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क्या अमीरों की थाली बढ़ा रही है ग्लोबल वार्मिंग? ‘नेचर फूड’ की स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा 

Global Warming Lancet Data: आपको सुनकर अजीब लग सकता है, लेकिन हमारे खान-पान से जुड़ी आदतें न सिर्फ हमारी हेल्थ बल्कि मौसम का मिजाज भी बिगाड़ रही हैं. यह हम नहीं बल्कि फूड से जुड़ी एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है. 

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हमारे खान पान की आदतें न सिर्फ हेल्थ बल्कि ग्लोबल वार्मिंग पर भी पड़ रहा है. ऐसा सुनकर आपको अजीब लग सकता है, लेकिन एक स्टडी में इस बात का खुलासा किया गया है कि इसमें उन देशों का योगदान सबसे ज्यादा है जिनका रहन-सहन और लाइफस्टाइल अच्छी है. बता दें कि इस रिपोर्ट को फूड जर्नल में पब्लिश किया गया है. इस दौरान ग्रीनहाउस गैस और युवाओं का सबसे बड़ा हाथ बताया जाता था. इस रिपोर्ट में बुजुर्गों को भी शामिल किया गया है, लेकिन क्यों आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं.

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क्या कहती है स्टडी?

इस रिपोर्ट में अलग-अलग ग्रुप और इंकम वाले लोगों को शामिल किया गया है. इस दौरान पाया गया है कि खाने से निकलने वाला ग्रीनहाउस गैस न सिर्फ इंसान की उम्र बल्कि लाइफस्टाइल, इनकम और खाने के पैटर्न पर भी डिपेंड करता है. ज्यादा इनकम वाले ग्रुप में वीगन चीजें ज्यादा होने की वजह से उनका कार्बन फुटप्रिंट भी ज्यादा पाया गया है. 

अमीरों की डाइट का असर ज्यादा क्यों?

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अमीरों की डाइट का असर ज्यादा है, क्योंकि वो लोग अपनी थाली में मीट या नॉन वेज चीजें ज्यादा शामिल करते हैं. साथ ही, डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन ज्यादा करते हैं और पैकेज्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का ज्यादा खाते हैं. इसके अलावा, ज्यादातर लोग जरूरत से ज्यादा खाना खरीदना और बर्बाद करना भी लगा रहता है. 

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किन चीजों का कार्बन फुटप्रिंट ज्यादा होता है?

  • बीफ और मटन जैसी चीजें 
  • डेयरी प्रोडक्ट्स
  • अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड
  • पैकेजिंग वाली चीजें होना 
  • लंबी दूरी से चीजें आना 

क्या सिर्फ अमीर ही जिम्मेदार हैं?

ऐसा नहीं है क्योंकि ग्लोबल वार्मिंग को इफेक्ट करने में हर एक बंदा जिम्मेदार है. रिपोर्ट में बुजुर्गों की थाली पर भी पड़ने वाला असर बताया गया है. स्टडी में बताया गया है कि दुनिया के दो सबसे ज्यादा आबादी वाले देशों में भारत और चीन में खाने पीने से निकलने वाली गैस सबसे ज्यादा नॉन वेज चीजों से निकली है.

क्या कहता है आंकड़ा?

रिपोर्ट में बताया गया है कि 2019 में सभी उम्र के लोगों में खाने पीने से होने वाले कुल उत्सर्जन में बढ़ोतरी का 90 प्रतिशत से अधिक और कुल उत्सर्जन का लगभग आधा हिस्सा नॉन वेज चीजों से आता है. बता दें कि ग्लोबल डाइटरी ग्रीनहाउस गैस का रिलेशन हमारे खान-पान और प्रोडक्ट्स से वायुमंडल में फैलने वाली मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड और नाइट्रस ऑक्साइड जैसी गैसों से है. 

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First published on: Jul 24, 2026 11:03 AM

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