कांग्रेस के बाद सपा ने क्यों जारी किया अपने सांसदों के लिए 3 दिन का व्हिप? जानें क्या है रणनीति

कांग्रेस के बाद समाजवादी पार्टी ने अपने सांसदों को 10 अगस्त, 11 और 12 अगस्त को सुबह 11 बजे से सदन स्थगित होने तक उपस्थित रहने का निर्देश दिया है. संसद में FCRA बिल पर घेराबंदी की क्या है सपा और INDIA ब्लॉक की रणनीति?

Samajwadi Party Whip, Three Line Whip, FCRA Amendment Bill 2026
विज्ञापन

संसद के मानसून सत्र के अंतिम चरण में एफ़सीआरए यानी विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों पर सरकार को घेरने और सदन में पूर्ण उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सपा ने कांग्रेस की तर्ज पर अपने सांसदों के लिए तीन दिवसीय ‘थ्री-लाइन व्हिप’ जारी किया है. विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ की रणनीति के तहत यह कदम सदन में अपनी संख्याबल की ताकत दिखाने और महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों पर सरकार के खिलाफ एकजुट वोटिंग सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है. शुक्रवार को राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के कक्ष में विपक्षी दलों की अहम बैठक हुई थी, जिसमें सहयोगी दलों से भी सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा गया था.

गौरतलब है कि संसद के वर्तमान सत्र के अंतिम दिनों में FCRA संशोधन विधेयक 2026 और परिसीमन से जुड़े विषयों पर बहस प्रस्तावित है. वहीं, मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने गुरुवार को गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद संकेत दिया कि अमित शाह 12 अगस्त को लोकसभा में यह बिल पेश कर सकते हैं.

Advertisment

सपा के व्हिप की असली वजह

कांग्रेस के बाद समाजवादी पार्टी द्वारा जारी इस व्हिप के पीछे तीन मुख्य रणनीतिक कारण हैं

  • सदन में उपस्थिति की अनिवार्यता: 10 से 12 अगस्त के दौरान किसी भी स्थिति में पार्टी के सभी सांसदों की उपस्थिति अनिवार्य की गई है.
  • विपक्षी एकजुटता : केवल सपा ही नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) और अन्य घटक दलों को भी अपने सांसदों को दिल्ली में मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है.
  • वोटिंग के दौरान क्रॉस-वोटिंग रोकना: संसद में किसी भी डिवीजन वोटिंग की स्थिति बनने पर पार्टी लाइन के पक्ष में मतदान सुनिश्चित करना.

‘FCRA बिल इंटरनल मेटर है…’, केंद्र ने विदेशी फंडिंग पर अमेरिकी सांसद की टिप्पणी को किया खारिज

विज्ञापन

क्या होता है ‘थ्री-लाइन व्हिप’और इसके मायने

राजनीतिक और संसदीय शब्दावली में व्हिप एक आधिकारिक निर्देश होता है. वन-लाइन व्हिप के तहत सदस्यों को वोटिंग की जानकारी दी जाती है, जिसमें उपस्थिति अनिवार्य नहीं. टू-लाइन व्हिप में सदस्यों को सदन में उपस्थित रहने का निर्देश दिया जाता है. थ्री-लाइन व्हिप एक अति गंभीर निर्देश होता है, जिसके तहत सदन में उपस्थिति और पार्टी लाइन के अनुसार वोट करना अनिवार्य होता है. उल्लंघन पर दल-बदल कानून के तहत सदस्यता रद्द हो सकती है.

सपा की रणनीति को समझें

लोकसभा चुनाव 2024 में उत्तर प्रदेश में शानदार प्रदर्शन के बाद सपा 37 लोकसभा सांसदों के साथ संसद में INDIA ब्लॉक का दूसरा सबसे बड़ा दल बनकर उभरी थी. सपा प्रमुख अखिलेश यादव संसद में पार्टी की इस ताकत को किसी भी विधेयक के दौरान बिखरने नहीं देना चाहते. FCRA बिल और गैर-सरकारी संगठनों पर कसते शिकंजे को लेकर अल्पसंख्यक और नागरिक समाज समूह सरकार से असहमत हैं. सपा ऐसे मुद्दों पर वोटिंग कराकर सरकार पर नैतिक दबाव बनाना चाहती है.

विज्ञापन

सोमवार से बुधवार तक सदन में उपस्थिति अनिवार्य

कांग्रेस को आशंका है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मानसून सत्र के बचे हुए दिनों में संसद में आकर FCRA Amendment Bill को पेश कर सकते हैं. इसी रणनीति के तहत कांग्रेस ने अपने सभी लोकसभा सांसदों को सोमवार से बुधवार तक सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का तीन लाइन का व्हिप जारी किया है. कांग्रेस ही नहीं, बल्कि पूरा विपक्ष अपने सांसदों की 100% मौजूदगी सुनिश्चित करने में जुटा है ताकि बिल पर बहस और वोटिंग के दौरान अपनी ताकत दिखाई जा सके.

विज्ञापन

Get Breaking News First and Latest Updates from India and around the world on News24. Follow News24 on Facebook, Twitter.

First published on:

Read more: About our editorial guidelines and standards here.

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Vijay Jain

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
... और पढ़ें
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