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Budget 2025: क्या जंक फूड पर भी बढ़ेगा टैक्स? सेहत पर हुए सर्वे का क्या है मतलब

Budget 2025: देश में तेजी से बढ़ रहे जंक फूड ईटिंग हैबिट्स को लेकर हुए सर्वे में FSSAI ने देश के लोगों की सेहत के प्रति एक सुझाव प्रस्तुत किया है। आइए जानते हैं।

Budget 2025: आज यानी 1 फरवरी को साल 2025 का बजट पेश किया जाएगा। इस पर आम जनता की भी नजर रहेगी क्योंकि सबसे ज्यादा असर बजट का उन पर ही होगा। शुक्रवार को हुए इकॉनमिक सर्वे में मेंटल और फिजिकल हेल्थ पर कई पहलुओं को उठाया गया है। इसमें पाया गया कि लोगों की खराब लाइफस्टाइल के चलते सेहत और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर गहरा असर पड़ रहा है। बजट से पहले कई कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार आम नागरिकों की सेहत के बारे में गंभीर कदम उठा सकती है। एक सबसे अहम सवाल है कि क्या जंक फूड पर टैक्स बढ़ेगा या इस पर कोई अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा या नहीं?

क्या बढ़ेगा टैक्स?

दरअसल, सरकार का ध्यान जंक फूड की बढ़ती खपत और इसका हमारी सेहत पर पड़ने वाले प्रभावों पर है। खासतौर पर अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन करने से हेल्थ पर ज्यादा असर पड़ रहा है, जो गंभीर है। इन फूड्स के सेवन से मोटापा, डायबिटीज और हृदय संबंधी रोगों की समस्या बढ़ रही हैं। ऐसे में कई हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि खाद्य पदार्थों पर अधिक टैक्स लगाने से लोगों को उनकी खपत को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

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सर्वे में क्या पाया गया?

शुक्रवार को संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 में सरकार ने WHO की साल 2023 की एक रिपोर्ट पेश की है, जिसमें भारत में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स की खपत साल 2006 में 900 मिलियन अमरीकी डॉलर (78,02,76,15,000) से बढ़कर 2019 में 37.9 बिलियन अमरीकी डॉलर हो गई है, जो कि 33 % से अधिक की चौंका देने वाली वार्षिक वृद्धि दर को दर्शाता है। सर्वे में बताया गया है कि UPF यानी अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स पर एक्सट्रा टैक्स को हम हेल्थ टैक्स भी मान सकते हैं। यह टैक्स बड़े ब्रान्ड वाली कंपनियों पर होगा। हालांकि, सर्वे में जिस रिपोर्ट का हवाला दिया गया है, उसमें इस उपाय का कोई फायदा नहीं पाया गया है।

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Junk Food Side Effects

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क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट?

सर गंगा राम अस्पताल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंटऔर उपाध्यक्ष डॉ. पीयूष रंजन ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया है कि ये फूड्स जीरो न्यूट्रिशन वाले फूड्स हैं। इनका अधिक सेवन युवाओं और बच्चों के बीच है। इसलिए, इसकी खपत को नियंत्रित करने के लिए यह सुझाव मददगार साबित हो सकता है। अन्य हेल्थ एक्सपर्ट, एम्स-दिल्ली के मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजेश सागर कहते हैं कि इन मुद्दों को उजागर करना जरूरी है क्योंकि यह लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर रहा है, इससे होने वाले नुकसानों पर भी गौर किया जाना चाहिए।

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Disclaimer: ऊपर दी गई जानकारी पर अमल करने से पहले विशेषज्ञों से राय अवश्य लें। News24 की ओर से जानकारी का दावा नहीं किया जा रहा है।

 

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First published on: Feb 01, 2025 09:24 AM

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About the Author

Namrata Mohanty

नम्रता मोहंती (Namrata Mohanty) न्यूज24 में एक सक्रिय कंटेंट राइटर है. मैंने अपनी पत्रकारिता की शुरुआत जी न्यूज और एबीपी जैसे संस्थानों से इंटर्नशिप करते हुए की थी. आज मैं न्यूज24 के डिजीटल डेस्क पर कार्यरत हूं. मैंने यहां अपने कार्यकाल की शुरुआत अगस्त 2024 से की थी. बीते 1 साल में मैंने कई बीट्स पर काम किया है. हेल्थ बीट से शुरुआत करते हुए आज मैं यूटिलिटी और देश-विदेश की खबरों पर भी काम कर रही हूं. हेल्थ बीट से जुड़ी खबरों में मेरा विशेष ध्यान आयुर्वेद, घरेलू उपचार, लाइफस्टाइल हेल्थ टिप्स और आधुनिक चिकित्सा पर आधारित प्रामाणिक और विशेषज्ञ-प्रामाणित जानकारी लोगों तक साझा करना रहा है. रोजमर्रा की देश और दुनिया से जुड़ी खबरों पर भी सक्रिय रूप से काम कर रही हूं. यूटिलिटी में सब्सिडी, पेंशन और योजनाओं के बारे में बताना मेरी विशेषता है. पत्रकार और कंटेंट राइटर बनकर अपने शब्दों से लोगों को सही और सटीक जानकारी बताना है. मेरी स्कूल शिक्षा दिल्ली के जानकी देवी कन्या विद्याल्य से हुई है. इसके बाद मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई नोएडा के ISOMES मीडिया कॉलेज से की थी. आप मुझसे इन प्लेटफॉर्म्स पर जुड़ सकते हैं. @namrata0105_m

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