---विज्ञापन---

हेल्थ angle-right

अफ्रीका में मच्छर के काटने से फैल रहा ‘येलो फीवर’, हर साल होती है हजारों मौतें! क्या भारत में भी कभी पहुंची ये जानलेवा बीमारी?

Yellow Fever: क्या आप जानते हैं जिस मच्छर से भारत में लोग डेंगू जैसी गंभीर बीमारी का शिकार हो जाते हैं वही मच्छर अफ्रीका जैसे देशों में येलो फीवर फैलते हैं. इस बीमारी के कारण हर साल दुनियाभर में हजारों लोगों की मौत हो जाती हैं. आइए इस स्टोरी में जानते हैं इस गंभीर बीमारी के बारे में और भारत में क्या ये पाया जाता है?

---विज्ञापन---

मच्छरों को देखते या उनका नाम सुनते ही आपके दिमाग में सबसे पहले डेंगू, मलेरिया या चिकनगुनिया का नाम आता होगा. ये तीनों ही गंभीर बीमारी है, जो मच्छर के काटने से फैलती है. भारत में इसके मामले अक्सर सामने आते रहते हैं, जिसे काफी लोग रिकवर भी हो जाते हैं, लेकिन अगर स्थिति गंभीर हो जाए, तो मौत तक हो जाती है. लेकिन हम आपको एक ऐसी बीमारी के बारे में बताएंगे, जो मच्छर के काटने से फैलती है, जिसका नाम येलो फीवर है. येलो फीवर भारत में पाई जाने वाली पीलिया नहीं है, बल्कि ये एक अलग की बीमारी है, जो मच्छरों के काटने से फैलती है. ये बीमारी मुख्य रूप से अफ्रीका और दक्षिण व मध्य अमेरिका पाई जाती है, जिसे हर साल बड़ी संख्या में मौत होती है. WHO की रिपोर्ट के अनुसार, येलो फीवर के कारण हर साल दुनियाभर में 67,000 से 1,73,000 गंभीर संक्रमणों में से अनुमानित 31,000 से 82,000 लोगों की मौत हो जाती है. गंभीर स्थिति के कारण लगभग 50% मरीजों की मौत 7 से 10 दिनों के भीतर हो जाती है.

यह भी पढ़ें: Dengue Fever Myth: क्या एक व्यक्ति से दूसरे को फैल सकता है डेंगू? AIIMS के डॉक्टर से जाने

---विज्ञापन---

क्या है ये येलो फीवर?

येलो फीवर एक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित मच्छरों के काटने से इंसानों तक पहुंचती है. इस बीमारी को फैलने के लिए एडीस (Aedes), हीमागोगस (Haemagogus) और सैबेथेस (Sabethes) नाम के प्रजाति के मच्छर जिम्मेदार होते हैं, जो दिन में काटती है. हालांकि, इसका मतलब ये नहीं कि हर मच्छर में ये वायरस मौजूद रहता है, बल्कि वही मच्छर संक्रमण पहुंचा सकता है, जिसमें यह वायरस मौजूद हो. जब कोई मच्छर संक्रमित इंसान या बंदर को काटता है, तो वायरस उसके शरीर में पहुंच जाता है. इसके बाद यही संक्रमित मच्छर किसी दूसरे स्वस्थ व्यक्ति को काटता है, तो वायरस उसके शरीर में भी जा सकता है. इस तरह संक्रमण आगे फैलता रहता है.

बीमारी के फैलने का तरीका अलग-अलग

WHO के अनुसार, बीमारी के फैलने का तरीका भी अलग-अलग हो सकता है.

---विज्ञापन---
  • सिल्वैटिक (या जंगल वाला) येलो फीवर तब फैलता है जब जंगली मच्छर बंदरों को काटते हैं और वायरस को दूसरे बंदरों और इंसानों में फैला देते हैं.
  • इंटरमीडिएट येलो फीवर ऐसे मच्छरों से फैलता है, जो बंदरों और इंसानों दोनों को संक्रमित कर सकते हैं. अफ्रीका में येलो फीवर के कई प्रकोप इसी तरह के संक्रमण से जुड़े रहे हैं.
  • अर्बन (शहरी) येलो फीवर से बड़े पैमाने पर महामारी फैल सकती है, जब संक्रमित लोग वायरस को घनी आबादी वाले इलाकों में ले जाते हैं जहां मच्छरों की संख्या ज्यादा होती है और लोगों में इम्युनिटी कम होती है. ऐसे में संक्रमण कई लोगों तक पहुंच सकता है, यही वजह है कि येलो फीवर को सिर्फ किसी एक देश की बीमारी नहीं माना जाता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस पर नजर रखी जाती है.

बुखार से लेकर पीलिया तक, ये हैं खतरनाक लक्षण

WHO के अनुसार, येलो फीवर का वायरस शरीर में पहुंच जाता है, तो आमतौर पर 3 से 6 दिनों में लक्षण पैदा कर सकता है. शुरुआत में तेज बुखार, सिरदर्द, मस्कुलर पेन और खासकर पीठ में दर्द, भूख कम लगना, मतली या उल्टी जैसी परेशानी हो सकती है. कई लोगों में लक्षण हल्के रहते हैं और कुछ दिनों में सुधार हो जाता है. हालांकि कुछ मरीजों में बीमारी गंभीर स्थिति में पहुंच सकती है, जहां तेज बुखार दोबारा लौटने के साथ आंखों और त्वचा का पीला पड़ना, गहरे रंग का पेशाब, पेट दर्द और खून बहने जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जिसके कारण मरीजों की मौत तक हो जाती है.

भारत में क्या कभी मिला है इस बीमारी का केस?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में कभी भी येलो फीवर का कोई मामला सामने नहीं आया है या दर्ज नहीं किया गया है. भले ही भारत में इस वायरस को फैलाने वाले मच्छर और इसके लिए अनुकूल मौसम मौजूद है, फिर भी यह बीमारी यहां की मूल बीमारी नहीं है और यहां कभी भी इसका स्थानीय प्रकोप नहीं हुआ है. हालांकि संक्रमित यात्री दूसरे देशों से वायरस भारत ला सकते हैं, इसलिए सरकार ने येलो फीवर प्रभावित देशों से आने-जाने वाले यात्रियों के लिए वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट से जुड़े नियम लागू किए हैं. भारत आने वाले यात्रियों में जरूरी वैध प्रमाणपत्र न होने पर क्वारंटीन की व्यवस्था भी हो सकती है.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: स्वाइन फ्लू और वायरल फीवर में क्या होता है अंतर? मानसून के बीच बढ़ रहा H1N1 का खतरा,

First published on: Aug 09, 2026 12:12 PM

End of Article

About the Author

Azhar Naim

अज़हर नईम एक डिजिटल पत्रकार हैं और उन्हें न्यूज़ और ऑनलाइन कंटेंट लिखने का अच्छा अनुभव है. वर्तमान में वह News24 Bag Convergence में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं, जहां वह मुख्य रूप से न्यूज, ट्रेंडिंग, हाइपर-लोकल, वायरल, ऑटो, लाइफस्टाइल और हेल्थ बीट से जुड़ी खबरों पर स्टोरीज तैयार करते हैं. वह ट्रेनी के रूप में ट्रेंडिंग, वायरल, जनरल नॉलेज, टेक्नोलॉजी, इंटरनेशनल और लाइफस्टाइल जैसे विभिन्न विषयों पर डिजिटल कंटेंट लिखते आए हैं. अज़हर ने 2024 में श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान और उसके बाद उन्हें कई मीडिया संस्थानों में काम करने का अनुभव मिला, जिससे उन्हें न्यूज रिपोर्टिंग, डिजिटल स्टोरीटेलिंग और पाठकों को ध्यान में रखकर कंटेंट बनाने की अच्छी समझ हासिल की. 1 साल से ज्यादा के अनुभव में अज़हर का मुख्य काम है डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स को समझना, SEO-फ्रेंडली कंटेंट लिखना और पाठकों से जुड़ी स्टोरीज तैयार करना.

Read More

Azhar Naim

अज़हर नईम एक डिजिटल पत्रकार हैं और उन्हें न्यूज़ और ऑनलाइन कंटेंट लिखने का अच्छा अनुभव है. वर्तमान में वह News24 Bag Convergence में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं, जहां वह मुख्य रूप से न्यूज, ट्रेंडिंग, हाइपर-लोकल, वायरल, ऑटो, लाइफस्टाइल और हेल्थ बीट से जुड़ी खबरों पर स्टोरीज तैयार करते हैं. वह ट्रेनी के रूप में ट्रेंडिंग, वायरल, जनरल नॉलेज, टेक्नोलॉजी, इंटरनेशनल और लाइफस्टाइल जैसे विभिन्न विषयों पर डिजिटल कंटेंट लिखते आए हैं. अज़हर ने 2024 में श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान और उसके बाद उन्हें कई मीडिया संस्थानों में काम करने का अनुभव मिला, जिससे उन्हें न्यूज रिपोर्टिंग, डिजिटल स्टोरीटेलिंग और पाठकों को ध्यान में रखकर कंटेंट बनाने की अच्छी समझ हासिल की. 1 साल से ज्यादा के अनुभव में अज़हर का मुख्य काम है डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स को समझना, SEO-फ्रेंडली कंटेंट लिखना और पाठकों से जुड़ी स्टोरीज तैयार करना.

Read More
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola