क्या आई-पिल का बार-बार इस्तेमाल सुरक्षित है? जानिए I-pill के क्या साइड इफेक्ट्स होते हैं

I Pill Side Effects: गर्भनिरोधक गोलियां या इमरजैंसी कोंट्रासेप्टिव पिल्स को अक्सर ही लड़कियां रोजाना, हर हफ्ते या हर महीने लेना शुरू कर देती हैं. लेकिन, इन पिल्स के शरीर पर एक नहीं बल्कि कई साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं.

I Pill side effects

क्या आईपिल पीरियड्स में देरी कर सकती है?

I Pill Effects: अनचाहे गर्भधारण यानी अनवॉन्टेड प्रेग्नेंसी से बचने के लिए लड़कियां आईपिल लेती हैं. आईपिल गर्भनिरोधक गोली होती है जिसे इमरजैंसी पिल या इमरजैंसी कोंट्रासेप्टिव पिल (Emergency Contraceptive Pills) भी कहते हैं. इसे अनप्रोटेक्टेड सेक्स करने के 72 घंटों के भीतर लिया जाता है. लेकिन, कई बार लड़कियां इसे रोज की आदत बना लेती हैं. वे महीने में एक या हफ्ते में एक आई पिल खाने लगती हैं. ये कोंट्रासेप्टिव पिल्स टॉफी नहीं है जिसे हर दूसरे दिन खाया जाए और इसीलिए डॉक्टर और एक्सपर्ट्स इन पिल्स के रेग्यूलर इस्तेमाल से मना करते हैं. यहां जानिए डॉक्टर का आयदिन आई पिल लेने की आदत पर क्या कहना है और आई पिल लेने पर शरीर पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है.

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आई पिल रोज लेनी चाहिए या नहीं

मूलचंद अस्पताल, दिल्ली की सीनियर गाइनाकोलॉजिस्ट डॉ. मीता वर्मा ने बताया कि इमरजैंसी कोंट्रासेप्टिव पिल्स या मॉर्निंग आफ्टर पिल्स (Morning After Pills) हार्मोन हैं जिन्हें अनप्रोटेक्टेड सेक्स के बाद लिया जाता है. इन पिल्स को आमतौर पर अनप्रोटेक्टेड सेक्स (Unprotected Sex) करने के 1 घंटे बाद और 72 घंटों से पहले लिया जाता है. इन पिल्स को 1-2 बार से ज्यादा कभी नहीं लेना चाहिए. इन पिल्स को अगर आयदिन लिया जाए तो पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं और भविष्य में गर्भधारण करने में दिक्कत आ सकती है. इन पिल्स का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल ओवुलेशन प्रोसेस पर असर डालता है जिससे अंडा बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है. पीरियड्स टाइम पर आना बंद हो जाते हैं और फेलोपियन ट्यूब अंडे को कैच नहीं कर पाती जिससे गर्भधारण करने (Pregnancy) में मुश्किल आने लगती है.

आई पिल लेने के साइड इफेक्ट्स क्या होते हैं

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  • आई पिल लेने के बाद ब्लीडिंग होने लगती है. यह ब्लीडिंग कई दिनों तक हो सकती है.
  • स्तन में दर्द होने लगता है, कमर दर्द होती है और ऐसा महसूस होता है जैसे पूरा बदन टूट रहा है.
  • शरीर में थकान महसूस होती है और चक्कर आ सकते हैं.
  • पेट में असहनीय दर्द महसूस होता है और उल्टी आने लगती है.
  • Ipill लेने के बाद कई महीनों तक पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं.
  • आगे चलकर गर्भधारण करने में दिक्कत आ सकती है.

आई पिल और रेग्यूलर बर्थ कंट्रोल पिल में क्या अंतर है

आई पिल (I Pill)रेग्यूलर गर्भनिरोधक गोलियां (Regular Birth Control)
आई पिल एक बैकअप की तरह है जिसे अनप्रोटेक्ट सेक्स के बाद इमरजैंसी में लिया जाता है. रोजाना अनप्रोटेक्टेड सेक्स किया जा रहा है तो रोजाना आई पिल नहीं ली जाती है.नियमित तौर पर ली जाने वाली गर्भनिरोधक गोलियां तय समय पर ली जाती हैं और गर्भधारण की संभावना को पहले ही रोक देती हैं.
आई पिल में हार्मोन की बहुत अधिक मात्रा होती है. इसकी एक गोली ही पूरे शरीर को हिला कर रख देती है जिससे अंडा ना निकले और गर्भधारण टल जाए.रेग्यूलर बर्थ कंट्रोल की गोली में हार्मोन की मात्रा कम होती है जो धीरे-धीरे शरीर में एक सुरक्षा चक्र बनाती है.
आई पिल खाने पर बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होती है, उल्टी होती है, थकान होती है और पीरियड्स में दिक्कत आती है. यह भविष्य में गर्भधारण को प्रभावित कर सकती है.रेग्यूलर पिल लेने पर हल्के साइड इफेक्ट्स दिखते हैं, जैसे मूड स्विंग्स होना या जी मितलाना और हल्की थकान.
आई पिल को महीने में एक बार से ज्यादा लेना हानिकारक हो सकता है.रेगुलर पिल को रोजाना लिया जा सकता है. लेकिन, इन पिल्स को शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना अनिवार्य होता है. खुद से रोजाना कोई भी दवा नहीं लेनी चाहिए.

अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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