आजादी के दिन अभिजीत दीपके का नया अभियान लॉन्च, निशाने पर आया ये सरकारी विभाग
CJP's School Thik Karo Campaign: जंतर-मंतर पर अपने कामयाब आंदोलन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के लीडर अभिजीत दिपके ने 15 अगस्त 2026 को अपना एक और अभियान शुरू किया है, जिसका नाम 'स्कूल ठीक करो' कैंपेन रखा गया है.
Written By: Shariqul Hoda|Updated: Aug 15, 2026 17:32
Edited By : Shariqul Hoda|Updated: Aug 15, 2026 17:32
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अभिजीत दिपके (Photo-X/@abhijeet_dipke)
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Abhijeet Dipke: कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दिपके ने शनिवार 15 अगस्त 2026 को महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में अपने गांव संतुक पिंपरी के एक सरकारी स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की खराब हालत पर चिंता जताई. दिपके आजादी के दिन झंडा फहराने के कार्यक्रम के लिए गांव गए थे और उन्होंने इस मौके पर पार्टी का ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू किया, जिसका मकसद सरकारी स्कूलों की समस्याओं को सामने लाना था.
गंदे टॉयलेट और पानी की कमी
स्थानीय जिला परिषद स्कूल के दौरे के दौरान अभिजीत दिपके ने गंदे टॉयलेट और पानी की पर्याप्त सुविधाओं की कमी की ओर इशारा किया. उन्होंने अपनी टीम की तरफ से किए गए एक ऑडिट का वीडियो भी शेयर किया, जिसमें वे स्कूल की छात्राओं से उन्हें मिलने वाली सुविधाओं के बारे में बात करते हुए दिख रहे हैं.
छात्रों से मिली जानकारी के आधार पर, अभियान में कई परेशानियों की पहचान की गई, जिनमें पानी की कम सप्लाई, पीने के पानी की कमी, बेंचों की कमी, गंदे वॉशरूम और टूटी हुई खिड़कियां शामिल हैं. दिपके ने कहा कि उन्होंने गांव के सरपंच से इन चिंताओं पर बात की थी, जिन्होंने उन्हें भरोसा दिलाया कि पंचायत इन समस्याओं को दूर करने के लिए कदम उठाएगी. वीडियो शेयर करते हुए दिपके ने कहा, ‘आजादी के 80 साल बाद भी हमारे सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है. बदलाव तब मुमकिन है जब हम सब मिलकर काम करें.’
Even after 80 years of Independence, our govt schools still lack basic amenities.
I spoke to the Sarpanch of my village, who has assured that the Panchayat will resolve all these issues within a week.
सीजेपी नेता ने स्वतंत्रता दिवस अपना ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू किया और सरकारी स्कूलों की ज्यादा पब्लिक स्क्रूटनी की मांग की. दिपके ने नागरिकों से अपील की कि वो सत्ता में किसी भी राजनीतिक पार्टी के होने के बावजूद शिक्षा सुविधाओं के बारे में सवाल उठाएं.
उन्होंने कहा, ‘लोगों को अब समझ आ गया है कि उन्हें शिक्षा के बारे में बात करनी चाहिए, जो आज की जरूरत है. चाहे किसी भी राजनीतिक पार्टी की सरकार रही हो, राज्यों में सरकारी स्कूलों के लिए किसी ने काम नहीं किया. अब जरूरत है, और हम सवाल पूछकर उनसे काम करवा सकते हैं.’ इस कैंपेन का मकसद महाराष्ट्र और भारत के दूसरे हिस्सों में स्कूलों की सुविधाओं के बारे में जानकारी इकट्ठा करना और इंफ्रास्ट्रक्चर में कमियों को सामने लाने के लिए डेटा को एक साथ लाना है.