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हेल्थ

बच्चों पर 5 गुना ज्यादा खतरनाक माना जा रहा नया कोविड वेरिएंट ‘BA.3.2’! जानिए लक्षण और बचाव के तरीके

Cicada COVID Variant BA.3.2: दुनियारभर में कोरोना के नए वेरिएंट की चर्चा बहुत तेज हो गई है, जिसे लेकर हर कोई परेशान और डरा हुआ है. ऐसे में कुछ रिपोर्ट्स बता रहे हैं कि यह वायरस बच्चों पर ज्यादा खतरनाक हो सकता है. आइए जानते हैं कैसे दिखते हैं इसके लक्षण और कैसे करें इससे बचाव?

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Written By: Azhar Naim Updated: Apr 6, 2026 18:53
Cicada Covid Variant BA.3.2
कोरोना का नया वेरिएंट बच्चों को कैसे बना रहा अपना शिकार? (Image: AI)

कोविड-19 के मामलों में कमी के बाद लोग राहत महसूस कर रहे थे, लेकिन अब BA.3.2 नाम का नया सब-वेरिएंट, जिसे ‘सिकाडा वेरिएंट’ (Cicada Variant) भी कहा जा रहा है, चर्चा में है. दक्षिण अफ्रीका से शुरू हुआ यह नया वेरिएंट अब 23 से ज्यादा देशों में दस्तक दे चुका है. रिपोर्ट्स के अनुसार यह वेरिएंट खासतौर पर बच्चों को ज्यादा प्रभावित कर सकता है. स्वास्थ्य एजेंसियां भले इसे अभी बड़ी आपात स्थिति नहीं मान रही हैं, फिर भी विशेषज्ञ सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं. यह वेरिएंट कई म्यूटेशन के कारण पहले बनी इम्युनिटी को आंशिक रूप से कमजोर कर सकता है, इसलिए सावधानी रखना जरूरी माना जा रहा है. आइए जानते हैं बच्चों के लिए कितना खतरनाक हो सकता है ये वेरिएंट और कैसे करें इससे बचाव.

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आखिर बच्चों के लिए क्यों बढ़ा है सिकाडा वेरिएंट का जोखिम?

वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि सिकाडा वेरिएंट वयस्कों की तुलना में बच्चों को 5 गुना तेजी से संक्रमित कर सकता है. इसके पीछे मुख्य कारण बच्चों का अभी पूरी तरह विकसित न हुआ ‘इम्यून सिस्टम’ (रोग प्रतिरोधक क्षमता) है. बच्चे अक्सर बाहर खेलते हैं, स्कूलों में साथ बैठते हैं और साफ-सफाई के तरफ उतना ध्यान नहीं रख पाते हैं, जिससे वायरस को फैलने का मौका मिलता है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चौंकाने वाली बात यह है कि भारत में 25 करोड़ से ज्यादा बच्चों की आबादी में से एक बड़ा हिस्सा अभी भी ‘प्रिकॉशन डोज’ (बूस्टर) से दूर है. ऐसे में उनकी सुरक्षा के लिए जागरूक होना और टीकाकरण को अपडेट रखना अब विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन गया है.

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

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सिकाडा वेरिएंट के लक्षण दिखने में सामान्य फ्लू जैसे लग सकते हैं, लेकिन इन्हें हल्के में लेना जोखिम भरा हो सकता है. अगर आपके बच्चे में नीचे दिए गए बदलाव दिखें, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं;

  • लगातार सूखी खांसी और गले में खराश होना.
  • तेज बुखार के साथ शरीर में भारी थकान और कमजोरी महसूस होना.
  • सांस लेने में हल्की तकलीफ या छाती में भारीपन का अहसास.
  • स्वाद और गंध पहचानने की क्षमता में अचानक कमी आना.
  • बच्चों में पेट दर्द, उल्टी या जी मिचलाने जैसी समस्याएं दिखना.
  • नाक बंद होना या बहुत ज्यादा छींकें आना, जो सामान्य दवाओं से ठीक न हो रही हों.

बच्चों को ऐसे बचाएं नए कोरोना वायरस से

बचाव हमेशा इलाज से बेहतर होता है, अगर माता-पिता सही वक्त पर जागरूक होकर कुछ कदम उठाए, तो बच्चे की सुरक्षा हो सकती है.

मास्किंग की आदत: भीड़भाड़ वाली बंद जगहों और स्कूलों में बच्चों को मास्क पहनने के लिए आदत डलवाएं. यह न सिर्फ कोरोना बल्कि अन्य संक्रमणों को भी रोकता है.

टीकाकरण और बूस्टर: अगर आपके बच्चे का कोई सा बूस्टर डोज छूट गया है, तो स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह पर इसे तुरंत लगवाएं. यह गंभीर बीमारी के खतरे को काफी कम कर देता है.

हाथों की सफाई: बच्चों को बार-बार साबुन से हाथ धोने और बिना धोए चेहरे या नाक को न छूने की शिक्षा दें.

वेंटिलेशन और सफाई: कमरों में ताजी हवा का प्रवाह सुनिश्चित करें और घर की उन सतहों को नियमित साफ करें जिन्हें बच्चे बार-बार छूते हैं.

वेरिएंट की स्थिति और स्वास्थ्य एजेंसियों की सलाह

रिपोर्ट्स के अनुसार यह सब-वेरिएंट कई देशों में पाया गया है और कुछ जगहों पर निगरानी के दौरान इसके संकेत मिले हैं. हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अभी इसे गंभीर खतरा घोषित नहीं किया है. फिर भी डॉक्टरों का कहना है कि टीकाकरण अपडेट रखना, बच्चों की इम्युनिटी मजबूत करना और सामान्य कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना समझदारी भरा कदम है. जागरूकता और समय पर सावधानी से जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

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First published on: Apr 06, 2026 06:53 PM

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