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Womens Day पर गौतम अडाणी का नारी शक्ति को सलाम, 3 पोतियों के लिए लिखी भावुक पोस्ट

International Womens Day 2025 Special On Gautam Adani: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2025 के मौके पर गौतम अडाणी ने नारी शक्ति को सलाम करते हुए अपनी मां, पत्नी और पोतियों के प्रति भावुक संदेश लिखा। उन्होंने महिला सशक्तिकरण, अडाणी फाउंडेशन की पहल और महिलाओं के उज्जवल भविष्य की अपनी प्रतिबद्धता को साझा किया।

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International Womens Day 2025 Special On Gautam Adani: अडाणी समूह के चेयरमैन गौतम अडाणी ने अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अपने जीवन से जुड़ी एक प्रेरक कहानी साझा की। उन्‍होंने कहा कि यह कहानी मेरे दिल में बहुत खास जगह रखती है। उन्‍होंने बताया कि मेरी एंटरप्रन्‍योर बनने की यात्रा में हीरे का व्‍यापार शुरुआती प्वाइंट था। अडाणी की यह कहानी उन युवाओं के लिए एक उदाहरण है, जो अपने जीवन में कुछ बड़ा करना चाहते हैं।

पोती की नाज़ुक उंगलियों ने दिलाई प्रतिज्ञा

अडाणी ने कहा कि उन महिलाओं को सलाम करता हूं, जिन्होंने उन्हें बनासकांठा में उनके बचपन से लेकर उनकी उद्यमशीलता (Entrepreneurship) की यात्रा तक प्रेरित किया। वहीं उनके जीवन और विश्वदृष्टि पर उनके गहन प्रभाव को समय-समय पर उजागर किया। एक दशक पहले जब मैंने अपनी पहली पोती की नाज़ुक उंगलियों को सहलाया था, मैंने एक मौन प्रतिज्ञा की थी, एक ऐसी दुनिया बनाने में मदद करना जहां उसकी आकांक्षाओं की कोई सीमा न हो, जहां उसकी आवाज़ किसी भी पुरुष की तरह ही सम्मान के साथ गूंजे और जहां उसकी कीमत सिर्फ उसके चरित्र और योगदान से मापी जाएगी।

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इसी के साथ गौतम अडाणी ने कहा कि अब तीन खूबसूरत पोतियों के साथ, यह वादा पहले से कहीं ज़्यादा उज्ज्वल हो गया है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस सिर्फ कैलेंडर पर एक तारीख़ नहीं है, यह हमारे द्वारा की गई प्रगति और अभी भी आगे की यात्रा की याद दिलाता है। मेरे लिए यह मिशन कई आयामों में गहराई से व्यक्तिगत है- एक युवा लड़के के रूप में अपनी मां से प्रेरित होना, एक व्यवसायी नेता के रूप में नेतृत्व में महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों को देखना, एक पति के रूप में अपनी पत्नी प्रीति के अडानी फाउंडेशन के प्रति अटूट समर्पण से प्रेरित होना, और एक दादा के रूप में उन लड़कियों के लिए बिना किसी सीमा के दुनिया का सपना देखना जो मुझे प्यार से “दादू” कहकर पुकारती हैं।

महिलाएं जो मेरी दुनिया बनाती हैं

बनासकांठा के रेगिस्तानी इलाकों में पले-बढ़े, लेकिन मैंने अपनी मां को जीविका में और कठिनाई को सामंजस्य में बदलते देखा। वह एक मूक शक्ति थी जिसने हमारे बड़े संयुक्त परिवार को एक साथ संजो कर रखा। अथक प्रयास, अडिग प्रेम, साहस का परिचय दिया। कठिनाइयों से कभी हार नहीं मानी। मैंने उनमें शांत नेतृत्व, निस्वार्थता और सुंदर दृढ़ता का सार देखा। इसके बाद मेरे जीवन में मेरी पत्नी प्रीति हमारे फाउंडेशन की पहल की एक प्रेरक शक्ति बन गईं, जिसने पूरे भारत में लाखों लोगों के जीवन को प्रगति एंव उन्नति की ओर लेकर जाने में सहायता की।

