AI Designed Vaccine: विज्ञान की दुनिया में एक नया माइलस्टोन सेट हुआ है. यह ऐतिहासिक उपलब्धि है AI द्वारा निर्मित कोरोनावायरस वैक्सीन. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI ने जिस यूनिवर्सल कोरोनावायरस वैक्सीन को बनाया है उसने अपना ह्यूमन ट्रायल भी पास कर लिया है. जर्नल ऑफ इंफेक्शन में प्रकाशित डाटा के अनुसार, फेज 1 क्लिनिकल ट्रायल में 18 से 50 वर्ष की उम्र के 39 स्वस्थ वयस्क वॉलंटियर्स को यह वैक्सीन दी गई और किसी पर कोई गंभीर प्रभाव देखने को नहीं मिला. यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज की ग्लोबल रिसर्च टीम और यूनिवर्सिटी की स्पिनआउट कंपनी DIOSynVax ने इस वैक्सीन को तैयार किया है. यह दुनिया की पहली वैक्सीन है जिसे कंप्यूटर साइमलटेशंस और मशीन लर्निंग एल्गोरिदम से तैयार किया गया है और जिसने सफलतापूर्वक इंसानों पर टेस्टिंग को पास कर लिया है. यह वेरिएंट बूस्टर्स से युनिफाइड डिफेंस सिस्टम की तरफ मॉन्यूमेंटल शिफ्ट का संकेत है.
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क्यों महत्वपूर्ण है यह उपलब्धि
सालों से दुनियाभर में स्वास्थ्य संस्थानों के सामने एक चुनौती रही है कि जब भी किसी वायरस के खिलाफ वैक्सीन बना ली जाती है और उसका नया वैरिएंट आ जाता है तो पुरानी वैक्सीन का असर कम होने लगता है. इससे फर्मासुटिकल मैनुफैक्चर्स को एकबार फिर वैक्सीन का फॉर्मला बदलना पड़ता है और फिर से वैक्सीन लगाने की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ती है. यह नई कोरोनावायरस वैक्सीन ना सिर्फ SARS-CoV-2 स्ट्रेन को न्यूट्रलाइज करती है बल्कि एनिमल-बोर्न कोरोनावायरस को मनुष्यों तक आने में रोकने में भी प्रभावी है.
कैसे काम करती है AI निर्मित वैक्सीन
यह AI निर्मित वैक्सीन हाइली वोलेटाइल सर्फेस इंडिविजुअल वैरिएंट्स म्यूटेशंस पर फोकस नहीं करती बल्कि इम्यूटेबल और जेनेटिकली कंवर्स्ड, वायरस के कोर फीचर्स को आइजोलेट करती है. इससे ये वायरस सर्वाइव नहीं कर पाते और आगे नहीं बढ़ते. रिसर्चर्स ने इन्हीं शेयर्ड स्ट्रक्चर्स को सिंथेटिकली स्टिच करके सिंगुलर और ऑप्टिमाइज्ड मास्टर ट्रेनिंग ब्लूप्रिंट बनाया है जिसे AI सुपर एंटिजेन कहते हैं. इस वैक्सीन से मानव शरीर इन कोर कंपोनेन्ट्स के खिलाफ एंटीबोडीज जनरेट करता है और शरीर को इम्यून करता है. इससे शरीर का अंदरूनी फ्रेमवर्क पूरी तरह से वायरस से बचा रहता है.
बिना इंजेक्शन के लगती है यह वैक्सीन
आमतौर पर कोरोना की वैक्सीन सीरींज की मदद से शरीर में डाली जाती है लेकिन जिस वैक्सीन को AI द्वारा तैयार किया गया है उसे इंजेक्शन से नहीं दिया जाता है. 39 प्रतिभागियों को इंजेक्शन लगाने के बजाय कटिंग एज माइक्रोफ्लिडिक जेट सिस्टम से स्पेशलाइज्ड DNA वैक्सीन दी गई. इस नीडल फ्री टेक्नोलॉजी में स्किन से होकर इम्यून सेल्स को टार्गेट करता फ्लुइड शरीर में जाता है जिसे अल्ट्रा हाई प्रेशर स्ट्रीम से डाला जाता है. इस तरीके से दर्द नहीं हो पाता है और जिन लोगों को सूंई लगाने से डर लगता है उनके लिए एक अच्छा ऑप्शन बनकर उभरा है.
भारत को कैसे मिल सकता है फायदा
- यह AI डिजाइन्ड वैक्सीन अगर भारत में आती है तो लोगों को हर एक म्यूटेशन के लिए अलग वैक्सीन नहीं लगानी होगी. यह लॉन्ग लास्टिंग इफेक्ट वाली वैक्सीन लंबे समय तक लोगों को कोरोना से बचाए रखेगी.
- सूंई से डरने वाले लोगों के लिए इस वैक्सीन को लगवाना आसान हो जाएगा. खासतौर से ग्रामीण इलाकों में लोगों को इस वैक्सीन से डर नहीं लगेगा.
- इससे बायोमेडिकल वेस्ट कम होगा और एक केंपेन के तहत ही काम पूरा हो जाएगा.
