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हेल्थ

आयुर्वेद और योग से नहीं पनपती बीमारियां, पतंजलि वेलनेस के अनुसार सही दिनचर्या से रोग रहते हैं दूर

Preventive Healthcare: योगिक जीवन रोगों को दूर रखने में असरदार होता है. बीमार होकर दवाएं लेने के बजाय आयुर्वेद में बीमारियों को पनपने से रोकने पर फोकस किया जाता है. यहां जानिए किस तरह आयुर्वेदिक टिप्स और योग रोगों को दूर रखने में मदद करते हैं.

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Written By: Seema Thakur Updated: Apr 4, 2026 15:33
Ayurveda and yoga
जानिए किस तरह आयुर्वेद और योग शरीर को रखते हैं रोगमुक्त.

Ayurveda And Yoga: बीमारियां पूछकर नहीं आतीं इसमें कोई दोराय नहीं है, लेकिन बीमारियां हो जाने के बाद दवाएं खाने के बजाय क्यों ना उन्हें होने से पहले ही रोक लिया जाए. पारंपरिक भारतीय प्रणालियों में खासकर आयुर्वेद और योग के माध्यम से बीमारियों को दूर रखने की कोशिश की जाती है. इसे निवारक स्वास्थ्य देखभाल कहते हैं. इसका मुख्य उद्देश्य है बीमारी को होने से रोकना. पतंजलि योगपीठ और बाबा रामदेव द्वारा प्रचारित पतंजलि वेलनेस मॉडल तैयार किया गया है जिसमें आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के तरीकों को आजमाकर शरीर का कायाकल्प किया जाता है और स्वस्थ जीवन की नींव रखी जाती है. यहां जानिए आयुर्वेद, योग और पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली के माध्यम से किस तरह रोगों को दूर रखा जाता है.

यह भी पढ़ें – योग, आयुर्वेद और नैचुरोपैथी से शरीर बनेगा निरोगी, बीमारियों को जड़ से खत्म करेंगे ये हॉलिस्टिक हीलिंग के तरीके

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बीमारियों को दूर रखने के लिए योग और प्राणायाम

बाबा रामदेव के अनुसार ज्यादातर रोगों को प्राणायाम के नियमित अभ्यास से ही रोका जा सकता है-

कपालभाति – रोजाना कपालभाति करने पर पेट के अंग सक्रिय होते हैं और वजन नियंत्रित होने लगता है.
भस्त्रिका – यह फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाने और ऑक्सीजन लेवल को सुधारने में मददगार है.
अनुलोम विलोम – मानसिक शांति और नसों की शुद्धि के लिए अनुलोम-विलोम किया जा सकता है.
भ्रामरी – तनाव, अनिद्रा और हाई ब्लड प्रेशर जैसी दिक्कतों से बचाव के लिए भ्रामरी करने की सलाह दी जाती है.
सूर्य नमस्कार – सूर्य नमस्कार करने पर पूरे शरीर का लचीलापन बढ़ता है. यह हार्मोनल संतुलन में भी मददगार होता है.

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आयुर्वेद के अनुसार ऐसी हो दिनचर्या

आयुर्वेद में ब्रह्म मुहूर्त में उठने की सलाह दी जाती है. कहते हैं इससे मानसिक स्पष्टता आती है और यह ऊर्जा के लिए सर्वोत्तम समय होता है. इसके बाद तांबे के बर्तन से पानी पीने के लिए कहा जाता है. नाक में तेल डालना कुल्ला करना श्वसन तंत्र के लिए फायदेमंद होता है. आयुर्वेद में शरीर की तेल से मालिश करने की सलाह दी जाती है. तेल मालिश से शरीर को मजबूती मिलती है.

आहार कैसा होना चाहिए

  • आयुर्वेद के अनुसार आहार में छह रस यानी मीठा, खट्टा, नमकीन, तीखा, कसैला और कड़वा संतुलित मात्रा में होना चाहिए.
  • खानपान में मौसम के अनुसार चीजों का होना जरूरी होता है. मौसमी फलों और सब्जियों को खासतौर से खानपान का हिस्सा बनाना चाहिए.
  • अपनी भूख का केवल 75 प्रतिशत ही खाना चाहिए जिससे पेट का बाकी हिस्सा हवा और पानी के लिए खाली रहे.
  • योगगुरु बाबा रामदेव खासतौर से लौकी का जूस पीने की सलाह देते हैं. लौकी शरीर को अंदर से साफ कर देती है.
  • विरुद्धाहार से परहेज करना चाहिए. दूध के साथ नमक और खट्टे फल नहीं खाने चाहिए.
  • आयुर्वेद में कच्चे फल और सब्जियों को खाने पर ज्यादा फोकस किया जाता है.

पंचकर्म और षट्कर्म

पंचकर्म और षटकर्म क्रियाओं से रोगों को जड़ से दूर किया जा सकता है. वहीं, ये रोग की उत्तपत्ति को रोकते हैं. वमन, विरेचन, बस्ती, नेति और कुंजल क्रिया आदि शरीर से अतिरिक्त पित्त और कफ को बाहर निकालने में, वात रोगों को दूर रखने में, साइनस और माइग्रेन को खत्म करने में और श्वसन संबंधी दिक्कतों के निवारण में कारगर होती हैं.

नैचुरोपैथी है असरदार

पतंजलि वेलनेस सेंटर्स में नैचुरोपैथी उपलब्ध कराई जाती है जिसमें धरती, जल, हवा, आकाश और अग्नि तत्व से रोगों का इलाज किया जाता है. मिट्टी चिकित्सा, जल चिकित्सा और एक्यूप्रेशर आदि शरीर को रोगमुक्त बनाने में मदद करते हैं.

यह भी पढ़ें- बीमारियों को दूर रखने के लिए रोजाना कौन से योग करने चाहिए? बाबा रामदेव ने बताए इन योगासन के फायदे

First published on: Apr 04, 2026 03:33 PM

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