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केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, अब रैपर देखकर लोग पहचान सकेंगे कि दवाई एंटीबायोटिक है या नहीं

Antibiotic Medicines: एंटीबायोटिक मेडिसिन को लेकर केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर एक जागरूकता अभियान चलाएगी. वहीं केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है, जिसके बाद लोग रैपर देखकर जान जाएंगे कि दवाई एंटीबायोटिक मेडिसिन है या नहीं.

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एंटीबायोटिक दवाओं को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला किया है, जिसके अनुसार अब लोग रैपर देखकर पहचान जाएंगे कि दवाई एंटीबायोटिक है या नहीं. एंटीबायोटिक दवाओं के गलत और ज्यादा इस्तेमाल को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने यह कदम उठाया है, जिसके तहत एंटीबायोटिक दवाइयों की पैकेजिंग पर खास रंग, कोड या साफ निशान होगा, ताकि मरीज और फार्मासिस्ट उन्हें आसानी से पहचान सकें और पता लगा सकें कि वे एंटीबायोटिक दवाइयां हैं या नहीं.

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दवाओं की पैकेजिंग बदलने की तैयारी

देश में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस की समस्या बढ़ती जा रही है. केंद्र सरकार इसके लिए एक राष्ट्रीय जागरूकता अभियान भी शुरू करने जा रही है. इसी अभियान के तहत एक कदम एंटीबायोटिक दवाओं की पैकेजिंग बदलना होगा. केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) को दिशा-निर्देश जारी करेगी और केंद्र सरकार ने यह आदेश दिया है. एंटीबायोटिक दवाओं की पैकेजिंग बदलने, पैकेजिंग पर विशेष रंग, कोड या सिंबल होने का प्रस्ताव केंद्र सरकार का ही है.

प्रधानमंत्री ने जताई इस्तेमाल पर चिंता

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने प्रस्ताव के बारे में जानकारी दी और बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने दवाइयों के बढ़ते इस्तेमाल और इससे होने वाले साइट इफेक्ट्स पर चिंता जताई है. उन्होंने दिल्ली की एक महिला के बारे में बताया कि जो 15 से ज्यादा एंटीबायोटिक दवाएं ले रही थी, लेकिन उस पर एक भी दवाई का इस्तेमाल नहीं हुआ, इसलिए उन्होंने मन की बात में एंटीबायोटिक दवाओं का जिक्र किया और लोगों को इनका ज्यादा इस्तेमाल न करने की सलाह दी.

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एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस बनेगी वजह

स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) के बढ़ते खतरे को देखते हुए एंटीबायोटिक मेडिसिन की पैकेजिंग बदलने का फैसला किया गया है, क्योंकि बिना जरूरत के एंटीबायोटिक का सेवा करने बैक्टीरिया दवाओं को लेकर प्रतिरोधी हो रहे हैं, जिस वजह से नॉर्मल संक्रमण भी जानलेवा साबित हो सकता है. इसलिए सरकार की प्लानिंग है कि एंटीबायोटिक दवाइयों के लिए अलग रंग की पट्टी या बॉक्स, पैकिंग, सिंबल, क्यूआर कोड या अल्फान्यूमेरिक कोड बनाया जाए.

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First published on: Jan 07, 2026 06:40 AM

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About the Author

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के IMC&MT इंस्टीट्यूट से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन एवं Mphil कोर्स किया है। पिछले 12 साल से डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना रही हैं। वर्तमान में BAG Convergence Limited के News 24 Hindi डिजिटल विंग से बतौर चीफ सब एडिटर जुड़ी हैं। यहां खुशबू नेशनल, इंटरनेशनल, लाइव ब्रेकिंग, पॉलिटिक्स, क्राइम, एक्सप्लेनर आदि कवर करती हैं। इससे पहले खुशबू Amar Ujala और Dainik Bhaskar मीडिया हाउस के डिजिटल विंग में काम कर चुकी हैं।

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