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उन्हें हमारे देश के दूरदराज के गांवों में ग्रामीण महिलाओं के साथ जुड़ते हुए, उनके परिवारों के भविष्य के लिए परिवर्तनकारी मुद्दों पर चर्चा करते हुए, अडानी फाउंडेशन की संघिनियों से सीखते हुए, जो गर्भवती माताओं को खुद की और उनके द्वारा जन्म दिए जाने वाले बच्चे की देखभाल करना सिखाती हैं, इन सभी ने मुझे सशक्तिकरण के वास्तविक सार को समझने में मदद की है। युवाओं से मिलना प्रेरणादायक है, जो हमारी शिक्षा पहल के माध्यम से अब इंजीनियर बनने का सपना देखती हैं, गोड्डा (झारखंड) में महिला उद्यमियों के दृढ़ संकल्प को देखना, जो दिहाड़ी मजदूर से सफल व्यवसायी बन गई हैं, और मेरी अपनी पोतियां, जो अपने से पहले की पीढ़ियों द्वारा झेले गए संघर्षों से अनजान हैं, उस असीम क्षमता का प्रतीक हैं जिसे हम पोषित करने का प्रयास करते हैं।

महिला सशक्तिकरण के लिए अडानी फाउंडेशन की प्रतिबद्धता

इस दृष्टिकोण के अनुरूप अडाणी फाउंडेशन महिला सशक्तिकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता में दृढ़ रहा है। हाल ही में, हमने ‘बटरफ्लाई इफ़ेक्ट’ फ्रेमवर्क का अनावरण किया, जो महिलाओं की जीवन भर की बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया एक परिवर्तनकारी दृष्टिकोण है। यह पहल बचपन से लेकर बुढ़ापे तक निरंतर सहायता प्रदान करने पर केंद्रित है, यह सुनिश्चित करते हुए कि महिलाओं को उनके सामाजिक-आर्थिक कल्याण को बढ़ाने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और अवसर प्राप्त हों। शिक्षा, स्वास्थ्य, स्थायी आजीविका और बुनियादी ढांचे पर ज़ोर देकर, हमारा लक्ष्य महिलाओं को अपने और अपने परिवार के लिए सार्थक विकल्प बनाने के लिए सशक्त बनाना है।

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लखपति दीदी के तहत सम्मान

अडाणी ने आगे कहा, हमारी ‘लखपति दीदी’ पहल के तहत हमने 1,000 से अधिक महिलाओं के साथ जश्न मनाया। जिन्होंने उन्नत उद्यमशीलता कौशल के जरिए से वित्तीय स्वतंत्रता हासिल की है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने में सहायता करके हम एक लिंग-समावेशी समाज बनाने में योगदान देते हैं, जहां महिलाओं के योगदान को महत्व दिया जाता है और मान्यता दी जाती है। ये पहल कार्यक्रम से कहीं अधिक हैं वे एक ऐसी दुनिया बनाने की हमारी अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं जहां हर महिला अपनी क्षमता का एहसास कर सके।

इसे पढ़ने वाली हर महिला, खासकर वे जो अनदेखा, कम आंका या चुप रहने का अनुभव करती हैं, जानती हैं कि आपकी यात्रा मायने रखती है। आपका नेतृत्व केवल स्वागत योग्य नहीं है। यह आवश्यक है। प्रभावशाली स्थिति में हर पुरुष से, चाहे वह घर, टीम या संगठन का नेतृत्व कर रहा हो, मैं आपसे आग्रह करता हूं कि आप लिंग समानता को महिलाओं के मुद्दे के रूप में न देखें बल्कि एक मानवीय अनिवार्यता के रूप में देखें। महिलाओं की प्रतिभा, अंतर्दृष्टि और नेतृत्व अमूल्य संसाधन हैं जिन्हें हम बर्बाद नहीं कर सकते।

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यह भी पढ़ें: Ind Vs NZ: CT2025 फाइनल के विनर पर भविष्यवाणी, जानें क्या कहते हैं पंडित जी

