TMC में BJP ने कैसे लगाई सेंध? 14 मई को लिखी गई टूट की स्क्रिप्ट; जानें- बगावत के लिए क्यों चुना 8 जून

बागी सांसदों का यह गुट अब टीएमसी से अलग होकर एक अलग ब्लॉक बनाना चाहता है और भाजपा के नेतृत्व वाले NDA के साथ हाथ मिलाने की तैयारी में है. लेकिन सवाल यह उठता है कि विधायकों की बगावत के बाद आखिर इस विद्रोह की शुरुआत कब और कैसे हुई.

Mamata banerjee

पश्चिम बंगाल की राजनीति में 8 जून की सुबह एक ऐसा भूचाल आया, जिसने ममता बनर्जी को पूरी तरह हिलाकर रख दिया. ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की अहम बैठक के बीच, ममता बनर्जी की नाक के नीचे दिल्ली में पार्टी के सांसदों के एक बड़े धड़े ने बगावत का बिगुल फूंक दिया. यह विद्रोह कोई अचानक हुई घटना नहीं था, बल्कि पिछले कई हफ्तों से बंद कमरों में बुना गया एक बेहद गुप्त और सोचा-समझा सियासी ताना-बाना था.

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बागी सांसदों का यह गुट अब टीएमसी से अलग होकर एक अलग ब्लॉक बनाना चाहता है और भाजपा के नेतृत्व वाले NDA के साथ हाथ मिलाने की तैयारी में है. लेकिन सवाल यह उठता है कि विधायकों की बगावत के बाद आखिर इस विद्रोह की शुरुआत कब और कैसे हुई.

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ममता के एक फैसले से शुरू हुआ खेल

इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि इस बगावत की स्क्रिप्ट 14 मई को ममता बनर्जी के कालीघाट आवास पर हुई बैठक में ही लिख दी गई थी. ममता बनर्जी ने काकोली घोष दस्तीदार को लोकसभा के चीफ व्हिप के पद से हटाकर कल्याण बंद्योपाध्याय को दोबारा बहाल कर दिया था. अचानक पद से हटाए जाने से आहत काकोली घोष ने सोशल मीडिया पर अपना दर्द बयां करते हुए लिखा था, ’76 से पहचान, 84 से साथ चलना, चार दशकों की वफादारी के लिए आज मुझे यह पुरस्कार मिला.’

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टीएमसी सूत्रों के मुताबिक, इस नाराजगी को भांपते हुए भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने तुरंत काकोली घोष से संपर्क साधा. कुछ ही दिनों बाद केंद्र सरकार ने उन्हें ‘वाई’ कैटेगरी की सुरक्षा दे दी, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया. इसी दौरान अभिषेक बनर्जी सहित कई टीएमसी नेताओं के सुरक्षा कवच में कटौती की गई थी, जिसने आग में घी का काम किया.

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बागी सांसदों ने बयां किया दर्द

विद्रोह के कारणों पर बोलते हुए काकोली घोष ने मीडिया से साफ कहा, ‘मैं 42 साल से ममता दीदी के साथ हूं, कोई नई नवेली नहीं हूं. लेकिन पार्टी में बड़े पैमाने पर चल रहे भ्रष्टाचार और गलत कामों से मेरा दिल आहत था. जब मैंने सहयोगियों में भी यही उदासी देखी, तो हमने केंद्र और राज्य सरकार के साथ मिलकर अपने क्षेत्र के विकास के लिए काम करने का फैसला किया. शुभेंदु अधिकारी जी ने इस सिलसिले में सबसे संपर्क किया.’

टीएमसी सांसदों की निराशा का फायदा उठाते हुए भाजपा ने उनसे संपर्क साधना शुरू कर दिया. कुछ सांसदों से भाजपा नेताओं ने संपर्क किया तो कुछ को काकोली घोष ने तैयार किया.

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‘कार्यकर्ता थे दबाव में’

पूर्व बर्धमान से टीएमसी सांसद शर्मिला सरकार, जो भूपेंद्र यादव के घर मौजूद थीं, उन्होंने अपनी ही लीडरशिप पर तीखे सवाल उठाए. शर्मिला ने कहा, ‘विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद शीर्ष नेतृत्व पूरी तरह पंगु और पहुंच से बाहर हो गया था. चुनाव के बाद हुई हिंसा के बाद मुझे फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी में भेजा गया था. मैंने गांवों में जाकर कार्यकर्ताओं की दुर्दशा और उनका दर्द देखा. मैंने अपनी विस्तृत रिपोर्ट आलाकमान को सौंपी, लेकिन ऊपर से कोई निर्देश या सलाह नहीं आई. पूरी पार्टी अधर में लटकी थी. कोई हमसे बात तक नहीं कर रहा था.’

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शर्मिला सरकार ने नई सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग के लिए बीएसएफ को जमीन देना और कोलकाता के चिंगरीघाटा मेट्रो का काम कुछ ही दिनों में पूरा करना बेहद प्रभावशाली है. विकास के लिए केंद्र के साथ चलना जरूरी था.

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बंगाल विधानसभा के ‘खेला’ ने सांसदों को दिया हौसला

इस बगावत को हवा देने में बंगाल विधानसभा के भीतर चल रहे समानांतर विद्रोह की बड़ी भूमिका रही. विधानसभा में ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी के 80 विधायकों में से 60 विधायकों ने बगावत कर विधायक दल पर नियंत्रण कर लिया था.

इंडियन एक्सप्रेस ने एक वरिष्ठ सांसद के हवाले से लिखा है, जिन्होंने अपना नाम नहीं छापने के लिए कहा था, ‘जब 60 विधायकों ने पार्टी के खिलाफ स्टैंड लिया, तो हमारा हौसला भी बढ़ गया. हम जानते थे कि पार्टी भ्रष्टाचार में डूबी है और जमीन पर काम करने वाले सांसदों को सम्मान नहीं मिलता. 8 जून की टाइमिंग जानबूझकर तय की गई थी ताकि यह ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक से मेल खाए. हमें पहले से पता था कि उसी दिन सुखेंदु शेखर रॉय भी इस्तीफा दे देंगे.’

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अंत तक बेखबर रहा टीएमसी का खुफिया तंत्र

TMC के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि उन्हें कुछ सांसदों की जोड़-तोड़ की भनक तो थी, लेकिन बगावत का आंकड़ा दो-तिहाई तक पहुंच जाएगा, इसका अंदाजा किसी को नहीं था. पार्टी ने बगावत को रोकने के लिए 3 जून से ही संदिग्ध सांसदों को फोन करने, एकजुट रखने की कवायद शुरू कर दी थी. यहां तक कि कुछ नेताओं को जिम्मेदारी दी गई थी कि वे संदिग्ध बागी सांसदों को व्यक्तिगत रूप से फोन करें और उनसे उनके लाइव ठिकाने की तस्वीरें मांगें. लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

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TMC के एक वफादार वरिष्ठ सांसद ने निराशा जताते हुए कहा कि हमें पता था कि 10-12 लोग काकोली दी के साथ हैं. लेकिन ममता बनर्जी के टिकट पर जीतकर महज एक चुनावी झटके के बाद लोग इस तरह पाला बदल लेंगे, यह अकल्पनीय था. इन बागियों को जनता को जवाब देना होगा.

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दलबदल कानून से बचने का जादुई आंकड़ा

सोमवार को केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के दिल्ली आवास पर हुई एक गुप्त बैठक ने ममता बनर्जी के खेमे में हड़कंप मचा दिया. बारासात की वरिष्ठ टीएमसी सांसद काकोली घोष के नेतृत्व में बागी धड़े ने टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों के हस्ताक्षर वाला पत्र लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कार्यालय को भेजने का दावा किया है. दलबदल विरोधी कानून के तहत कानूनी रूप से अपनी सदस्यता बचाने और पार्टी को दो-फाड़ करने के लिए लोकसभा में दो-तिहाई सांसदों का एक साथ आना जरूरी था. बागियों ने 20 का आंकड़ा जुटाकर ममता बनर्जी को तकनीकी रूप से मात दे दी है.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

Arif Khan

आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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