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सिरहाने मोबाइल रखकर सोने से क्या सच में बढ़ जाता है कैंसर का खतरा? होश उड़ा देगी एक्सपर्ट की बात

सोशल मीडिया पर अक्सर वीडियो में कहा जाता है कि फोन को सिरहाने रखकर सोने से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है. इसको लेकर लोग जानकारी हासिल करने लगते हैं कि क्या सच में ऐसा कुछ होता है? आइए इस स्टोरी में हम आपको बताते हैं कि कैंसर मोबाइल से होता है या नहीं और किस रेडिएशन से सबसे ज्यादा कैंसर का खतरा बना रहता है?

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Does Mobile Cause Cancer: आज के समय में तकिए के पास मोबाइल रखकर सोना एक आम आदत बन चुकी है. कई लोग अलार्म के लिए, तो कई लोग रात में कॉल या नोटिफिकेशन देखने की वजह से फोन सिरहाने रखते हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या ऐसा करना सच में कैंसर (Cancer) के खतरे को बढ़ा देता है? सोशल मीडिया पर अक्सर मोबाइल रेडिएशन (Mobile Radiation) को लेकर डराने वाली बातें कही जाती हैं, जिससे लोगों में भ्रम पैदा होता है. इस मुद्दे को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि मोबाइल किस तरह का रेडिएशन छोड़ता है, उसका शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है और अब तक वैज्ञानिक शोध क्या कहते हैं.

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मोबाइल क्या सच में बनता है कैंसर की वजह? Does mobile phone really cause cancer

मोबाइल फोन से निकलने वाली तरंगें नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन (Non-ionizing Radiation) की श्रेणी में आती हैं. यह रेडिएशन ऊर्जा के स्तर पर इतना शक्तिशाली नहीं होता कि शरीर की कोशिकाओं के डीएनए (DNA) को सीधे नुकसान पहुंचा सके. विशेषज्ञ संस्थाएं जैसे World Health Organization (WHO) बताती हैं कि अब तक के उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों में मोबाइल फोन के सामान्य उपयोग और कैंसर के बीच स्पष्ट कारण-परिणाम संबंध साबित नहीं हुआ है. हालांकि, WHO की कैंसर रिसर्च एजेंसी International Agency for Research on Cancer (IARC) ने रेडियोफ्रीक्वेंसी रेडिएशन (Radiofrequency Radiation) को ‘संभावित रूप से कार्सिनोजेनिक (Carcinogenic)(Group 2B) श्रेणी में रखा है, जिसका मतलब है कि सीमित प्रमाण हैं, लेकिन ठोस निष्कर्ष अभी साबित नहीं हुए हैं.

क्या सिर के पास फोन रखकर सो सकते हैं?

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एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर आप फोन को सिर के पास रखकर, या तकिए के नीचे रखकर सोते हैं, तो इस आदत को तुरंत बदल देना चाहिए. अगर आप सोचते हैं कि फोन जब इस्तेमाल नहीं हो रहा होता है, तो रेडिएशन नहीं छोड़ रहा होगा, तो ऐसा नहीं है. एक्सपर्ट बताते हैं कि फोन तब भी रेडिएशन छोड़ता है. यह नींद की गुणवत्ता बिगाड़ सकता है, सिरदर्द की वजह बन सकता है और लंबे समय में कैंसर के खतरे के करीब ले जा सकता है.

आयोनाइजिंग रेडिएशन क्या होता है?

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आयोनाइजिंग रेडिएशन (Ionizing Radiation) इतनी अधिक ऊर्जा होती है कि वह परमाणुओं से इलेक्ट्रॉन निकाल सकता है और सीधे डीएनए को नुकसान पहुंचा सकता है. एक्स-रे और गामा किरणें इसी श्रेणी में आती हैं. उदाहरण के लिए, मेडिकल जांच में इस्तेमाल होने वाला X-ray आयोनाइजिंग रेडिएशन का स्रोत है. इस तरह का रेडिएशन उच्च मात्रा में और लंबे समय तक एक्सपोजर पर कैंसर का जोखिम बढ़ा सकता है. मोबाइल फोन से निकलने वाली तरंगें इस श्रेणी में नहीं आतीं, इसलिए उनका प्रभाव एक्स-रे जैसे रेडिएशन से अलग और काफी कम ऊर्जा वाला होता है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

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एक्सपर्ट का कहना है कि मौजूदा वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर सिरहाने मोबाइल रखकर सोने से कैंसर होने का पुख्ता प्रमाण नहीं है. फिर भी, एहतियात के तौर पर फोन को शरीर से थोड़ी दूरी पर रखना, एयरप्लेन मोड का इस्तेमाल करना या रात में डेटा बंद करना बेहतर विकल्प हो सकता है. साथ ही, मोबाइल को तकिए के नीचे रखकर सोना ओवरहीटिंग के कारण आग या बैटरी से जुड़े जोखिम बढ़ा सकता है. इसलिए डर के बजाय सही जानकारी और संतुलित सावधानी अपनाना ही समझदारी है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

First published on: Feb 15, 2026 11:03 AM

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About the Author

Azhar Naim

अज़हर नईम एक डिजिटल पत्रकार हैं. अज़हर नईम News24 Bag Convergence में सब-एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वह मुख्य रूप से लाइफस्टाइल, हेल्थ और वायरल सेक्शन से जुड़ी खबरें लिखते हैं. उन्होंने साल 2024 में श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री हासिल की. पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने इंडिया न्यूज और खबरफास्ट जैसे मीडिया संस्थानों के साथ काम किया, जहां उन्हें डिजिटल न्यूज रिपोर्टिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव मिला. इसके बाद उन्होंने एक साल से ज्यादा समय तक (2024-2026) इंडिया डॉट कॉम (Zee Media) में ट्रेनी के तौर पर काम किया और हेल्थ, लाइफस्टाइल, वायरल, ट्रेंडिंग, न्यूज और टेक्नोलॉजी समेत कई बीट्स पर डिजिटल कंटेंट तैयार किया. अपने अब तक के अनुभव में अज़हर डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स को समझने, SEO-फ्रेंडली कंटेंट तैयार करने और पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए उपयोगी व आकर्षक स्टोरीज लिख रहे हैं. अज़हर नईम का पत्रकारिता में अनुभव कुल अनुभव: 2 साल से ज्यादा योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: उन्होंने श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री हासिल की. पिछला अनुभव: अज़हर ने न्यूज 24 से पहले इंडिया न्यूज़, खबरफास्ट और इंडिया डॉट कॉम (Zee Media) में अपनी पत्रकारिता की समझ और अनुभव को और मजबूत किया. अपने प्रोफेशनल सफर में उन्होंने दिल्ली ब्लास्ट, जम्मू-कश्मीर ब्लास्ट, ईरान-अमेरिका युद्ध, रूस-यूक्रेन युद्ध और कई विधानसभा चुनावों के अलावा लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसे विविध विषयों पर कंटेंट तैयार किया है. विशेषज्ञता और फोकस अज़हर नईम को लाइफस्टाइल और हेल्थ का खासा अनुभव है, वह इन खबरों को आसान भाषा में समझाने में माहिर हैं और इन्हीं से जुड़ी स्टोरी पर लगातार काम कर रहे हैं. इसके अलावा उन्हें टिप्स और ट्रिक्स, स्किन केयर, हेयर केयर, किचन-गार्डनिंग और फैशन से जुड़ी खबरों में भी महारत हासिल है.

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