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क्या नॉन शुगर स्वीटनर्स से डायबिटीज का खतरा कम होता है? जानिए WHO की गाइडलाइंस क्या कहती हैं

Diabetes Risk: विश्व स्वास्थ्य संगठन से जानिए नॉन शुगर स्वीटनर्स से डायबिटीज का खतरा कम होता है या नहीं. WHO ने नॉन शुगर स्वीटनर्स के सेवन से जुड़ी गाइडलाइंस जारी की हैं.

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Non Sugar Sweeteners And Diabetes: खानपान में चीनी को कम करने के लिए लेकिन फिर भी मीठा खाने की तलब के चलते नॉन शुगर स्वीटनर्स जैसे नेचुरल स्वीटनर्स और आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन, क्या सचमुच ये स्वीटनर्स हेल्दी होते हैं और क्या इनसे डायबिटीज का खतरा कम होता है? इसका जवाब दे रहा है विश्व स्वास्थ्य संगंठन (WHO). WHO से जानिए नॉन शुगर स्वीटनर्स का वेट कंट्रोल करने से लेकर डायबिटीज तक पर क्या असर होता है.

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नॉन शुगर स्वीटनर्स और डायबिटीज

WHO का कहना है कि नॉन शुगर स्वीटनर्स (NSS) टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes) के खतरे को बढ़ा सकते हैं. डायबिटीज के मरीजों के लिए WHO की सलाह है कि वे डायबिटीज को बिना नॉन शुगर स्वीटनर्स का सेवन किए ही मैनेज कर सकते हैं.

नॉन शुगर स्वीटनर्स के बारे में क्या कहता है WHO

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  • नॉन शुगर स्वीटनर्स लॉन्ग-टर्म वेट कंट्रोल में मदद नहीं करता है.
  • आप नॉन-शुगर स्वीटनर्स का सेवन किए बिना ही खानपान से मिठास को कम करके भी शुगर का सेवन कंट्रोल कर सकते हैं
  • नेचुरल शुगर स्वीटनर्स आर्टिफिशियल शुगर स्वीटनर्स से बेहतर नहीं होते हैं.

डाइट में कितनी होनी चाहिए शुगर

खानपान में कितनी शुगर लें और शुगर के सेवन में किन बातों का ध्यान रखें इसपर डबल्यूएचओ ने विशेष गाइडलाइंस जारी की हैं –

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  • फ्री शुगर्स का सेवन रोज के डेली एनर्जी इंटेक का 10 प्रतिशत ही होना चाहिए जोकि 50 ग्राम के करीब है. अगर शुगर को डाइट में 5% तक ही रखा जाए तो इससे सेहत को एक्स्ट्रा फायदे मिलते हैं.
  • फ्री शुगर के सेवन से खासतौर से परहेज करना चाहिए. फ्री शुगर यानी सुक्रोज, फ्रुक्टोज और ग्लूकोज. इन्हें खाना या ड्रिंक्स बनाते हुए डाला जाता है. शहद, शुगर सिरप, फलों के जूस और फलों के जूस के कॉन्सन्ट्रेट्स में शुगर नेचुरली होती है.
  • अगर फ्री शुगर के सेवन से बचना है तो नॉन शुगर का सेवन किए बिना इसे अपनी डाइट से हटाएं.

ज्यादा शुगर खाने से क्या होता है

अगर खानपान में जरूरत से ज्यादा शुगर शामिल की जाए तो इससे लॉन्ग टर्म हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं, जैसे वजन बढ़ना, टाइप 2 डायबिटीज और दिल की बीमारियां. इससे एनर्जी स्पाइक और एनर्जी क्रैश हो सकता है. ब्लड शुगर बढ़ना और एकदम से गिर जाना समस्या का सबब बन जाता है. डाइजेस्टिव सिस्टम पर भी इसका बुरा असर दिखता है और ज्यादा स्किन ब्रेकआउट्स हो सकते हैं.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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Source - WHO 

First published on: Sep 11, 2026 03:13 PM

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About the Author

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा को अपनी परफॉर्मेंस और सबसे ज्यादा नंबर जनरेटिंग स्टोरी के लिए वेल डन कार्ड्स मिल चुके हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. अपनी फिक्शन स्टोरी के लिए सीमा को 2 बार बेस्ट स्टोरी इन फिक्शन का अवॉर्ड मिला है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. इसी चलते सीमा को NDTV से रिवॉर्ड एंड रेकेग्निशन (एम्पलॉई ऑफ द मंथ) मिला है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. अपने कॉलेज के दिनों में सीमा कई सोसाइटीज से जुड़ी रही हैं और लिटररी सोसाइटी में प्रेसिडेंट की भूमिका निभा चुकी हैं. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं. सीमा वर्क और पर्सनल लाइफ बैलेंस पर विश्वास करती हैं. जब वे काम नहीं कर रही होती हैं तो किताबें पढ़ना पसंद करती हैं या गाने सुन रही होती हैं. अपने बुकशेल्फ को फ्लॉन्ट करना और अपनी प्लेलिस्ट के लिए तारीफ सुनना सीमा को अच्छा लगता है. सीमा ट्रेवलिंग, फैमिली मूवी टाइम, अच्छी किताबें पढ़ना, कथक करना (जोकि वे सीख रही हैं) और अपने दोस्तों से घंटों लंबी बातें करना टॉप टियर एक्सपीरियंस मानती हैं. अनुभव - 7 साल शिक्षा - जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा पिछला अनुभव - NDTV, दिल्ली प्रेस, डायमंड पब्लिशिंग हाउस

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