NEET पेपर लीक के प्रदर्शनकारियों को मिलेगी राहत! केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से की FIR रद्द करने की मांग
NEET Paper Leak: तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार चाहती है कि शीर्ष अदालत संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करे और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करके पूरा न्याय करे.
Written By: Akarsh Shukla|Updated: Aug 31, 2026 16:27
Edited By : Akarsh Shukla|Updated: Aug 31, 2026 16:27
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इस मामले में सुप्रीम कोर्ट कल यानी मंगलवार, 1 सितंबर को सुनवाई करेगा. (Photo: ANI)
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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर उन NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की है. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक इसमें दिल्ली और दूसरे राज्यों में NEET पेपर लीक के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हिंसा के आरोपों को लेकर पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की गई है. भारत के सॉलिसिटर जनरल (SGI) तुषार मेहता ने CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने यह अर्जी रखी.
1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार चाहती है कि शीर्ष अदालत संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करे और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करके पूरा न्याय करे. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट कल यानी मंगलवार, 1 सितंबर को सुनवाई करेगा. गौरतलब है कि नीट पेपर लीक के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई थी, जिसके बाद सड़कों पर स्टूडेंट्स का गुस्सा फूट पड़ा था. दिल्ली समेत कई राज्यों में नीट पेपर लीक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ इस बीच कई जगहों पर हिंसक घटनाओं की भी खबरें सामने आईं.
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The Central government has moved an application in the Supreme Court seeking to quash FIRs filed by the police against protesters over allegations of violence during the NEET paper leak protests in Delhi and other States.
The Solicitor General of India (SGI), Tushar Mehta…
याचिका में केंद्र ने कहा कि पेपर लीक के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों में गुस्सा था, जिससे कुछ स्थानों पर तनाव और कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं देखने को मिली. साथ ही एफआईआर से बड़ी संख्या में युवा छात्रों के भविष्य पर भी असर पड़ सकता है, जिसे देखते हुए एफआईआर को रद्द किया जाना चाहिए. इसी क्रम में दिल्ली समेत कई जगहों पर दर्ज FIR को अदालत के हस्तक्षेप से रद्द कर दिया जाए, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में संतुलन बना रहे. सरकारी दलील के साथ-साथ मीडिया और नीति-निर्माताओं के बीच यह बहस भी तेज हो उठी है कि प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान के मामलों में कितनी संवेदनशीलता दिखाई जाए.
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केंद्र का तर्क है कि कई प्रकरणों की जांच जारी है, लेकिन व्यापक प्रभाव को देखते हुए FIR में ढील देना उचित होगा. दूसरी ओर विपक्ष और कुछ भाजपा-विरोधी दल इसे नीतिगत दखल के तौर पर भी देख रहे हैं, क्योंकि यह युवाओं के हवाले से प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाता है.