- भारत में ऐसे कई स्थान हैं जहां मानव और जानवर एकदूसरे के संपर्क में आते रहते हैं. ऐसे में जानवरों से वायरस फैलने का खतरा कम होगा.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
AI Designed Vaccine: विज्ञान की दुनिया में एक नया माइलस्टोन सेट हुआ है. यह ऐतिहासिक उपलब्धि है AI द्वारा निर्मित कोरोनावायरस वैक्सीन. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI ने जिस यूनिवर्सल कोरोनावायरस वैक्सीन को बनाया है उसने अपना ह्यूमन ट्रायल भी पास कर लिया है. जर्नल ऑफ इंफेक्शन में प्रकाशित डाटा के अनुसार, फेज 1 क्लिनिकल ट्रायल में 18 से 50 वर्ष की उम्र के 39 स्वस्थ वयस्क वॉलंटियर्स को यह वैक्सीन दी गई और किसी पर कोई गंभीर प्रभाव देखने को नहीं मिला. यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज की ग्लोबल रिसर्च टीम और यूनिवर्सिटी की स्पिनआउट कंपनी DIOSynVax ने इस वैक्सीन को तैयार किया है. यह दुनिया की पहली वैक्सीन है जिसे कंप्यूटर साइमलटेशंस और मशीन लर्निंग एल्गोरिदम से तैयार किया गया है और जिसने सफलतापूर्वक इंसानों पर टेस्टिंग को पास कर लिया है. यह वेरिएंट बूस्टर्स से युनिफाइड डिफेंस सिस्टम की तरफ मॉन्यूमेंटल शिफ्ट का संकेत है.
यह भी पढ़ें – क्या पान मसाला भी उतना ही खतरनाक है जितना Smoking? डॉक्टर से जानिए मुंह से लेकर फेफड़ों पर असर
क्यों महत्वपूर्ण है यह उपलब्धि
सालों से दुनियाभर में स्वास्थ्य संस्थानों के सामने एक चुनौती रही है कि जब भी किसी वायरस के खिलाफ वैक्सीन बना ली जाती है और उसका नया वैरिएंट आ जाता है तो पुरानी वैक्सीन का असर कम होने लगता है. इससे फर्मासुटिकल मैनुफैक्चर्स को एकबार फिर वैक्सीन का फॉर्मला बदलना पड़ता है और फिर से वैक्सीन लगाने की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ती है. यह नई कोरोनावायरस वैक्सीन ना सिर्फ SARS-CoV-2 स्ट्रेन को न्यूट्रलाइज करती है बल्कि एनिमल-बोर्न कोरोनावायरस को मनुष्यों तक आने में रोकने में भी प्रभावी है.
कैसे काम करती है AI निर्मित वैक्सीन
यह AI निर्मित वैक्सीन हाइली वोलेटाइल सर्फेस इंडिविजुअल वैरिएंट्स म्यूटेशंस पर फोकस नहीं करती बल्कि इम्यूटेबल और जेनेटिकली कंवर्स्ड, वायरस के कोर फीचर्स को आइजोलेट करती है. इससे ये वायरस सर्वाइव नहीं कर पाते और आगे नहीं बढ़ते. रिसर्चर्स ने इन्हीं शेयर्ड स्ट्रक्चर्स को सिंथेटिकली स्टिच करके सिंगुलर और ऑप्टिमाइज्ड मास्टर ट्रेनिंग ब्लूप्रिंट बनाया है जिसे AI सुपर एंटिजेन कहते हैं. इस वैक्सीन से मानव शरीर इन कोर कंपोनेन्ट्स के खिलाफ एंटीबोडीज जनरेट करता है और शरीर को इम्यून करता है. इससे शरीर का अंदरूनी फ्रेमवर्क पूरी तरह से वायरस से बचा रहता है.
बिना इंजेक्शन के लगती है यह वैक्सीन
आमतौर पर कोरोना की वैक्सीन सीरींज की मदद से शरीर में डाली जाती है लेकिन जिस वैक्सीन को AI द्वारा तैयार किया गया है उसे इंजेक्शन से नहीं दिया जाता है. 39 प्रतिभागियों को इंजेक्शन लगाने के बजाय कटिंग एज माइक्रोफ्लिडिक जेट सिस्टम से स्पेशलाइज्ड DNA वैक्सीन दी गई. इस नीडल फ्री टेक्नोलॉजी में स्किन से होकर इम्यून सेल्स को टार्गेट करता फ्लुइड शरीर में जाता है जिसे अल्ट्रा हाई प्रेशर स्ट्रीम से डाला जाता है. इस तरीके से दर्द नहीं हो पाता है और जिन लोगों को सूंई लगाने से डर लगता है उनके लिए एक अच्छा ऑप्शन बनकर उभरा है.
भारत को कैसे मिल सकता है फायदा
- यह AI डिजाइन्ड वैक्सीन अगर भारत में आती है तो लोगों को हर एक म्यूटेशन के लिए अलग वैक्सीन नहीं लगानी होगी. यह लॉन्ग लास्टिंग इफेक्ट वाली वैक्सीन लंबे समय तक लोगों को कोरोना से बचाए रखेगी.
- सूंई से डरने वाले लोगों के लिए इस वैक्सीन को लगवाना आसान हो जाएगा. खासतौर से ग्रामीण इलाकों में लोगों को इस वैक्सीन से डर नहीं लगेगा.
- इससे बायोमेडिकल वेस्ट कम होगा और एक केंपेन के तहत ही काम पूरा हो जाएगा.
- भारत में ऐसे कई स्थान हैं जहां मानव और जानवर एकदूसरे के संपर्क में आते रहते हैं. ऐसे में जानवरों से वायरस फैलने का खतरा कम होगा.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.