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क्या वायु प्रदूषण आपके दिमाग को प्रभावित कर सकता है? फोर्टिस अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट Dr. Vinit Banga ने किया एक्सप्लेन

Delhi-NCR AQI: वायु प्रदूषण से फेफड़े प्रभावित होते हैं ये तो सभी जानते हैं, लेकिन क्या वायु प्रदूषण दिमाग की दिक्कतों की भी वजह बन सकता है? इस बारे में बता रहे हैं फॉर्टिस अस्पताल के डायरेक्टर ऑफ न्यूरोलॉजी डॉ. विनित बंगा.

Author Written By: Seema Thakur Updated: Nov 21, 2025 13:31
Air Pollution Brain Damage
वायु प्रदूषण का दिमाग पर क्या असर होता है, यहां जानिए.

Air Pollution Effects On Brain: दिल्ली-एनसीआर जहरीली हवा का चेंबर बन चुका है. आयदिन दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (Delhi AQI) 400 के पार होता है. यह जहरीली हवा आंखों में जलन, खांसी, सांस लेने में दिक्कत और स्किन एलर्जी जैसी आम दिक्कतों की वजह तो बनती ही है साथ ही इससे फेफड़ों और श्वसन तंत्र से जुड़ी गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं. लेकिन, क्या आप जानते हैं वायु प्रदूषण आपके दिमाग को भी नुकसान पहुंचा रहा है? फोर्टिस अस्पताल (Fortis Hospital) के डायरेक्टर ऑफ न्यूरोलॉजी डॉ. विनित बंगा ने बताया कि वायु प्रदूषण किस तरह दिमागी सेहत को प्रभावित करता है और ब्रेन को इससे कौन-कौन से नुकसान (Brain Damage) हो सकते हैं. आइए न्यूरोलॉजिस्ट से ही जानते हैं कि वायु प्रदूषण किन-किन दिमागी बीमारियों की वजह बन सकता है.

वायु प्रदूषण का दिमाग पर प्रभाव | Air Pollution Effects On Brain

डॉ. विनित बंगा ने बताया कि दिल्ली की जहरीली हवा ना सिर्फ शारीरिक रूप से खतरनाक है बल्कि इसके नुकसान मानसिक तौर पर नजर आने लगते हैं. डॉक्टर ने बताया कि वायु प्रदूषण के लगातार संपर्क में आने से ब्रेन डैमेज का खतरा बढ़ता है. इसके साथ ही स्ट्रोक (Stroke) आने की संभावना बढ़ती है सो अलग. हवा में मौजूद PM2.5 के कण और टॉक्सिक कण जैसे नाइट्रोजन ऑक्साइड और कार्बन मोनोक्साइज फेफड़ों और सर्कुलेटरी सिस्टम में फैल जाते हैं जिससे सिस्टमेटिक डैमेज होने लगता है. ये सारे तत्व क्रोनिक इंफ्लेमेशन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और वैस्कुलर चेंजेस की वजह बनते हैं और इनका प्रभाव दिमाग की सेहत पर पड़ता है.

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हो सकता है डिमेंशिया

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लंबे समय तक वायु प्रदूषण से प्रभावित हुआ जाए तो इससे कोग्निटिव डिक्लाइन होने लगता है और न्यूरोजनरेटिव बीमारियों जैसे डिमेंशिया का खतरा बढ़ता है. डॉ. बंगा ने बताया कि जहरीली हवा में मौजूद सूक्ष्म कण ब्लड ब्रेन बैरियर को क्रॉस करके न्यूरोइंफ्लेमेशन की वजह बनते हैं और ब्रेन सेल्स को नुकसान पहुंचाते हैं.

याद्दाश्त खोने से लेकर स्ट्रोक तक का खतरा

ब्रेन में इंफ्लेमेशन होने के कारण याद्दाश्त (Memory) प्रभावित हो सकती है. इससे याद्दाश्त कम हो सकती है, सीखने की क्षमता पर प्रभाव पड़ता है और इमोशंस का रेग्यूलेशन प्रभावित हो सकता है. प्रदूषण स्ट्रोक की संभावना को बढ़ाता है, रक्त धमनियों में प्लाक के जमने से दिमाग तक ब्लड फ्लो सही तरह से नहीं हो पाता है जिससे इस्केमिक और हेमोरेजिक स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है.

ऐसे में इस जहरीली हवा से खुद को बचाए रखना जरूरी है. खासतौर से बाहर निकलें तो मुंह और नाक को मास्क से अच्छी तरह से ढककर रहें और हो सके तो कम से कम आउटडोर प्लान बनाएं.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

First published on: Nov 21, 2025 01:31 PM

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