क्या हफ्तों तक आवाज बैठे रहना कैंसर का लक्षण हो सकता है? सर्जन ने बताया यह गले के कैंसर का संकेत है या नहीं

Gale Ke Cancer Ke Lakshan: फोर्टिस अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट और यूनिट हेड, हेड एंड नेक सर्जन डॉ. अंबेश सिंह बताते हैं कि गले का कैंसर एक खतरनाक कैंसर है जिसे जितना जल्दी पहचान लिया जाए उतना बेहतर होता है. ऐसे में जानिए लंबे समय तक गला बैठना कैंसर का लक्षण तो नहीं है.

Throat Cancer Symptoms

गर्दन के कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं? AI Generated Image

Throat Cancer Symptoms: गला नाक के पीछे से शुरू होकर फूड पाइप और विंडपाइप तक जाता है. गले का कैंसर हेड एंड नेक कैंसर है जो गले या वॉइस बॉक्स से शुरू हो सकता है. कैंसर तब होता है जब गले में, वॉइस वॉक्स में या टॉन्सिल्स में एब्नॉर्मल सेल्स की ग्रोथ होने लगती है. अगर इस कैंसर को समय रहते पहचान लिया जाए तो इसे फैलने से रोका जा सकता है. ऐसे में बहुत से लोगों का सवाल रहता है कि क्या आवाज या गला बैठना कैंसर का लक्षण (Cancer Sign) है या नहीं. इसी सवाल का जवाब दे रहे हैं फोर्टिस अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट और यूनिट हेड, हेड एंड नेक सर्जन डॉ. अंबेश सिंह. आइए डॉक्टर से ही जानते हैं हफ्तों तक गला बैठना क्या संकेत देता है.

विज्ञापन
विज्ञापन

क्या हफ्तों तक आवाज बैठे रहना कैंसर का लक्षण हो सकता है?

डॉक्टर कहते हैं कि हां, 3 हफ्ते से अधिक समय तक लगातार आवाज बैठना कभी-कभी गले/स्वरयंत्र के कैंसर का संकेत हो सकता है. खासकर यदि साथ में निगलने में दिक्कत, गले में गांठ, कान में दर्द या वजन कम होने जैसी दिक्कतें हो रही हैं तो यह गले के कैंसर का लक्षण हो सकता है.

गले के कैंसर के और कौन से लक्षण होते हैं

विज्ञापन

गले का कैंसर होने पर शुरुआती स्टेज में ये लक्षण (Gale Ke Cancer Ke Lakshan) नजर आते सकते हैं. अगर ये लक्षण 2 से 3 हफ्तों के बाद भी बने रहते हैं तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी होता है. इसीलिए इन लक्षणों को इग्नोर नहीं करना चाहिए –

  • गले में खराश बने रहना
  • गले में गांठ महसूस होना
  • गले से कर्कश आवाज आना या आवाज का बदल जाना
  • एक तरफ कान का दर्द महसूस होना
  • कुछ निगलते समय दर्द होना
  • बिना खांसी या एलर्जी के खांसी होना
  • बिना किसी वजह के ही वजन कम होना
  • गले पर सूजन आना.

इस बात का ध्यान रखें कि ये दिक्कतें कैंसर का ही लक्षण हैं ये जरूरी नहीं है. लेकिन, ये अगर 2 हफ्तों से ज्यादा बनी रहती हैं तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है. जांच को टालते ना रहें.

विज्ञापन

गले का कैंसर होने के क्या कारण हैं

तंबाकू का सेवन – तंबाकू का सेवन गले के कैंसर के सबसे बड़े कारणों में से एक है. इससे गले तक खतरनाक केमिकल्स जाते हैं जो सेल्स को डैमेज कर देते हैं. तंबाकू या धूम्रपान के अलावा सैकंडहैंड स्मोकिंग भी कैंसर की वजह बन सकती है.

विज्ञापन

एल्कोहल का सेवन – गले के कैंसर की वजह एल्कोहल का सेवन भी हो सकता है.

ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) – ह्यूमन पैपिलोमावायरस की चपेट में आने पर इंफेक्शन हो सकता है जो लंबे समय तक छुपा हुआ रहता है. यह गले के कैंसर की वजह बन सकता है.

विज्ञापन

जेनेटिक्स – परिवार में किसी को गले का कैंसर रहा हो तो व्यक्ति को भी कैंसर होने की संभावना रहती है.

ओरल हाइजीन का ख्याल ना रखना – गले के कैंसर की एक वजह मुंह की सफाई ना रखना भी हो सकता है.

विज्ञापन

अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
... और पढ़ें
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