं, बल्कि पूरा विपक्ष अपने सांसदों की 100% मौजूदगी सुनिश्चित करने में जुटा है ताकि बिल पर बहस और वोटिंग के दौरान अपनी ताकत दिखाई जा सके.
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