मेरी पोतियों के लिए, जो एक दिन यह पढ़ सकती हैं-

गौतम अडाणी ने अपनी बेटियों के बारे में बात करते हुए कहा कि मेरी प्यारी बेटियों आपको जो दुनिया विरासत में मिलेगी, वह ऐसी होनी चाहिए जहां आपकी प्रतिभा का स्वागत खुले दरवाज़ों से हो, न कि कांच की छतों से। जहां आपकी महत्वाकांक्षाओं पर कभी सवाल न उठाया जाए, केवल प्रोत्साहित किया जाए। जहां आपकी आवाज़ न सिर्फ़ सुनी जाए, बल्कि उसका अनुसरण किया जाए। आगे बढ़ते रहने, बाधाओं को तोड़ते रहने की कसम खाता हूं, जब तक कि वह दुनिया सिर्फ़ एक कल्पना न हो जाए, बल्कि एक वास्तविकता बन जाए।

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आइए हम सब मिलकर #AccelerateAction का आयोजन करें, जिसे 2025 IWD के लिए थीम के रूप में चुना गया है, इसलिए नहीं कि यह सही कॉर्पोरेट रणनीति या कोई लोकप्रिय सामाजिक कारण है, बल्कि इसलिए कि पत्नियां, बेटियां और पोतियां सिर्फ अपने सपनों के दायरे तक सीमित भविष्य की हकदार हैं। एक ऐसा भारत जो वास्तव में अपनी सभी बेटियों को गले लगाता है, वह भारत दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार है।

बाधाओं को तोड़ना

कई साल पहले हमारे एक बंदरगाह परियोजना के दौरे के दौरान मैंने परिचालन और नेतृत्व की भूमिकाओं में महिलाओं की अनुपस्थिति देखी। यह क्षमता की कमी के कारण नहीं था, बल्कि पारंपरिक रूप से पुरुष-प्रधान क्षेत्रों में उनके लिए रास्ते की अनुपस्थिति के कारण था। इस अहसास ने बदलाव के लिए व्यक्तिगत प्रतिबद्धता को जन्म दिया। मैंने हमारी बैठकों में अलग-अलग सवाल पूछा। क्या हमारी नीतियां वास्तव में अनुकूल हैं। हम भविष्य के नेतृत्व के लिए किसे सलाह दे रहे हैं।

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महिलाओं को अभी भी करना पड़ रहा कठिन संघर्ष

अडाणी ने आगे कहा आज जब मैं अपने दफ़्तरों में घूमता हूं और वरिष्ठ महिलाओं को हमारी प्रौद्योगिकी टीमों (Technology Teams) का नेतृत्व करते हुए देखता हूं, जब मैं अपनी अक्षय ऊर्जा साइटों पर जाता हूं और महिला इंजीनियरों को जटिल चुनौतियों का समाधान करते हुए देखता हूं, तो आनन्दित हो जाता हूं, वहीं जब मैं उन फाउंडेशन कार्यक्रमों में भाग लेता हूं जहां ग्रामीण महिलाएं फलते-फूलते व्यवसाय बना रही हैं, तो मैं बहुत गर्व से भर जाता हूं। उस गर्व के नीचे एक शांत अधीरता है। हम चाहे कितने भी आगे क्यों न आ गए हों, महिलाओं को अभी भी कठिन संघर्ष करना पड़ता है, ज़ोर से बोलना पड़ता है, और अपनी पहचान पाने के लिए खुद को दो बार साबित करना पड़ सकता है। उन्हें अभी भी ऐसे दरवाज़ों का सामना करना पड़ता है जो बहुत धीरे-धीरे खुलते हैं, या बिल्कुल भी नहीं खुलते।

आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर मेरी प्रतिबद्धता और भी गहरी हो जाती है, न केवल एक व्यवसाय नेता के रूप में, बल्कि एक दादा के रूप में भी। एक दादा जो एक ऐसी दुनिया का सपना देखता है जहां मेरी पोतियों को कभी भी अपनी जगह के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि यह पहले से ही उनका होगा।

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First published on: Mar 08, 2025 02:23 PM

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