ब्रेस्टफीडिंग में आ रही हैं दिक्कतें? ऑब्सटेट्रिक्स की सही गाइडेंस से मिलेगा दर्द से निजात
Breastfeeding For Baby: ब्रेस्टफीडिंग के अनेक फायदे हैं, लेकिन इसे कभी भी शर्मिंदा होने का आधार नहीं बनाना चाहिए. ब्रेस्टफीडिंग सिर्फ दूध पिलाने का एक तरीका नहीं, बल्कि हेल्दी रहना का भी तरीका है.
Edited By : Shadma Muskan|Updated: Jun 14, 2026 14:29
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ब्रेस्टफीडिंग क्यों है जरूरी? Image Credit- News24
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Problems of Breastfeeding: मां बनने के बाद ब्रेस्ट फीडिंग का एहसास अलग ही होता है. हालांकि, यह एक तरह का नेचुरल प्रोसेस हैं, लेकिन हर मां के लिए इसकी शुरुआत आसान नहीं होती. कई महिलाओं को लगता है कि बच्चे के जन्म के साथ ही ब्रेस्ट फीडिंग शुरू हो जाएगी, जबकि ऐसा नहीं होता. डॉक्टर पंखुरी गौतम (ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, कोकून हॉस्पिटल) का कहना है कि कई बार ब्रेस्टफीडिंग के दौरान दर्द, बच्चे का सही तरह से दूध न पीना, दूध कम होने की चिंता, थकान, स्ट्रेस और स्ट्रेस जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. यह समझना जरूरी है कि ब्रेस्ट फीडिंग हर मां और हर बच्चा अलग होता है.
मां का दूध बच्चे के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. यह बच्चे को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने का काम करता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ की सलाह है कि जन्म के पहले घंटे के भीतर ब्रेस्टफीडिंग शुरू करना ही बेहतर है. पहले छह महीनों तक सिर्फ मां का दूध दिया जाए तो बच्चा हेल्दी रहता है. जन्म के बाद निकलने वाला पहला गाढ़ा पीला दूध, जिसे कोलोस्ट्रम कहा जाता है.
कई महिलाओं को झेलनी पड़ती हैं परेशानियां
ब्रेस्टफीडिंग को लेकर जागरूकता बढ़ी है, लेकिन फिर भी कई महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है. इस दौरान, कुछ महिलाओं के स्तनों में दर्द, सूजन, दूध बनने में देरी, बच्चे का सही ढंग से ब्रेस्टफीडिंग न कर पाना, सिजेरियन डिलीवरी के बाद रिकवरी और नींद की कमी जैसी परेशानियां झेलनी पड़ती हैं.
सही नॉलेज होना है जरूरी
ब्रेस्टफीडिंग के दौरान सही लैक्टेशन काउंसलिंग से बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग कराने की सही लैच, दूध पिलाने और स्तनों में होने वाले दर्द जैसी बातों को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है. डॉक्टर, नर्स, लैक्टेशन कंसल्टेंट और परिवार के सदस्य मिलकर ब्रेस्टफीडिंग के इस सफर को अच्छा बना सकते हैं.
ब्रेस्टफीडिंग के फायदे
इम्यूनिटी मजबूत होना
मोटापा कम होना
टाइप-2 डायबिटीज का खतरा होना
ब्रेस्टफीडिंग के अनेक फायदे हैं, लेकिन इसे कभी भी शर्मिंदा होने का आधार नहीं बनाना चाहिए. ब्रेस्टफीडिंग सिर्फ दूध पिलाने का एक तरीका नहीं, बल्कि देखभाल, अपनापन का माध्यम भी है.
Problems of Breastfeeding: मां बनने के बाद ब्रेस्ट फीडिंग का एहसास अलग ही होता है. हालांकि, यह एक तरह का नेचुरल प्रोसेस हैं, लेकिन हर मां के लिए इसकी शुरुआत आसान नहीं होती. कई महिलाओं को लगता है कि बच्चे के जन्म के साथ ही ब्रेस्ट फीडिंग शुरू हो जाएगी, जबकि ऐसा नहीं होता. डॉक्टर पंखुरी गौतम (ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, कोकून हॉस्पिटल) का कहना है कि कई बार ब्रेस्टफीडिंग के दौरान दर्द, बच्चे का सही तरह से दूध न पीना, दूध कम होने की चिंता, थकान, स्ट्रेस और स्ट्रेस जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. यह समझना जरूरी है कि ब्रेस्ट फीडिंग हर मां और हर बच्चा अलग होता है.
मां का दूध बच्चे के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. यह बच्चे को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने का काम करता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ की सलाह है कि जन्म के पहले घंटे के भीतर ब्रेस्टफीडिंग शुरू करना ही बेहतर है. पहले छह महीनों तक सिर्फ मां का दूध दिया जाए तो बच्चा हेल्दी रहता है. जन्म के बाद निकलने वाला पहला गाढ़ा पीला दूध, जिसे कोलोस्ट्रम कहा जाता है.
कई महिलाओं को झेलनी पड़ती हैं परेशानियां
ब्रेस्टफीडिंग को लेकर जागरूकता बढ़ी है, लेकिन फिर भी कई महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है. इस दौरान, कुछ महिलाओं के स्तनों में दर्द, सूजन, दूध बनने में देरी, बच्चे का सही ढंग से ब्रेस्टफीडिंग न कर पाना, सिजेरियन डिलीवरी के बाद रिकवरी और नींद की कमी जैसी परेशानियां झेलनी पड़ती हैं.
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सही नॉलेज होना है जरूरी
ब्रेस्टफीडिंग के दौरान सही लैक्टेशन काउंसलिंग से बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग कराने की सही लैच, दूध पिलाने और स्तनों में होने वाले दर्द जैसी बातों को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है. डॉक्टर, नर्स, लैक्टेशन कंसल्टेंट और परिवार के सदस्य मिलकर ब्रेस्टफीडिंग के इस सफर को अच्छा बना सकते हैं.
ब्रेस्टफीडिंग के फायदे
इम्यूनिटी मजबूत होना
मोटापा कम होना
टाइप-2 डायबिटीज का खतरा होना
ब्रेस्टफीडिंग के अनेक फायदे हैं, लेकिन इसे कभी भी शर्मिंदा होने का आधार नहीं बनाना चाहिए. ब्रेस्टफीडिंग सिर्फ दूध पिलाने का एक तरीका नहीं, बल्कि देखभाल, अपनापन का माध्यम भी है.