क्या स्मोक करने वालों के मसूड़े हो जाते हैं खराब? जानिए स्मोकिंग Gum Disease का कारण बनती है या नहीं

Gum Disease Causes: सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन, यूएस ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि किस तरह धूम्रपान मसूड़ों को प्रभावित करता है. मसूड़ों में होने वाली दिक्कतें क्या हैं और कैसे इनसे बचा जा सकता है, जानिए यहां.

gum disease and smoking

धूम्रपान मसूड़ों को कैसे करता है प्रभावित, जानिए यहां. AI Generated Image

Gum Disease And Smoking: मसूड़ों की बीमारी जिसे गम डिजीज कहते हैं, मसूड़ों का इंफेक्शन है जो दांतों को सपोर्ट करने वाली हड्डियों को भी प्रभावित करता है. कई मामलों में गम डिजीज के कारण व्यक्ति के दांत टूटने की भी नौबत आ सकती है. मसूड़ों की दिक्कतें दांतों पर बैक्टीरिया के जमने से शरू होती हैं. इसमें कीटाणु दांतों पर लंबे समय तक रहते हैं जिससे दांतों पर प्लाक और टार्टर जमने लगता है और मसूड़े खराब होने लगते हैं. जब मसूड़ों की दिक्कत बढ़ने लगती है तो दांतों के टूटने और ढीले पड़ने जैसी स्थिति भी आने लगती है. लेकिन, मसूड़ों की ये दिक्कतें स्मोकिंग से भी प्रभावित होती हैं. सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC), यूएस की रिपोर्ट में स्मोकिंग के मसूड़ों पर होने वाले असल के बारे में बताया गया है.

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मसूड़ों की दिक्कतों के क्या लक्षण होते हैं

  • मसूड़े लाल या सूजे हुए नजर आने लगते हैं
  • मसूड़ों से खून निकलता है
  • मसूड़ों कमजोर पड़ने लगते हैं
  • दांत ढीले होने लगते हैं
  • दांत सेंसिटिव हो जाते हैं
  • मसूड़े दांतों से अलग दिखने लगते हैं.

स्मोकिंग से मसूड़े कैसे होते हैं प्रभावित

धूम्रपान करने पर शरीर के इंफ्केशन से लड़ने की क्षमता यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है. इससे मसूड़ों में इंफेक्शन हो जाए तो शरीर इस इंफेक्शन से नहीं लड़ पाता है. अगर पहले से मसूड़े डैमेज हो गए हैं तो धूम्रपान मसूड़ों को ठीक होने में मुश्किल पैदा करने लगता है. जो लोग धूम्रपान करते हैं उनमें मसूड़ों की दिक्कतें धूम्रपान ना करने वालों से ज्यादा देखी जाती हैं. व्यक्ति जितना स्मोकिंग करता है उतना ही उसे गम डिजीज होने का खतरा रहता है. वहीं, जो लगो सिगरेट पीते हैं या किसी भी तरह से तंबाकू का सेवन करते हैं उनमें मसूड़ों की दिक्कतें होने का खतरा तो ज्यादा होता ही है, साथ ही मसूड़ों के ट्रीटमेंट ज्यादा काम नहीं करते हैं.

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मसूड़ों की दिक्कतों से कैसे बचें

अपने दांतों को दिन में 2 बार ब्रश करें, कोशिश करें कि आप स्मोकिंग ना करें, जमे हुए प्लाक को साफ करने के लिए फ्लॉस करें और डेंटिस्ट से रेग्यूलर चेकअप करवाएं.

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मसूड़ों की दिक्कत के इलाज की बात की जाए तो गम लाइन के नीचे डीप क्लीनिंग करवाई जा सकती है. डॉक्टर माउथ रिंस या दवा दे सकते हैं. जरूरत पड़ने पर मसूडों में जमे टार्टर को हटाने के लिए सर्जरी करवाई जा सकती है. कई बार मसूड़ों के जिस हिस्से से दांत का हिस्सा हट जाता है वहां फिलिंग करवाई जाती है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

Source - CDC 

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लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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