लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे बनाने वाली कंपनी PNC Infratech लगातार विवादों में घिरी है. अब फिर एक बार उसपर गाज गिरी है. कंपनी को लेकर CBI के स्पेशल कोर्ट में दाखिल हुई एक चार्जशीट में कई पहलू सामने आए हैं. सीबीआई ने साल 2024 के झांसी-खजुराहो हाईवे कंस्ट्रक्शन के दौरान ली गई रिश्वत के केस में चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें कई बड़ी गिरफ्तारियां भी हुई थी. चार्जशीट में कई चौंकाने वाले खुलासे भी हुए हैं.
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चार्जशीट में क्या-क्या?
सीबीआई ने चार्जशीट में NHAI अधिकारी पुरुषोत्तम लाल चौधरी, जो छतरपुर ऑफिस में बतौर जनरल मैनेजर और प्रोजेक्ट डायरेक्टर काम कर रहे हैं, PNC Infratech के MD योगेश जैन समेत 10 लोगों को आरोपी करार दिया है. दरअसल, 2024 में NHAI के पुरुषोत्तम चौधरी PNC कर्मचारियों से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए थे, जिसके बाद सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार किया था. NHAI अधिकारी पर आरोप है कि वो प्रोजेक्ट की NOC, फाइनल बिल पास कराने और काम के हैंडओवर के बदले 10 लाख रुपये की रिश्वत ले रहे थे.
CBI ने कई जगह की रेड
झांसी-खजुराहो हाईवे रिश्वतकांड में घूसखोरों को दबोचने के बाद सीबीआई ने ताबड़तोड़ एक्शन शुरू किया. एजेंसी ने छतरपुर, लखनऊ, आगरा, गुरुग्राम समेत कई ठिकानों पर रेड मारी, जहां आरोपियों से जुड़े कई अहम सबूत मिले. सीबीआई को डिजिटल डिवाइस और रिश्वत लेने से जुड़े कई डॉक्युमेंट्स मिले. आपको बता दें कि लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को जुलाई 2026 में आम जनता के लिए खोला गया था, जिसे PNC Infratech ने तैयार किया है. हैरानी की बात ये है कि एक महीने के अंदर ही एक्सप्रेसवे पर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई, जिन्हें सुखाने के लिए कंपनी पंखों का इस्तेमाल कर रही थी. वो तस्वीरें देखकर सभी लोग हैरान हो गए थे.
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