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सुबह 4 बजे से शुरू होती है दिनचर्या! पतंजलि गुरुकुल के छात्रों के शेड्यूल में छिपा है सफलता का राज

Patanjali Gurukul Dincharya: पतंजलि गुरुकुल का दिनचर्या बहुत ही खास माना जाता है. यही वो सेतु है जो छात्रों को मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक विकास करने काम करता है. उनकी दिनचर्या में ऐसा क्या खास है जो सबको अपनी ओर आकर्षित करने का काम करता है. आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं.

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Patanjali Gurukul Dincharya In Hindi: बच्चे देर रात तक मोबाइल और टीवी में व्यस्त रहते हैं. वहीं पतंजलि के छात्र एक बिल्कुल अलग और अनुशासित जीवन जीते हैं. यहां की दिनचर्या ना सिर्फ पढ़ाई पर फोकस करती है, बल्कि शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास पर भी बराबर ध्यान दिया जाता है. वैसे भी स्मार्टफोन और टेक्नोलॉजी के जमाने में बच्चों का विकास यानी शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास बहुत ही मुश्किल हो गया है. ऐसे में बच्चों के शारीरिक विकास के लिए पतंजलि गुरुकुलम बेस्ट है. आप यहां पर अपने बच्चों का एडमिशन करवा सकते हैं और इसका प्रोसेस बहुत ही आसान है, जिसे करने के लिए आपको ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. हालांकि, एडिशन करवाने से पहले आपको यहां के दिनचर्या के बारे में विस्तार से जानते हैं कि पतंजलि गुरुकुल में किस तरह का दिनचर्या अपनाया जाता है.

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क्या है खास इन संस्थानों में क्या है खास?

आचार्यकुलम और पतंजलि गुरुकुल में पढ़ाई का तरीका पारंपरिक और आधुनिक शिक्षा का मिश्रण है. यहां बच्चों को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखा जाता, बल्कि उन्हें जीवन जीने का सही तरीका भी सिखाया जाता है. इन संस्थानों में संस्कृत, वेद, योग और भारतीय संस्कृति के साथ-साथ गणित, विज्ञान और तकनीक भी पढ़ाई जाती है.

पतंजलि गुरुकुल के छात्रों के शेड्यूल

ब्रह्म मुहूर्त में जागने से शुरू होता है दिन

गुरुकुल में छात्रों का दिन सुबह 4 बजे ब्रह्म मुहूर्त में शुरू होता है. आयुर्वेद के अनुसार यह समय पढ़ाई और ध्यान के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. इस समय उठने से दिमाग फ्रेश रहता है और एकाग्रता बढ़ती है.

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योग और प्राणायाम से बच्चों को करते हैं तैयार

सुबह उठने के बाद छात्र योग और प्राणायाम करते हैं, जिससे शरीर फिट रहता है और मन शांत होता है. नियमित योग से उनकी इम्यूनिटी भी मजबूत होती है.

पढ़ाई और स्वाध्याय से करते हैं दिमाग तेज

योग के बाद छात्र पढ़ाई में जुट जाते हैं. इस समय पढ़ाई करने से चीजें जल्दी समझ में आती हैं और याददाश्त भी बेहतर होती है.

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गुरुकुल में मिलता है सात्विक नाश्ता

गुरुकुल में छात्रों को हेल्दी और सात्विक भोजन दिया जाता है. इसमें दूध, फल और पौष्टिक आहार शामिल होता है, जिससे दिनभर एनर्जी बनी रहती है.

नियमित कक्षाएं लेने का वक्त

इसके बाद छात्र अपनी नियमित क्लासेस अटेंड करते हैं. यहां आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ संस्कृत, वेद और भारतीय संस्कृति की भी पढ़ाई कराई जाती है.

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सेवा और अनुशासन का संबोधन

गुरुकुल में छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सेवा भी करवाई जाती है, जैसे सफाई, बागवानी आदि। इससे उनमें जिम्मेदारी और अनुशासन की भावना विकसित होती है.

विश्राम देना भी है जरूरी

थोड़ा समय आराम के लिए किया जाता है, ताकि शरीर और दिमाग फिर से एक्टिव हो सके. इसके बाद अध्ययन और खेल का वक्त लेते हैं.

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शारीरिक और मानसिक विकास से होती है शाम

शाम को छात्र दोबारा पढ़ाई करते हैं और साथ ही खेलकूद में भी भाग लेते हैं. इससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास संतुलित रहता है.

संध्या वंदन और ध्यान से करते हैं मन शांत

शाम के समय ध्यान और प्रार्थना करवाई जाती है, जिससे मन में शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. यह तमाम चीजें एक्सपर्ट के द्वारा की जाती है.

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रात का खाना होता है बहुत हल्का

रात में हल्का और हेल्दी भोजन दिया जाता है, जिससे पाचन सही रहता है. इसके बाद बच्चों को सुला दिया जाता है. इन तमाम चीजों की बच्चों को आदत डाली जाती है, ताकि वे अगले दिन फिर से ऊर्जा के साथ उठ सकें.

यहां एडमिशन कैसे होता मिलता है?

यहां एडमिशन का तरीका थोड़ा अलग है, जहां आम मॉडर्न स्कूलों में नर्सरी से एडमिशन शुरू हो जाते हैं, यहां 5वीं से 12वीं तक की पढ़ाई होती है. आचार्यकुलम में प्रवेश के लिए पूरे भारत में परीक्षा आयोजन होती है, जो आमतौर पर दिसंबर-जनवरी में आयोजित होती है, जिसमें सामान्य ज्ञान, अंग्रेजी, रीजनिंग और करेंट अफेयर्स से संबंधित सवाल पूछे जाते हैं, पासिंग मार्क्स पाने के बाद ही तय सीटों पर दाखिला होता है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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First published on: Apr 03, 2026 03:33 PM

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About the Author

Shadma Muskan

शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर (Senior Sub Editor) हैं. दिल्ली की रहने वाली शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर डिग्री हासिल की है. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. शादमा मुस्कान का कुल अनुभव  कुल अनुभव - 5 साल डिग्री- शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से बीजेएमसी (BJMC) और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय हिसार से एमजेएमसी (MJMC) की पढ़ाई भी की है. पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की। इसके बाद हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया के हरजिंदगी में अपनी पत्रकारिता की समझ और अनुभव को और मजबूत किया. तहजीब टीवी में भी उन्होंने काम किया. इस दौरान उन्होंने ब्रेकिंग न्यूज, सोशल मीडिया से लेकर न्यूज रूम की बेसिक समझ हासिल की. अब ज्यादा फोकस हेल्थ और लाइफस्टाइल की बीट पर है. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर गाइड के विषय में भी विशेषज्ञों से बातचीत के साथ विस्तृत लेखन में महारत हासिल है.

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