---विज्ञापन---

दिल्ली में CJP के मार्च पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकार, अधिकारियों को व्यवस्था बनाए रखने के दिए आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने भी कॉकरोच जनता पार्टी के मार्च पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है. भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने कहा कि उनके सामने ऐसे कोई हालात नहीं है कि वो उन्हें मार्च करने से रोक सकें.

---विज्ञापन---

नीट पेपर लीक मामले को लेकर 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने के बाद अब कॉकरोच जनता पार्टी 5 सितंबर को फिर एक बार मार्च करने वाले हैं. CJP का आरोप है कि सरकार ने उस दौरान जिन मांगों को पूरा करने का वादा किया था, वो अभी तक अधूरी ही हैं. सुप्रीम कोर्ट ने भी कॉकरोच जनता पार्टी के मार्च पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है. भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने कहा कि उनके सामने ऐसे कोई हालात नहीं है कि वो उन्हें मार्च करने से रोक सकें.

ये भी पढ़ें: सोनम वांगचुक ने CJP प्रोटेस्ट को किया याद, कहा- ’20 जुलाई को टूट गया था हौसला’

---विज्ञापन---

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों पर ये फैसला छोड़ दिया है कि मार्च निकाला जा सकता है या नहीं और अगर निकाला जाता है तो उसकी शर्तें क्या होगी. बेंच ने कहा- ”हमारे पास शक करने की कोई वजह नहीं है कि हर कोई शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से व्यवहार करेगा, अभी हमारे सामने ऐसा कुछ मानने या सोचने की कोई ठोस वजह नहीं है.” सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मार्च के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के बारे में फैसला केंद्र और दिल्ली सरकार को लेना है. अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि सभी से शांतिपूर्ण तरीके से और कानूनी दायरे में रहकर काम करने की उम्मीद की जाती है.

किस मामले पर हुई सुनवाई?

सुप्रीम कोर्ट ने शिवम उपाध्याय और रिटायर्ड दिल्ली पुलिस ऑफिसर राजेंद्र सिंह की याचिकाओं पर सुनवाई की. इनमें दिल्ली के इंडिया गेट और सेंट्रल विस्टा जैसे संवेदनशील इलाकों में भीड़ जुटने, मार्च निकालने और प्रदर्शन पर रोक लगाने की अपील की गई थी. याचिकाकर्ताओं ने 5 सितंबर को होने वाले कॉकरोच जनता पार्टी के मार्च को भी रद्द करने या बदलाव करने की भी मांग की गई थी, ताकि ये दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के बाद निकाला जाए. याचिकाकर्ता के वकील की तरफ से ये दलील पेश की गई कि CJP बिना किसी इजाजत के मार्च करने का ऐलान कैसे कर सकती है, इससे कानून व्यवस्था बिगड़ने का खतरा है. वकीलों ने कोर्ट से ये अपील की है कि वो ब्रिक्स सम्मेलन तक इस मार्च को टाल दे, लेकिन अदालत ने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया है.

---विज्ञापन---

ये भी पढ़ें: ‘वो लोग कोई संत नहीं हैं’, CJP नेताओं को लेकर सोनम वांगचुक ने क्यों कहा ऐसा?

First published on: Aug 31, 2026 04:25 PM

End of Article
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola