सिर और गर्दन का कैंसर लगातार बढ़ रहा है. भारत में इनकी संख्या ज्यादा है, क्योंकि मुंह और इससे जुड़े कैंसर की संख्या ज्यादा है. इसका कारण तंबाकू, धूम्रपान, सुपारी और शराब आदि हैं. हालांकि, इस बीमारी का नेचर भी बदल रहा है और ह्यूमन पेपिलोमावायरस यानी HPV कुछ सिर और गर्दन के कैंसर, खासकर ओरोफैरिंक्स के कैंसर के लिए बड़ा खतरा बनकर सामने आ रहा है. HPV से जुड़े सिर और गर्दन का कैंसर कम उम्र के लोगों में भी देखा जा रहा है. इसलिए सिर और गर्दन के कैंसर की पहचान वक्त पर करना जरूरी है. अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो परेशानी ज्यादा बढ़ सकती है.
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शुरुआती लक्षणों को समझना बेहद जरूरी
सिर और गर्दन के कैंसर में वक्त पर पहचान बेहद जरूरी हो जाता है. शुरुआती स्टेज में बीमारी का पता चलने पर इलाज को सही ढंग से किया जा सकता है. साथ ही, मरीजों में बोलने, निगलने और खाने जैसे जरूरी कामों को बनाए रखना भी जरूरी होता है. मुंह में लंबे समय तक बना रहने वाला छाला, बिना किसी वजह के सफेद या लाल धब्बे, निगलने में परेशानी या दर्द, लगातार गले में खराश, आवाज में बदलाव, बिना वजह खून आना या गर्दन में गांठ जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. खासकर अगर ये लक्षण लगातार बने हुए हैं तो डॉक्टर की सलाह पर तुरंत टेस्ट कराएं.
एडवांस स्टेज पर आने से पहले करें इलाज शुरू
कैंसर का नाम सुनकर डर सभी को लगता है, लेकिन यही डर कई बार मरीजों की जान ले लेता है. कुछ मरीज इलाज कराने के बजाय पहले आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक जैसी चीजों पर निर्भर रहते हैं. इसकी वजह से इलाज में देर हो जाती है और परेशानी ज्यादा बढ़ जाती है. बीमारी एडवांस स्टेज में पहुंच चुकी होती है. इसलिए शुरुआत में ही कैंसर के इलाज पर ध्यान दें और बीमारी से दूर रहें.
कैंसर में समय पर इलाज क्यों है जरूरी?
बीमारी का जल्दी पता लगाने और वक्त पर इलाज करने से शुरुआती स्टेज से होने वाले शरीर पर असर को कम किया जा सकता है. इसलिए मुंह, गले या गर्दन से जुड़े ऐसे लक्षण जो नॉर्मल नजर आएं, उन्हें नजरअंदाज न करें. तुरंत डॉक्टर से बात करें और अपना इलाज शुरू कराएं. साथ ही, तंबाकू और सिगरेट से दूरी बनाना, सुपारी और तंबाकू जैसी चीजों से बचना भी जरूरी है.
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